नई दिल्ली: पहाड़ों की रानी देहरादून जाने का प्लान बना रहे दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। जिस पल का इंतजार लाखों यात्री कर रहे थे, वह आ गया है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (Delhi-Dehradun Expressway) का ट्रायल रन रविवार रात से शुरू कर दिया गया है। गीता कॉलोनी के पास लगे बैरिकेड्स हटा दिए गए हैं और अब इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर गाड़ियां दौड़ने लगी हैं।READ ALSO:-UP में मेट्रो क्रांति: मेरठ-गोरखपुर से प्रयागराज तक बिछेगा 1575 KM का जाल, 2047 तक बदल जाएगी प्रदेश की तस्वीर
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इस एक्सप्रेसवे के पूरी तरह शुरू होने के बाद दिल्ली से देहरादून की दूरी सिमटकर महज ढाई घंटे रह जाएगी, जिसमें अभी 6 से 7 घंटे का समय लगता है। यह प्रोजेक्ट न केवल समय बचाएगा बल्कि दिल्ली की सड़कों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से भी बड़ी राहत दिलाएगा।
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ट्रायल रन शुरू, जल्द मिलेगा नए साल का तोहफा
\r\n\r\nअधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को ट्रायल रन के तौर पर खोला गया है ताकि कमियों की पहचान की जा सके और सुरक्षा मानकों को परखा जा सके। एक मोटरसाइकिल सवार ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, "आज इसे ट्रायल के लिए खोला गया है। यह एक्सप्रेसवे हमारी बहुत मदद करेगा और हमें घंटों के ट्रैफिक जाम से बचाएगा।"
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सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए साल (जनवरी 2026) के मौके पर इस महत्वपूर्ण परियोजना का औपचारिक उद्घाटन कर सकते हैं। इसे दिल्लीवासियों के लिए न्यू ईयर गिफ्ट माना जा रहा है।
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11,868 करोड़ की लागत और हाई-टेक फीचर्स
\r\n\r\nलगभग 11,868.6 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बने इस दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 210 किलोमीटर है। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के बागपत, शामली और सहारनपुर होते हुए उत्तराखंड के देहरादून तक जाता है।
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इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका 'इको-फ्रेंडली' होना है। राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji National Park) के पास से गुजरने वाले हिस्से में एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर (एलिवेटेड रोड) बनाया गया है, ताकि वन्यजीवों को गाड़ियों की आवाजाही से कोई परेशानी न हो।
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बिजली की लाइनों ने क्यों बढ़ाई थी देरी?
\r\n\r\nदरअसल, इस दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का ट्रायल रन अक्टूबर में ही शुरू होने वाला था। लेकिन बागपत और सहारनपुर वाले हिस्से में हाई-टेंशन ट्रांसमिशन लाइनें एक बड़ी बाधा बन गई थीं। ये लाइनें एक्सप्रेसवे के ऊपर से गुजर रही थीं, जिससे निर्माण और सुरक्षा दोनों खतरे में थे।
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इन लाइनों को शिफ्ट करना आसान नहीं था क्योंकि इससे पूरे सहारनपुर क्षेत्र की बिजली आपूर्ति ठप हो सकती थी। हालांकि, प्रशासन और एनएचएआई (NHAI) ने शटडाउन लेकर और युद्धस्तर पर काम करके इस समस्या को सुलझा लिया है। अब तकनीकी बाधाएं दूर होने के बाद गाड़ियों की आवाजाही शुरू कर दी गई है।
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रूट और कनेक्टिविटी: किन शहरों को फायदा?
\r\n\r\nयह नया कॉरिडोर सिर्फ दिल्ली और देहरादून को ही नहीं जोड़ेगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तस्वीर भी बदल देगा।
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- \r\n रूट: अक्षरधाम (दिल्ली) -> बागपत -> शामली -> सहारनपुर -> देहरादून।\r\n \r\n
- \r\n फायदा: जो लोग पहले दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे या पुराने रास्तों का इस्तेमाल करते थे, अब वे सीधे इस नए रूट से जा सकेंगे। इससे गाजियाबाद और मेरठ रोड पर भी वाहनों का दबाव कम होगा।\r\n \r\n
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का ट्रायल रन शुरू होना भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। ढाई घंटे में दिल्ली से पहाड़ पहुंचने का सपना अब हकीकत बन चुका है। नए साल पर इसके औपचारिक उद्घाटन के साथ ही पर्यटन और व्यापार दोनों को नई रफ्तार मिलेगी। अब देखना यह है कि टोल दरें क्या तय की जाती हैं, जिसका इंतजार आम जनता को है।
Sabse pehle comment karne wale banein.