नई दिल्ली: दिल्ली और देहरादून के बीच सफर करने वाले यात्रियों का इंतजार अब खत्म होने लगा है। Delhi-Dehradun Expressway का पहला चरण अब आम जनता के लिए खुल गया है। सोमवार से दिल्ली के अक्षरधाम से उत्तर प्रदेश के बागपत तक 32 किलोमीटर लंबे सेक्शन पर वाहनों की आवाजाही ट्रायल मोड में शुरू हो गई है। सबसे अच्छी खबर यह है कि NHAI के मुताबिक, अगले एक महीने तक इस रूट पर यात्रियों से कोई टोल नहीं वसूला जाएगा।READ ALSO:-Delhi Air Pollution: दिल्ली की हवा में सांस लेना यानी रोज 14 सिगरेट पीना! नई रिपोर्ट ने उड़ाई नींद, मुंबई-बेंगलुरु का भी हाल बेहाल
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हालांकि, पूरा प्रोजेक्ट पूरा होने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा, लेकिन यह एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और पर्यावरण संरक्षण का एक बेहतरीन नमूना है। इसमें कुछ ऐसी खूबियां हैं जो इसे भारत के किसी भी दूसरे एक्सप्रेसवे से अलग और खास बनाती हैं।
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ढाई घंटे में पूरा होगा दिल्ली से दून का सफर
\r\n\r\nकुल 210 किलोमीटर लंबे Delhi-Dehradun Expressway के बनने के बाद दिल्ली से देहरादून का सफर मात्र ढाई घंटे में पूरा हो सकेगा, जिसमें अभी करीब 6 घंटे लगते हैं। इस प्रोजेक्ट को चार चरणों में बनाया जा रहा है। पहले इसे दिसंबर 2024 तक पूरा होना था, लेकिन अब इसकी नई समयसीमा फरवरी 2026 तय की गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस एक्सप्रेसवे को 'ईको-फ्रेंडली' क्यों कहा जा रहा है? आइए जानते हैं इसकी 5 सबसे बड़ी खासियतें।
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एक्सप्रेसवे की 5 अनोखी बातें जो इसे बनाती हैं 'नंबर वन'
\r\n\r\nइस एक्सप्रेसवे को बनाते समय राजाजी नेशनल पार्क और आसपास के वन्यजीवों का विशेष ध्यान रखा गया है। यहां ऐसी तकनीक इस्तेमाल की गई है जो शायद ही भारत में पहले कभी देखी गई हो।
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1. एशिया का सबसे लंबा वन्यजीव गलियारा (Wildlife Corridor) इस एक्सप्रेसवे का एक बड़ा हिस्सा राजाजी राष्ट्रीय उद्यान (Rajaji National Park) के पास से गुजरता है। यहां 12 से 14 किलोमीटर लंबा एक एलिवेटेड वन्यजीव गलियारा बनाया गया है। यह एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है। इसका मकसद यह है कि नीचे से हाथी और अन्य जंगली जानवर बेरोकटोक जंगल में घूम सकें और ऊपर से गाड़ियां सरपट दौड़ सकें। जानवरों की आवाजाही के लिए कई अंडरपास भी बनाए गए हैं।
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2. बंदरों के लिए खास 'मंकी लैडर' (Monkey Ladders) अक्सर हाईवे पर बंदरों के एक्सीडेंट की खबरें आती हैं। Delhi-Dehradun Expressway पर बंदरों को सड़क पार कराने के लिए एक अनोखी पहल की गई है। यहां पेड़ों को आपस में जोड़ने वाले विशेष 'मंकी लैडर' या कैनोपी ब्रिज बनाए गए हैं। इससे बंदर सड़क पर उतरे बिना ही एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर जा सकेंगे और हादसों से बच सकेंगे।
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3. कीड़ों और ड्राइवर की आंखों के लिए 'पीली लाइट' आमतौर पर सड़कों पर सफेद एलईडी लाइट्स होती हैं, लेकिन यहां पीली लाइटों (Yellow Lights) का इस्तेमाल किया गया है। इसके दो बड़े वैज्ञानिक कारण हैं:
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- \r\n कीड़ों से बचाव: सफेद रोशनी कीड़ों को आकर्षित करती है, लेकिन पीली रोशनी को देखकर कीड़े नहीं आते। चूंकि यह जंगल का रास्ता है, इसलिए यह बेहद जरूरी था।\r\n \r\n
- \r\n बेहतर विजिबिलिटी: पीली रोशनी की तरंग दैर्ध्य (Wavelength) लंबी होती है, जिससे यह कोहरे, बारिश या धूल में कम बिखरती है। इससे ड्राइवर को रास्ता साफ दिखता है और आंखों पर जोर (Eye Strain) भी कम पड़ता है।\r\n \r\n
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4. ध्वनि अवरोधक (Sound Barriers) तेज रफ्तार गाड़ियों के शोर से जंगल के जानवरों को परेशानी न हो, इसके लिए एक्सप्रेसवे के वन्यजीव गलियारे वाले हिस्से में विशेष साउंड बैरियर्स लगाए गए हैं। ये अवरोधक गाड़ियों के शोर को जंगल में फैलने से रोकेंगे, जिससे जानवर डरेंगे नहीं और उनका प्राकृतिक आवास शांत रहेगा।
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5. विशेष सुरक्षात्मक बाड़ (Fencing) एक्सप्रेसवे के मुख्य हिस्से में कोई भी जानवर अचानक न आ जाए, इसके लिए दोनों तरफ मजबूत सुरक्षात्मक बाड़ लगाई गई है। इससे न सिर्फ जानवरों की जान बचेगी, बल्कि तेज रफ्तार में चल रही गाड़ियों के एक्सीडेंट होने का खतरा भी खत्म हो जाएगा।
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चारों फेज का ताजा अपडेट
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- \r\n फेज-1: अक्षरधाम से बागपत (32 किमी) - ट्रायल के लिए खुल गया है।\r\n \r\n
- \r\n फेज-2: बागपत से सहारनपुर - काम लगभग पूरा हो चुका है।\r\n \r\n
- \r\n फेज-3: सहारनपुर बाइपास से गणेशपुर - निर्माण कार्य तेजी से जारी है।\r\n \r\n
- \r\n फेज-4: गणेशपुर से देहरादून - यहां सेफ्टी ऑडिट चल रहा है।\r\n \r\n
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Delhi-Dehradun Expressway आधुनिक विकास और प्रकृति के बीच संतुलन का एक शानदार उदाहरण है। चाहे वह एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर हो या फिर मंकी लैडर जैसी छोटी लेकिन अहम पहल, यह एक्सप्रेसवे भारत में सड़क निर्माण की दिशा और दशा दोनों बदलने वाला है। फरवरी 2026 तक इसके पूरी तरह शुरू होने की उम्मीद है, जिसके बाद सफर सुहाना और सुरक्षित दोनों होगा।
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का अक्षरधाम-बागपत हिस्सा शुरू हो गया है। 210 किमी लंबे इस एक्सप्रेसवे में एशिया का सबसे लंबा वन्यजीव गलियारा, बंदरों के लिए मंकी लैडर, पीली लाइटें और साउंड बैरियर्स जैसी 5 अनोखी खूबियां हैं। इसका पूरा काम फरवरी 2026 तक खत्म
Sabse pehle comment karne wale banein.