नई दिल्ली:
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भारत में वाहन चालकों के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC - Pollution Under Control Certificate) बनवाना हमेशा से एक सिरदर्द वाला काम रहा है। हर 6 महीने या 1 साल में पेट्रोल पंपों और पीयूसी केंद्रों के बाहर लंबी कतारों में लगना एक आम दृश्य है। लेकिन अब, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) देश के करोड़ों वाहन मालिकों को एक बहुत बड़ी राहत देने जा रहा है। सरकार 'PUCC 3.0' (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट 3.0) नामक एक नई और उन्नत योजना का प्रस्ताव तैयार कर रही है।READ ALSO:-मेरठ विद्युत विभाग में संविदा कर्मियों का बड़ा आर्थिक शोषण: बिना सुरक्षा उपकरणों के 'हाई-वोल्टेज' मौत के साए में काम करने को मजबूर सैकड़ों कर्मचारी
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इस नई योजना के तहत, सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जिनके पास आधुनिक और कम प्रदूषण फैलाने वाली BS-VI (BS6) गाड़ियां हैं। इन गाड़ियों के लिए पीयूसी की वैधता (Validity) को बढ़ाकर सीधे 3 साल करने का प्रस्ताव है। यह कदम न केवल साफ-सुथरी तकनीक (Clean Technology) अपनाने वाले वाहन मालिकों को पुरस्कृत करेगा, बल्कि पुरानी और अत्यधिक धुआं छोड़ने वाली गाड़ियों को सड़क से हटाने (Disincentivise) की दिशा में भी एक बड़ा प्रहार साबित होगा।
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क्या है 'PUCC 3.0' योजना और इसका मुख्य उद्देश्य?

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वर्तमान प्रणाली में पीयूसी सर्टिफिकेट की अवधि आमतौर पर नई गाड़ी के लिए 1 वर्ष और उसके बाद 6 महीने या 1 वर्ष (राज्य के नियमों के अनुसार) होती है। लेकिन 'PUCC 3.0' योजना इस पूरी व्यवस्था को वैज्ञानिक और वाहन के इंजन की उम्र (Age of Vehicle) के आधार पर फिर से परिभाषित कर रही है।
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इस योजना का मुख्य उद्देश्य दोतरफा है:

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    ईमानदार और पर्यावरण के प्रति जागरूक नागरिकों को राहत: जिन्होंने महंगी और कम प्रदूषण वाली BS6 गाड़ियां खरीदी हैं, उन्हें बार-बार टेस्टिंग के झंझट से मुक्ति दिलाना।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    प्रदूषण पर कड़ा नियंत्रण: पुराने वाहनों (BS1 से BS4) की मॉनिटरिंग को इतना सख्त कर देना कि लोग मजबूरन उन वाहनों को कबाड़ (Scrap) में देकर नई तकनीक की ओर शिफ्ट हो जाएं।
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  4. \r\n
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निजी वाहनों (Private Vehicles) के लिए नए प्रस्तावित PUC नियम

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निजी इस्तेमाल वाले वाहनों (सफेद नंबर प्लेट) के लिए MoRTH ने गाड़ी की उम्र (विंटेज) के हिसाब से पीयूसी की वैधता को तीन अलग-अलग चरणों में बांटने का प्रस्ताव रखा है:
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    0 से 6 साल पुरानी BS-VI गाड़ियां: यह इस योजना का सबसे आकर्षक पहलू है। यदि आपकी BS6 गाड़ी 6 साल से कम पुरानी है, तो आपको 3 साल की वैधता वाला पीयूसी मिलेगा। यानी, एक बार सर्टिफिकेट बनवाने के बाद आपको अगले 36 महीनों तक पीयूसी सेंटर का मुंह नहीं देखना पड़ेगा।
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  • \r\n
    6 से 10 साल पुरानी BS-VI गाड़ियां: जैसे-जैसे इंजन पुराना होता है, उसकी दक्षता (Efficiency) कम होने लगती है। इसलिए, 6 साल से अधिक और 10 साल तक की उम्र वाली गाड़ियों को वर्तमान व्यवस्था की तरह ही हर 1 साल (12 महीने) में अपना प्रदूषण प्रमाणपत्र रिन्यू कराना होगा।
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    10 साल से अधिक पुरानी BS-VI गाड़ियां: 10 साल पार कर चुकी गाड़ियों के इंजन से प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इन पुरानी गाड़ियों के लिए प्रदूषण जांच हर 6 महीने में अनिवार्य कर दी जाएगी।
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कमर्शियल और पुरानी गाड़ियों के लिए बेहद सख्त नियम

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व्यावसायिक वाहनों (टैक्सी, ट्रक, बस - पीली नंबर प्लेट) का इस्तेमाल निजी वाहनों की तुलना में कई गुना ज्यादा होता है। इसलिए उनके इंजन जल्दी घिसते हैं। साथ ही, पुराने उत्सर्जन मानकों (Emission Norms) वाली गाड़ियों के लिए सरकार अब कोई रियायत देने के मूड में नहीं है:
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वाहन की श्रेणी (Category)
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पीयूसी की नई प्रस्तावित वैधता (Validity)
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BS-VI कमर्शियल गाड़ियां (0-6 साल पुरानी)
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2 साल तक वैध
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BS-VI कमर्शियल गाड़ियां (6 साल से अधिक पुरानी)
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1 वर्ष या 6 महीने (सामान्य नियमों के अनुसार)
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BS-IV (BS4) गाड़ियां (निजी/कमर्शियल)
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हर 6 महीने में जांच अनिवार्य
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BS-I से BS-III गाड़ियां (अत्यधिक पुरानी)
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हर 3 महीने में जांच अनिवार्य
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नोट: BS-I से BS-III जैसी पुरानी गाड़ियों की रिन्यूअल अवधि 6 महीने से घटाकर केवल 3 महीने कर दी गई है। इसका सीधा संदेश है कि सरकार इन प्रदूषण फैलाने वाले "चलते-फिरते चिमनियों" को जल्द से जल्द सड़कों से बाहर करना चाहती है।
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यह विशेष छूट सिर्फ BS-VI (BS6) को ही क्यों?

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आपके मन में यह सवाल उठ सकता है कि आखिर BS6 इंजन में ऐसा क्या खास है कि सरकार उस पर इतनी मेहरबान है? दरअसल, भारत ने अप्रैल 2020 में BS-IV से सीधे BS-VI उत्सर्जन मानकों पर छलांग लगाई थी (BS-V को छोड़ दिया गया था)।
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यह तकनीकी छलांग पर्यावरण के लिहाज से क्रांतिकारी थी:
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    पार्टिकुलेट मैटर (PM) में कमी: आंकड़ों के अनुसार, BS-IV के मुकाबले BS-VI गाड़ियां 82% तक कम पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5 और PM 10) का उत्सर्जन करती हैं। यही सूक्ष्म कण फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।
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    नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) में कमी: डीजल BS6 गाड़ियों में खतरनाक नाइट्रोजन ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन पुराने इंजनों की तुलना में 25% से 68% तक कम होता है।
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चूंकि ये गाड़ियां तकनीकी रूप से एडवांस फिल्टर (जैसे DPF - Diesel Particulate Filter) से लैस होती हैं, इसलिए इनके जल्दी प्रदूषण फैलाने की संभावना बहुत कम होती है। इसी वैज्ञानिक आधार पर सरकार इनके मालिकों का वित्तीय और मानसिक बोझ कम कर रही है।
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डिजिटल और अभेद्य (Tamper-Proof) जांच प्रणाली

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केवल वैधता बढ़ाना ही काफी नहीं है; 'PUCC 3.0' के तहत पूरी जांच प्रणाली को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है। वर्तमान में कई जगहों पर बिना गाड़ी की जांच किए ही 'फर्जी पीयूसी' (Fake PUC) जारी करने के मामले सामने आते हैं।
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नई प्रणाली में पीयूसी सेंटरों के टेस्टिंग उपकरणों को सीधे सरकार के 'वाहन' (Vahan) डेटाबेस और गाड़ी के OBD (On-Board Diagnostics) पोर्ट से जोड़ा जाएगा। इससे टेस्टिंग मशीन सीधे गाड़ी के कंप्यूटर से डेटा पढ़ेगी और किसी भी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप (Manual Entry) या हेरफेर असंभव हो जाएगा। यदि गाड़ी प्रदूषण के मानकों पर फेल होती है, तो सिस्टम स्वतः ही रिन्यूअल को रिजेक्ट कर देगा।
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भारी जुर्माना और 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' का खौफ

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सरकार जहां एक ओर राहत दे रही है, वहीं नियम तोड़ने वालों पर शिकंजा भी कस रही है। पीयूसी को हल्के में लेना अब भारी पड़ सकता है:
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    10,000 रुपये का भारी चालान: मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा 190(2) के तहत, बिना वैध पीयूसी के गाड़ी चलाने पर ₹10,000 तक का भारी-भरकम जुर्माना और 3 महीने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस (DL) निलंबित करने का प्रावधान है।
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    इंश्योरेंस क्लेम (Insurance Claim) में परेशानी: बीमा नियामक (IRDAI) के स्पष्ट निर्देश हैं कि दुर्घटना के समय यदि वाहन का पीयूसी वैध नहीं है, तो बीमा कंपनी क्लेम देने से साफ इंकार कर सकती है।
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    नो पीयूसी, नो फ्यूल: कई राज्य सरकारें (जैसे दिल्ली) पेट्रोल पंपों पर 'No PUC, No Fuel' नीति को सख्ती से लागू करने पर विचार कर रही हैं। इसके तहत, बिना पीयूसी दिखाए आपकी गाड़ी में पेट्रोल या डीजल नहीं भरा जाएगा। कैमरे सीधे आपकी नंबर प्लेट स्कैन कर लेंगे।
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पर्यावरण और सुविधा का शानदार संतुलन

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परिवहन मंत्रालय की 'PUCC 3.0' योजना एक बेहद प्रगतिशील कदम है। यह उन लोगों को सीधा लाभ पहुंचा रही है जिन्होंने पर्यावरण को बचाने के लिए महंगी BS6 तकनीक वाली गाड़ियों में निवेश किया है। 3 साल की पीयूसी वैधता से करोड़ों लोगों का समय और पैसा बचेगा। वहीं, पुराने वाहनों के लिए 3 महीने और 6 महीने की सख्त डेडलाइन भारत को वायु प्रदूषण मुक्त बनाने और 'व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी' (Vehicle Scrappage Policy) को सफल बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। अब इंतजार है तो बस इस शानदार प्रस्ताव के आधिकारिक रूप से राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित होकर पूरे देश में लागू होने का।
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