शारदीय नवरात्रि का आज तीसरा दिन है। इस दिन माँ दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि माँ चंद्रघंटा की आराधना करने से भक्तों को साहस, निर्भयता और जीवन में शांति का आशीर्वाद मिलता है। आज के दिन देशभर के मंदिरों और घरों में विशेष पूजन-अर्चन का आयोजन किया जा रहा है।
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माँ चंद्रघंटा का स्वरूप
\r\n\r\nमाँ चंद्रघंटा का रूप अत्यंत शांत और सौम्य है। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंंटी सुशोभित रहती है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। माँ के दस हाथ हैं जिनमें शस्त्र और कमल सुशोभित हैं। उनका वाहन सिंह है जो शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है।
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पूजन का शुभ मुहूर्त
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- पंचांग के अनुसार, तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा के लिए प्रातःकाल का समय सबसे शुभ माना गया है। \r\n
- पुण्य काल: सुबह 6:15 से 8:30 बजे तक \r\n
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:45 बजे तक \r\n
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि जो भक्त इन मुहूर्तों में श्रद्धा से पूजा करते हैं, उन्हें विशेष फल की प्राप्ति होती है।
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पूजा विधि
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- पूजा के दौरान सबसे पहले गंगाजल से स्थान को पवित्र करें और माँ चंद्रघंटा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। \r\n
- माँ को चंदन, अक्षत, रोली और पुष्प अर्पित करें। \r\n
- उन्हें दूध और उससे बने मिष्ठान का भोग लगाएँ। \r\n
- सफेद फूल और बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है। \r\n
- अंत में धूप-दीप जलाकर आरती करें और मंत्रों का जाप करें। \r\n
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पूजन मंत्र
\r\n\r\nबीज मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ चंद्रघंटायै नमः॥
\r\n\r\nध्यान मंत्र: पिण्डजप्रवरारूढ़ा चंद्रकोपास्त्रकेर्युता। प्रचण्डा चंद्रघंटा च यातुधानप्रमर्दिनी॥
\r\n\r\nसामान्य मंत्र: ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः॥
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धार्मिक महत्व
\r\n\r\nपंडितों का मानना है कि माँ चंद्रघंटा की उपासना से भक्तों का जीवन भयमुक्त होता है। विवाह योग्य कन्याओं के लिए यह दिन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। पूजा से घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है।
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नवरात्रि का तीसरा दिन भक्तों को न सिर्फ आध्यात्मिक बल देता है बल्कि जीवन में शांति और निर्भयता का आशीर्वाद भी देता है। माँ चंद्रघंटा की आराधना से भक्त हर संकट से उबरकर सफलता की राह पर आगे बढ़ते हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.