मुंबई: वेटरन एक्टर धर्मेंद्र के निधन से पूरा बॉलीवुड शोक में डूबा हुआ है। गुजरे जमाने की मशहूर अदाकारा और दिवंगत सुपरस्टार दिलीप कुमार की पत्नी सायरा बानो (Saira Banu) इस क्षति से बहुत आहत हैं। दिग्गज अभिनेत्री ने दिग्गज एक्टर को श्रद्धांजलि देते हुए सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक और लंबा-चौड़ा पोस्ट साझा किया है, जिसमें उन्होंने धर्मेंद्र और दिलीप कुमार (यूसुफ साहब) के बीच अटूट रिश्ते और पुरानी यादों को ताजा किया है। सायरा बानो ने यह भी बताया कि धर्मेंद्र, उनके पति दिलीप कुमार को अपना 'संरक्षक' मानते थे।READ ALSO:-आगरा में 'बाबरी' पर बवाल: TMC विधायक के लिए यमुना किनारे खोदी कब्र; सिर काटने वाले को 1 करोड़ और सोने की चूड़ियां देने का ऐलान
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'सिनेमाई युग का अंत और यूसुफ साहब के 'धरम' की कमी'

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एक्ट्रेस ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि धरम जी का निधन ऐसा लगता है मानो सिनेमाई और इसके इतिहास का एक अध्याय बंद हो गया है। उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए लिखा, "मेरे लिए यह क्षति सिर्फ एक को-स्टार की कमी नहीं, बल्कि वे मेरे प्रिय यूसुफ साहब के 'धरम' थे।" सायरा बानो धर्मेंद्र के निधन पर उस गर्मजोशी को याद करती हैं जो अब भागदौड़ भरे दौर में कम देखने को मिलती है।
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जब दिलीप कुमार के घर में बिन बुलाए घुस गए थे धर्मेंद्र

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सायरा बानो ने धर्मेंद्र की विनम्रता और दिलीप कुमार के प्रति उनके अथाह प्रेम को दर्शाने वाला एक मजेदार किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र जब पहली बार 1952 में लुधियाना से मुंबई आए थे, तो वह दिलीप साहब से मिलने की सिर्फ एक ही सपने के साथ आए थे।
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    किस्सा: सायरा बानो ने बताया कि धर्मेंद्र सीधे बांद्रा के पाली हिल स्थित दिलीप साहब के घर की ओर बढ़ गए। एक युवा की साहस भरी मासूमियत दिखाते हुए वह बिना किसी रोक-टोक के घर में दाखिल हो गए।
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    परिणाम: उन्होंने यूसुफ साहब को सोफे पर गहरी नींद में सोते हुए देखा। डर के मारे धर्मेंद्र खड़े रहे और जैसे ही दिलीप साहब की नींद खुली, "बेचारा लड़का अपनी ही बेबाकी से घबराकर, किसी चौंके हुए हिरण की तरह तेजी से घर से बाहर भाग खड़ा हुआ।" यह किस्सा धरम जी की पसंदीदा यादों में से एक बन गया। 
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प्यार का अटूट बंधन और संरक्षक की तलाश

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छह साल बाद, 1958 में, उनकी मुलाकात फिल्मफेयर टैलेंट हंट के जरिए हुई। यह मुलाकात दिलीप साहब की छोटी बहन फरीदा ने तय की थी।
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    संरक्षक का रिश्ता: सायरा बानो ने बताया कि दिलीप साहब ने अपनी उसी अनोखी सौम्यता के साथ उनसे बात की। सर्दी की शाम में जाते समय, उन्होंने अपना स्वेटर उतारकर धरम जी के कंधों पर डाल दिया, और वहीं से उनके बीच प्यार का जीवन भर का सूत्र बन गया।
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    कमजोर वक्त में संभाला: सायरा बानो धर्मेंद्र ने बताया कि सुपरस्टार बनने के बोझ से जब धरम जी परेशान होते थे, तो वे आधी रात को भी उनके घर आ सकते थे। यूसुफ साहब उन्हें संभालते और मार्गदर्शन करते थे। (Internal link to related article on Saira Banu's previous memories of Dilip Kumar)
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'बेताब' की चिंता और अटूट निष्ठा

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एक्ट्रेस ने वह रात भी याद की जब धर्मेंद्र अपने बेटे सनी देओल की डेब्यू फिल्म 'बेताब' की तस्वीरें लेकर आए थे। वे एक युवा पिता की तरह असुरक्षा और आश्वासन की तलाश में थे। दिलीप साहब ने उन्हें प्यार से सुना और बात की, जिससे धरम आश्वस्त होकर मुस्कुराते हुए चले गए। सायरा बानो ने बताया, "ऐसे ही क्षणों में मैंने देखा कि वे यूसुफ साहब को एक आदर्श के रूप में नहीं, बल्कि अपने संरक्षक (Mentor) के रूप में कितनी गहराई से देखते थे।"
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धर्मेंद्र अक्सर सायरा बानो को चिढ़ाते हुए कहते थे, "सायरा, मैं तो यूसुफ साहब के प्यार में आपका मुकाबला करता हूं।"
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धर्मेंद्र का निधन बॉलीवुड के एक युग का अंत है। सायरा बानो धर्मेंद्र को एक महान, सौम्य और विनम्र इंसान के रूप में याद करती हैं। दिलीप कुमार के प्रति धर्मेंद्र की निष्ठा और प्रेम भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक अनोखा अध्याय है, जो 'धरम' और 'यूसुफ साहब' के अटूट बंधन को दर्शाता है। सायरा बानो ने उन्हें अंतिम विदाई देते हुए उन्हें उस शांति में विश्राम मिलने की कामना की, जिसके वे सच्चे हकदार थे।
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