नई दिल्ली: देश के करोड़ों ग्रामीण मजदूरों और कामगारों के लिए 12 दिसंबर का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ है। केंद्र सरकार ने ग्रामीण भारत की जीवनरेखा मानी जाने वाली 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना' (MGNREGA) में बड़े बदलावों को मंजूरी दे दी है। सरकार ने इस योजना का नाम बदलकर अब 'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना' (Pujya Bapu Gramin Rozgar Yojana) कर दिया है।READ ALSO:-बड़ी राहत: अब सेना के अस्पतालों में भी चलेगा 'आयुष्मान कार्ड', मिलेगा 5 लाख तक मुफ्त इलाज; यूपी के इन 12 जिलों में तैयारी तेज—जानें पूरी डिटेल
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सिर्फ नाम ही नहीं, सरकार ने काम के घंटे और दाम दोनों में बढ़ोतरी कर श्रमिकों को डबल तोहफा दिया है। इस फैसले से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
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अब 100 नहीं, 125 दिन मिलेगा रोजगार
\r\n\r\nकेंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, 'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना' के तहत अब गारंटीकृत रोजगार के दिनों की संख्या बढ़ा दी गई है।
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- \r\n पहले: 100 दिन का रोजगार।\r\n \r\n
- \r\n अब: 125 दिन का रोजगार।\r\n \r\n
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यानी अब जॉब कार्ड धारकों को साल में अतिरिक्त 25 दिनों का काम मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण परिवारों की आय में स्थिरता आएगी और पलायन (Migration) को रोकने में मदद मिलेगी।
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मजदूरी में बढ़ोतरी: अब मिलेंगे ₹240 प्रतिदिन
\r\n\r\nबढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार ने न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage) में भी संशोधन किया है। अब मजदूरों को 240 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। पहले अलग-अलग राज्यों में दरें भिन्न थीं और औसत कम था, लेकिन अब इस बेस रेट के तय होने से मजदूरों के हाथ में ज्यादा पैसा आएगा।
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यह फैसला 'काम के अधिकार' (Right to Work) को और मजबूत करता है। अधिकारियों का कहना है कि बढ़ी हुई मजदूरी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों (DBT) में भेजी जाएगी।
\r\n\r\n2005 से 2025: नरेगा से 'पूज्य बापू' तक का सफर
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इस योजना का इतिहास काफी पुराना है।
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- \r\n 2005: इसे 'राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम' (NREGA) के रूप में शुरू किया गया था।\r\n \r\n
- \r\n बाद में: इसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम देकर MGNREGA किया गया।\r\n \r\n
- \r\n 2025: अब 12 दिसंबर को इसे नया क्लेवर देते हुए 'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना' नाम दिया गया है।\r\n \r\n
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सरकार का कहना है कि "पूज्य बापू" शब्द महात्मा गांधी के प्रति आदर और ग्रामीण विकास (Gram Swaraj) के उनके सपनों को पुनर्जीवित करने का प्रतीक है।
\r\n\r\nग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी मजबूती
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इस योजना का उद्देश्य केवल पैसा बांटना नहीं, बल्कि गांवों का विकास करना भी है। Pujya Bapu Gramin Rozgar Yojana के तहत अब निम्नलिखित कार्यों पर और जोर दिया जाएगा:
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- \r\n जल संरक्षण (तालाब और चेक डैम निर्माण)।\r\n \r\n
- \r\n वृक्षारोपण और हरियाली।\r\n \r\n
- \r\n ग्रामीण संपर्क सड़कें।\r\n \r\n
- \r\n सिंचाई नहरों का निर्माण और रखरखाव।\r\n \r\n
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अतिरिक्त 25 दिनों के रोजगार का उपयोग इन स्थाई संपत्तियों (Assets) को बनाने में किया जाएगा, जिससे गांवों की तस्वीर बदलेगी।
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मजदूरों में खुशी की लहर
\r\n\r\nसरकार के इस फैसले का ग्रामीण क्षेत्रों में स्वागत हो रहा है। 100 दिनों की सीमा अक्सर खत्म हो जाती थी, जिसके बाद मजदूरों को खाली बैठना पड़ता था। अब 125 दिन की सीमा होने से उन्हें एक महीने का अतिरिक्त काम मिलेगा। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब ग्रामीण जनता के हाथ में पैसा आएगा, तो बाजार में मांग बढ़ेगी, जिससे देश की जीडीपी को भी फायदा होगा।
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'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना' (PBGRY) के रूप में सरकार ने ग्रामीण भारत को एक नया विजन दिया है। नाम बदलने के साथ-साथ काम और दाम बढ़ाना यह दर्शाता है कि सरकार का फोकस ग्रामीण कल्याण पर है। अब चुनौती इन बदलावों को पारदर्शी तरीके से धरातल पर उतारने की होगी, ताकि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को इसका पूरा लाभ मिल सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.