नई दिल्ली (पॉलिटिकल डेस्क): देश की राजधानी दिल्ली में मंगलवार (21 जुलाई 2026) का दिन एक बड़े और अप्रत्याशित राजनीतिक ड्रामे का गवाह बना। मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'NEET' (नीट) के विवाद को लेकर सड़क से संसद तक जारी संग्राम अब सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दरवाजे तक पहुंच गया है।READ ALSO:-अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना भूल जाइए! घर बैठे सिर्फ 5 मिनट में ऐसे बनवाएं अपना नया 'वोटर कार्ड' (Voter ID Card), जानें पूरा प्रोसेस
\r\n\r\n\r\n\r\n
दोपहर 3:30 बजे के करीब, कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi), कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra), कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) सहित कई बड़े विपक्षी नेता अचानक प्रधानमंत्री आवास (लोक कल्याण मार्ग) के पास धरने पर बैठ गए।
\r\n\r\n 
लगभग तीन घंटे तक चले इस धरने के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच सुलह की कोशिशें हुईं, जो अंततः विफल रहीं। इसके बाद शाम साढ़े 6 बजे दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने भारी बल प्रयोग करते हुए सभी शीर्ष नेताओं को हिरासत (Detained) में ले लिया। आइए, इस पूरे घटनाक्रम, कांग्रेस की 'सीक्रेट प्लानिंग' और सरकार के रुख को विस्तार से समझते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\nमोदी जी, हर ज़ोर आज़मा लो, सारी ताकत लगा लो - छात्रों के इंसाफ की ये लड़ाई अब रोके न रुकेगी। pic.twitter.com/suXh8LkWzh
\r\n— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 21, 2026
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
कैसे रची गई PM आवास घेरने की 'सीक्रेट प्लानिंग'?
\r\n\r\nइस पूरे धरने की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यह इतना गुप्त (Secret) था कि दिल्ली पुलिस, सुरक्षा एजेंसियों (IB) और यहां तक कि नेशनल मीडिया को इसकी भनक तक नहीं लगी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
बर्थडे की आड़ में राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का जन्मदिन था। सुबह पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे दिग्गजों ने उन्हें सोशल मीडिया पर बधाई दी।\r\n \r\n
- \r\n लेकिन, खड़गे ने तुरंत ऐलान कर दिया कि वह 'छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में' अपना जन्मदिन नहीं मनाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n दोपहर में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेता खड़गे के सरकारी आवास (जो कि लोक कल्याण मार्ग से महज 1 किलोमीटर दूर है) पर पहुंचने लगे। सुरक्षा एजेंसियों को लगा कि यह केवल एक शिष्टाचार मुलाकात या जन्मदिन की बधाई देने के लिए जुटान है।\r\n \r\n

सरप्राइज मार्च की शुरुआत:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n खड़गे के घर पर हुई एक संक्षिप्त 'सीक्रेट मीटिंग' के बाद, सभी नेता गाड़ियों में बैठने के बजाय अचानक पैदल ही सड़क पर निकल पड़े और प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करने लगे।\r\n \r\n
- \r\n दूरी बहुत कम होने के कारण जब तक दिल्ली पुलिस एक्टिव होती, बैरिकेड्स लगाती और अतिरिक्त फोर्स बुलाती, तब तक राहुल गांधी और अन्य नेता हाई-सिक्योरिटी जोन में प्रवेश कर चुके थे और ठीक पीएम आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। मीडिया को इसकी जानकारी तब दी गई जब नेता पीएम आवास से सिर्फ 100 मीटर की दूरी पर थे।\r\n \r\n
\r\n\r\n
सरकार और राहुल के बीच 20 मिनट चली बातचीत, फिर क्यों बिगड़ी बात?
\r\n\r\nधरना शुरू होने के बाद केंद्र सरकार हरकत में आई। पीएम आवास के पास से नेताओं को शांतिपूर्वक हटाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और गृह सचिव गोविंद मोहन मौके पर पहुंचे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n जितेंद्र सिंह ने धरने पर बैठे राहुल गांधी से करीब 20 मिनट तक लंबी बातचीत की।\r\n \r\n
- \r\n इसके बाद जितेंद्र सिंह वापस गए और गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) को पूरी स्थिति से अवगत कराया।\r\n \r\n
- \r\n शाह से निर्देश मिलने के बाद उन्होंने राहुल से दोबारा बात की, लेकिन गतिरोध नहीं टूटा।\r\n \r\n
\r\n\r\n
जितेंद्र सिंह का दावा - 'राहुल अपनी बात से मुकरे': बातचीत विफल होने के बाद केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट कर बताया कि, "राहुल गांधी की प्रारंभिक मांग थी कि NEET के मुद्दे पर संसद में चर्चा हो। सरकार ने उनकी यह मांग मान ली थी। लेकिन जब मांग मानी गई, तो राहुल अपनी बात से मुकर गए। उन्होंने कहा कि अब हमारी दो मांगे हैं— पहली, NEET पर संसद में विशेष चर्चा, और दूसरी, शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) का तत्काल इस्तीफा।" सरकार ने इस्तीफे की मांग को सिरे से खारिज कर दिया।
\r\n\r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
सोशल मीडिया पर राहुल की हुंकार: "छात्रों पर हमला, हर भारतीय पर हमला"
\r\n\r\nधरनास्थल से ही राहुल गांधी ने लगातार सोशल मीडिया के जरिए युवाओं और देशवासियों को साधने की कोशिश की। उन्होंने अपने 'X' अकाउंट पर कड़े शब्दों में लिखा:
\r\n\r\n\r\n\r\n
\r\n\r\n\r\n"छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है। प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वो बिना जवाब दिए, बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे। नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं। मैं हर उस देशभक्त भारतीय से अपील करता हूं, जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए, प्रधानमंत्री आवास के सामने हमारे धरने में शामिल हों। भारत के छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।"\r\n
\r\n\r\n
धक्का-मुक्की, लाठीचार्ज और नेताओं की गिरफ्तारी
\r\n\r\nजब शाम 6 बजे तक वार्ता बेनतीजा रही और धरनास्थल पर "पीएम इस्तीफा दो" और "गृहमंत्री इस्तीफा दो" के नारे तेज होने लगे, तो दिल्ली पुलिस ने एक्शन लेने का फैसला किया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n घेरा और संघर्ष: राहुल और प्रियंका को हिरासत में लिए जाने से बचाने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं और विधायकों ने नेताओं के चारों ओर एक मजबूत मानव शृंखला (घेरा) बना लिया।\r\n \r\n
- \r\n लाठीचार्ज: जब करीब 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी और RAF के जवान नेताओं तक पहुंचने लगे, तो भारी धक्का-मुक्की शुरू हो गई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा।\r\n \r\n
- \r\n हिरासत में दिग्गज: करीब आधे घंटे तक चले इस संघर्ष के बाद, पुलिस राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी समेत कई कार्यकर्ताओं को जबरन उठाकर पुलिस बस में बैठा ले गई। सभी को अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
कानून के नजरिए से समझिए: PM आवास के बाहर प्रदर्शन पर क्यों है रोक?
\r\n\r\nकई लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) होने के नाते राहुल गांधी को कहीं भी प्रदर्शन करने की छूट नहीं है? आइए इसे 3 सीधे सवालों के जवाब से समझते हैं:
\r\n\r\n\r\n\r\n
सवाल 1: लोक कल्याण मार्ग (PM Awas) हाई-सिक्योरिटी जोन क्यों है? जवाब: यह भारत के प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास है। सुरक्षा प्रोटोकॉल (Security Protocols) के कारण इसके आसपास के लगभग 1 किलोमीटर क्षेत्र को पूरी तरह से 'नो-प्रोटेस्ट जोन' (No-Protest Zone) घोषित किया गया है। यहां का सबसे भीतरी सुरक्षा घेरा SPG संभालती है, जबकि बाहर दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स (CRPF/RAF) तैनात रहती है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सवाल 2: क्या इस एरिया में हर समय धारा 163 लागू रहती है? जवाब: हाँ। नई दिल्ली के इस पूरे वीआईपी (VIP) इलाके में हर समय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पहले की धारा 144) लागू रहती है, जो 4 या अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगाती है। इसका उल्लंघन करने पर पुलिस सीधे हिरासत में ले सकती है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सवाल 3: क्या नेता प्रतिपक्ष (LoP) को विशेष छूट मिलती है? जवाब: बिल्कुल नहीं। नेता प्रतिपक्ष को जो भी विशेषाधिकार (Privileges) मिलते हैं, वे केवल संसद भवन (Parliament) के भीतर लागू होते हैं। संसद के बाहर सड़क पर उन पर भी वही सुरक्षा नियम, धाराएं और कानून लागू होते हैं, जो देश के किसी भी अन्य आम नागरिक पर होते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
देशभर में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन: जयपुर में गहलोत ने दी गिरफ्तारी
\r\n\r\nदिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लिए जाने की खबर जैसे ही आग की तरह फैली, देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए।
\r\n\r\n\r\n\r\n
राजस्थान की राजधानी जयपुर में अंबेडकर सर्किल पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने जमकर धरना प्रदर्शन किया। गहलोत और अन्य बड़े नेताओं ने पुलिस के सामने अपनी सामूहिक गिरफ्तारी भी दी। देश के अन्य राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश) से भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के उग्र प्रदर्शन की खबरें आ रही हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आगे क्या? (Future Outlook) NEET परीक्षा की धांधली को लेकर कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे को आसानी से छोड़ने वाली नहीं है। आज का यह 'सीक्रेट धरना' और नेताओं की गिरफ्तारी आने वाले दिनों में संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। अब देखना यह है कि राहुल गांधी की रिहाई के बाद कांग्रेस का अगला राजनीतिक कदम क्या होता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.