राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi NCR) में हवा की गुणवत्ता (Air Quality) लगातार बिगड़ती जा रही है, जिसने पूरे क्षेत्र को स्वास्थ्य संकट में डाल दिया है। कड़ाके की ठंड ने अभी ठीक से दस्तक भी नहीं दी है, लेकिन प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा पर पहुंच चुका है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, देश की राजधानी दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) रेड जोन यानी 'बेहद खराब' श्रेणी में दर्ज किया गया है। प्रदूषण के इस जहर के कारण अस्पताल में बढ़े केस देखे जा रहे हैं, खासकर सांस संबंधी बीमारियों वाले मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है।READ ALSO:-यूपी में 'मोंथा' का तांडव: 23 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, कई शहरों में टूटा अक्टूबर की सर्दी का रिकॉर्ड, पारा 10 डिग्री तक लुढ़का
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हर तरफ प्रदूषण का जहर

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Delhi NCR का कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहाँ लोगों को साँस लेने के लिए साफ हवा मिल रही हो। 301 से 400 के बीच के AQI को 'बेहद खराब' बताया जाता है, जिसका अर्थ है कि लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
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    धुंध की चादर: प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ अब हवा में सुबह और शाम के वक्त धुंध (Smog) की चादर भी साफ नजर आ रही है।
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    शारीरिक परेशानी: अधिक समय खुली हवा में बिताने पर लोगों को गले में जलन, साँस लेने में समस्या, तथा आंखों से पानी आने और जलन की शिकायत हो रही है।
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गाज़ियाबाद-नोएडा में भी स्थिति खराब

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हालात सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि एनसीआर के प्रमुख शहरों गाज़ियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के भी ठीक नहीं हैं। इन सभी इलाकों का AQI 'खराब' श्रेणी में पहुंच गया है, जिससे लोग प्रदूषित हवा में साँस लेने को मजबूर हैं।
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    पार्क सूने: सुबह और शाम के वक्त पार्कों में कसरत करने या समूह में बैठने वाले बुजुर्ग अब न के बराबर दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि जहरीली हवा उन्हें घरों में छिपने को मजबूर कर रही है।
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    AQI स्थिति (उदाहरण):
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      दिल्ली (औसत): 'बेहद खराब' श्रेणी (रेड जोन के करीब)
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      गाज़ियाबाद: 'खराब' श्रेणी में उच्च स्तर
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      नोएडा/ग्रेटर नोएडा: 'खराब' श्रेणी में
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डॉक्टर्स ने दी गंभीर चेतावनी

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गाज़ियाबाद के जिला एमएमजी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार ने इस स्थिति को देखते हुए नागरिकों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
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    अस्पताल में मरीजों का इजाफा: डॉ. कुमार ने बताया कि प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद अस्पताल में साँस संबंधी केस (अस्थमा, ब्रोंकाइटिस) की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है।
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    खतरा: उन्होंने चेतावनी दी कि बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं के लिए यह प्रदूषण सबसे ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि इन वर्गों पर इसका असर सबसे पहले और गहरा होता है।
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    सुरक्षा उपाय: डॉक्टर्स ने कहा है कि सुबह और शाम के वक्त जब प्रदूषण का स्तर ज्यादा होता है, तब जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलना चाहिए। बाहर निकलने पर मास्क का इस्तेमाल करना कारगर साबित हो सकता है।
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गंभीर श्रेणी का अनुमान

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डॉ. राकेश कुमार ने अनुमान जताया है कि आने वाले दिनों में ठंड बढ़ने के साथ प्रदूषण स्तर में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे AQI 'गंभीर' (Severe) श्रेणी की ओर बढ़ सकता है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने इमरजेंसी की स्थिति को देखते हुए डॉक्टर्स की ड्यूटी और अस्थमा मरीजों के लिए सभी इंतजामों को 'अलर्ट मोड' में रखा है।
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