राजधानी दिल्ली के नाम को बदलने की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। चांदनी चौक से भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने दिल्ली का नाम बदलकर 'इंद्रप्रस्थ' रखने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में शनिवार (आज) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक औपचारिक पत्र लिखा है। भाजपा सांसद ने अपनी मांग को दिल्ली की प्राचीनतम सांस्कृतिक धरोहर और महाभारत काल से जुड़े इतिहास से जोड़ा है। यह कदम दिल्ली के इतिहास और आधुनिक पहचान को लेकर एक नई बहस शुरू करता है।READ ALSO:-आंध्र प्रदेश: एकादशी पर श्रीकाकुलम के वेंकटेश्वर मंदिर में भगदड़, 9 श्रद्धालुओं की मौत, मरने वालों में 8 महिलाएं और 1 बच्चा
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पांडवों की गौरवशाली राजधानी

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प्रवीण खंडेलवाल ने गृह मंत्री अमित शाह को लिखे अपने पत्र में तर्क दिया है कि दिल्ली का वर्तमान नाम 'दिल्ली' मध्यकालीन समय में विकसित हुआ, जबकि इसका मूल गौरवशाली इतिहास पांडवों के काल से जुड़ा है।
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    सांस्कृतिक धरोहर: खंडेलवाल ने कहा कि दिल्ली केवल एक महानगर नहीं है, बल्कि भारतीय सभ्यता की आत्मा, धर्म, नीति और लोककल्याण की परंपरा का केंद्र रही है।
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    ऐतिहासिक संबंध: उन्होंने जोर देकर कहा कि इतिहास साक्षी है कि महाभारत काल में पांडवों ने यहीं यमुना तट पर अपनी राजधानी 'इंद्रप्रस्थ' बसाई थी।
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    नाम का विकास: सांसद ने बताया कि मौर्य से गुप्त काल तक इंद्रप्रस्थ व्यापार, संस्कृति और प्रशासन का प्रमुख केंद्र रहा। 'दिल्ली' नाम 11वीं-12वीं सदी में तोमर राजाओं द्वारा इसे 'डिल्लिका' कहे जाने से विकसित हुआ।
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एयरपोर्ट और स्टेशन का नाम बदलने की मांग

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भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने अपनी मांग को केवल शहर के नाम तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि दिल्ली के प्रमुख परिवहन केंद्रों के नाम बदलने का भी सुझाव दिया है:
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    पुरानी दिल्ली स्टेशन: इसका नाम बदलकर 'इंद्रप्रस्थ जंक्शन' रखा जाए।
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    दिल्ली एयरपोर्ट: इसका नाम बदलकर 'इंद्रप्रस्थ इंटरनेशनल एयरपोर्ट' रखा जाए।
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इसके अतिरिक्त, खंडेलवाल ने मांग की है कि दिल्ली के प्रमुख स्थानों पर पांडवों की मूर्तियां स्थापित की जाएं। उन्होंने कहा कि इससे युवा पीढ़ी को पांडवों की संस्कृति, सभ्यता और गौरवशाली परंपराओं के बारे में पता चलेगा।
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विजय गोयल ने भी उठाया 'Dilli' बनाम 'Delhi' का मुद्दा

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नाम से जुड़ा यह मुद्दा हाल ही में एक और भाजपा नेता ने उठाया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने 28 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'Delhi' की अंग्रेजी स्पेलिंग पर आपत्ति जताई थी।
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    गोयल का बयान: उन्होंने कहा था कि पूरा देश इसे 'दिल्ली' बोलता है, लेकिन अंग्रेजी में इसे 'Delhi' लिखा जाता है, जो उच्चारण और पहचान का सम्मान नहीं करता।
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    मांग: गोयल ने मांग की थी कि 1 नवंबर को जब दिल्ली सरकार नया आधिकारिक लोगो जारी करे, तो उसमें 'Delhi' की जगह 'Dilli' लिखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, यह केवल नाम बदलने की बात नहीं है, बल्कि हमारी आत्मा, परंपरा और इतिहास से जुड़ा एक कदम है।
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दिल्ली के नाम की 4 रोचक कहानियां

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दिल्ली का नाम कैसे पड़ा, इसे लेकर कई ऐतिहासिक मान्यताएं हैं, जिनमें महाभारत काल की कहानी प्रमुख है:
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    खांडवप्रस्थ से इंद्रप्रस्थ: लोककथाओं के अनुसार, पांडवों को कौरवों से हस्तिनापुर का बंटवारा होने पर खांडवप्रस्थ (भयानक जंगल) दिया गया था, जिसे पांडवों ने राजधानी के तौर पर बसाया और उसका नाम इंद्रप्रस्थ रखा।
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    ढीली कील: एक अन्य लोककथा के अनुसार, तोमर राजाओं के समय एक विशाल कील ढीली रह गई थी, जिससे 'ढीली' और फिर 'दिल्ली' नाम प्रचलित हुआ।
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खंडेलवाल की मांग एक बार फिर केंद्र सरकार को राजधानी के नामों को भारतीय इतिहास और संस्कृति के अनुरूप बदलने की बहस में ला खड़ा करती है।
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