\r\n\r\n\r\n\r\nराशन लेने के लिए अब एक ही दुकान पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है।
\r\n— B.L Verma (@blvermaup) June 20, 2026
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\r\nOne Nation One Ration Card (ONORC) के तहत पात्र लाभार्थी देश की किसी भी उचित मूल्य की दुकान से अपना राशन प्राप्त कर सकते हैं, जिससे खाद्यान्न तक पहुँच और भी आसान एवं सुविधाजनक बनती है।#OneNationOneRationCard pic.twitter.com/x0tfXxRbv4
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ATM की तर्ज पर काम करेगी नई राशन व्यवस्था: क्या है इसका मतलब?
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- \r\n पुरानी व्यवस्था: पहले एक परिवार का नाम जिस कोटेदार (राशन डीलर) के पास दर्ज होता था, उसे उसी के पास जाकर महीने का पूरा राशन एक ही बार में उठाना पड़ता था।\r\n \r\n
- \r\n नई व्यवस्था का 'एटीएम' मॉडल: अब ऐसा नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया है कि अब व्यवस्था को पूरी तरह से लचीला बना दिया गया है। अगर आपके घर के पास वाली दुकान पर भीड़ है, या वहां केवल गेहूं उपलब्ध है और चावल का स्टॉक खत्म हो गया है, तो आपको निराश लौटने की जरूरत नहीं है। आप वहां से अपना गेहूं ले सकते हैं और बचे हुए कोटे का चावल अपने ही शहर या देश की किसी अन्य सरकारी राशन दुकान से प्राप्त कर सकते हैं। यह आंशिक उठान (Partial Lifting) की सुविधा इस योजना को 'गेम-चेंजर' बनाती है।\r\n \r\n
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प्रवासी मजदूरों और दिहाड़ी कामगारों के लिए 'संजीवनी'
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- \r\n परिवार के लिए आधा, मजदूर के लिए आधा: मान लीजिए, एक परिवार बिहार या उत्तर प्रदेश के किसी गांव में रहता है और उस परिवार का मुखिया मजदूरी करने के लिए गुजरात में है। पुरानी व्यवस्था में राशन या तो गांव में मिलता था या पूरा शहर में। लेकिन अब, परिवार के सदस्य अपने हिस्से का राशन गांव की दुकान से ले सकते हैं, और वह मजदूर गुजरात में बैठे-बैठे उसी राशन कार्ड नंबर और अपने अंगूठे के निशान (Biometrics) के जरिए अपने हिस्से का राशन किसी भी गुजराती डीलर से प्राप्त कर सकता है।\r\n \r\n
- \r\n कोई नया कार्ड बनवाने की झंझट नहीं: प्रवासी मजदूरों को अब दूसरे राज्य में जाकर नया राशन कार्ड बनवाने या अपना पता बदलवाने की लंबी कागजी कार्यवाही से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई है।\r\n \r\n
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तकनीक का प्रहार: घटतौली और डीलर की मनमानी पर लगेगी 'फुल स्टॉप'
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- \r\n ई-पॉस (e-PoS) मशीन और इलेक्ट्रॉनिक कांटे का एकीकरण: अब देश की 99% से अधिक सरकारी राशन दुकानों पर इलेक्ट्रॉनिक वेइंग मशीन (इलेक्ट्रॉनिक कांटा) को सीधे ई-पॉस (इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल) मशीनों से लिंक कर दिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n तौल के बिना रसीद नहीं: इसका मतलब है कि जब तक मशीन पर पूरा 5 किलो (या निर्धारित मात्रा) अनाज नहीं रखा जाएगा, तब तक e-PoS मशीन से पर्ची बाहर निकलेगी ही नहीं और राशन वितरण सर्वर पर दर्ज नहीं होगा।\r\n \r\n
- \r\n बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (Biometric Authentication): राशन केवल उसी व्यक्ति को मिलेगा जिसका अंगूठा या आइरिस (आंख की पुतली) स्कैन मशीन पर मैच करेगा। इससे किसी और के हिस्से का राशन कोई दूसरा व्यक्ति नहीं मार सकेगा।\r\n \r\n
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''मेरा राशन 2.0' (Mera Ration 2.0) मोबाइल ऐप: आपके फोन में आपका सरकारी गल्ला
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इस ऐप के प्रमुख फायदे:
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- \r\n आस-पास की दुकान खोजें: आप ऐप में 'लोकेट डीलर' (Locate Dealer) फीचर का इस्तेमाल करके अपने आस-पास मौजूद सभी सरकारी राशन दुकानों की लोकेशन मैप पर देख सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n स्टॉक और कोटे की जानकारी: दुकान पर जाने से पहले ही आप चेक कर सकते हैं कि उस विशेष दुकान पर अभी गेहूं, चावल या बाजरा का स्टॉक उपलब्ध है या नहीं। साथ ही, आपको इस महीने कितना राशन मिलना है और आप कितना ले चुके हैं, इसका पूरा हिसाब (Transaction History) ऐप पर मौजूद रहता है।\r\n \r\n
- \r\n आधार लिंकिंग का स्टेटस: आपके परिवार के कितने सदस्यों का आधार कार्ड राशन कार्ड से लिंक है और किसका पेंडिंग है, इसकी जानकारी भी ऐप पर मिलती है।\r\n \r\n
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ध्यान दें: नए नियमों का लाभ उठाने के लिए 'आधार लिंकिंग' है अनिवार्य
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- \r\n यदि परिवार के किसी सदस्य का आधार राशन कार्ड से लिंक नहीं है (Aadhaar Seeding), तो उसका नाम कोटे से काटा जा सकता है।\r\n \r\n
- \r\n यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य की गई है कि योजना का लाभ केवल असली और पात्र (Eligible) लोगों को मिले, और फर्जी राशन कार्डों (Ghost Beneficiaries) पर हमेशा के लिए लगाम लगाई जा सके।\r\n \r\n
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एक मजबूत, पारदर्शी और गरीब-कल्याण को समर्पित भारत की ओर कदम
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Sabse pehle comment karne wale banein.