नए साल 2026 की शुरुआत खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए बेहद रोमांचक होने जा रही है. अंतरिक्ष के रहस्यों और तारों की दुनिया में खो जाने का शौक रखने वाले लोगों के लिए 23 जनवरी की शाम एक विशेष सौगात लेकर आ रही है. 23 जनवरी की रात आकाश में आपको एक शानदार खगोलीय नजारा (Celestial Event) दिखाई देगा, जब हमारे सौर मंडल के दो प्रमुख ग्रह और पृथ्वी का उपग्रह चंद्रमा एक साथ एक ही फ्रेम में नजर आएंगे. आकाश में मीन (Pisces) तारामंडल में चंद्रमा और शनि की युति (Moon and Saturn Conjunction) होने जा रही है. इस दौरान ये दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब दिखाई देंगे, जिनके बीच की दूरी लगभग 4°21′ (डिग्री-मिनट) होगी.Read also:-भारत की अब तक की सबसे 'हाई-टेक' जनगणना का शंखनाद: 2027 में गिना जाएगा हर सिर और हर घर; पहली बार जातियों का भी होगा डेटाबेस, 33 सवालों में कैद होगी देश की तस्वीर
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यह घटना केवल चंद्रमा और शनि तक सीमित नहीं है, बल्कि उसी समय सौर मंडल का आठवां ग्रह नेपच्यून (Neptune) भी इनके पास मौजूद होगा. जिससे ये तीनों खगोलीय पिंड लगभग 3°49′ के दायरे में एक साथ दिखाई देंगे. यह जानकारी वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह ने साझा की है. आइए विस्तार से जानते हैं कि इस घटना को कब, कहां और कैसे देखा जा सकता है और इसके पीछे का विज्ञान क्या है.
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क्या है यह खगोलीय घटना?

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खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 23 जनवरी को होने वाली यह खगोलीय घटना तकनीकी रूप से चंद्रमा, शनि और नेपच्यून का 'संयोजन' (Conjunction) है. आम भाषा में इसे ग्रहों का मिलन कहा जाता है. इस दौरान पृथ्वी से देखने पर ऐसा प्रतीत होगा कि ये तीनों पिंड आकाश में एक-दूसरे से सट गए हैं, यानी बेहद करीब नजर आएंगे. हालांकि, यह सिर्फ़ एक दृष्टिभ्रम (Optical Illusion) है, क्योंकि वास्तव में इनके बीच करोड़ों किलोमीटर की दूरी होगी.
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घटना का आकाशीय विवरण काफी दिलचस्प होगा. जिस समय यह नजारा घटित होगा, उस समय चंद्रमा अपनी कलाओं (Phases) के चक्र में 5 दिन का बढ़ता हुआ अर्धचंद्र (Waxing Crescent) होगा. इस दौरान चंद्रमा का लगभग 26% हिस्सा सूर्य की रोशनी से प्रकाशित दिखाई देगा. चंद्रमा की यह पतली सुनहरी लकीर आकाश में बेहद खूबसूरत नजर आएगी. इसी दौरान शनि ग्रह (Saturn) बेहद चमकीला होगा, जिसे साधारण आंखों से आसानी से देखा जा सकेगा. वहीं, नेपच्यून अपनी कम चमक के कारण नग्न आंखों से ओझल रहेगा.
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किस दिशा में और कब दिखेगा यह अद्भुत नजारा?

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इस खगोलीय घटना का गवाह बनने के लिए आपको सही दिशा और सही समय की जानकारी होना बहुत जरूरी है. खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार:
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    दिशा (Direction): यह नजारा आकाश में पश्चिम (West) से थोड़ा दक्षिण-पश्चिम (South-West) दिशा में दिखाई देगा. आपको क्षितिज (Horizon) से लगभग 30–35 डिग्री ऊपर देखना होगा.
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    समय (Timing): इसको देखने का सबसे अच्छा समय शाम 6:00 बजे से रात 8:30 बजे तक रहेगा. जैसे-जैसे रात गहरी होगी, ये ग्रह क्षितिज की ओर नीचे जाते जाएंगे और अंततः डूब जाएंगे. इसलिए सूर्यास्त के तुरंत बाद ही आकाश निहारना सबसे बेहतर होगा.
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    दृश्य (View): आकाश में सबसे पहले आपको चमकीला शनि ग्रह दिखाई देगा. इसी के ठीक पास में आपको पतला सा चंद्रमा (Crescent Moon) चमकता हुआ नजर आएगा. चंद्रमा के थोड़ा नीचे या पास में ही नेपच्यून भी मौजूद होगा, लेकिन उसे देखने के लिए आपको दूरबीन की मदद लेनी होगी.
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इस दौरान यह अपने चरम पर होगा. इसके बाद इनके बीच की कोणीय दूरी (Angular Separation) धीरे-धीरे कम होने लगेगी और वे अस्त होने की दिशा में बढ़ेंगे.
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नेपच्यून: जिसे देखने के लिए चाहिए होगी 'तीसरी आंख'

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जहां चंद्रमा और शनि की युति को आप अपनी छत या मैदान से आसानी से देख सकेंगे, वहीं इस तिकड़ी के तीसरे सदस्य, नेपच्यून को देखना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है. खगोलविद ने बताया कि नेपच्यून ग्रह हमारे सौर मण्डल का सूर्य से दूरी के क्रम में आठवां ग्रह है, जो सबसे वाह्य (Outer) ग्रह है. पृथ्वी से इसकी अत्यधिक दूरी के कारण इसका मैग्नीट्यूड (चमक का पैमाना) लगभग +7.8 होता है.
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खगोल विज्ञान में, जिस वस्तु का मैग्नीट्यूड जितना अधिक (+) होता है, वह उतनी ही धुंधली होती है. मानव आंखें आमतौर पर +6 मैग्नीट्यूड तक की वस्तुओं को देख सकती हैं (वह भी एकदम अंधेरे आकाश में). +7.8 मैग्नीट्यूड होने के कारण नेपच्यून साधारण आंखों से दिखाई नहीं देता है. यहां तक कि किसी छोटी या साधारण दूरबीन से भी यह बहुत धुंधला, एक तारे जैसा दिखाई देता है. इसलिए इसे स्पष्ट रूप से देखने के लिए किसी अच्छी गुणवत्ता वाली दूरबीन या टेलीस्कोप (Telescope) की आवश्यकता पड़ती है. हालांकि, यह एक सुंदर खगोलीय संयोग है, जो स्टारगेजिंग (Stargazing) के शौकीनों और एस्ट्रोफोटोग्राफी (Astrophotography) के लिए बेहतरीन अवसर भी है.
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'त्रि-संयोजन' का दुर्लभ संयोग
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हालांकि ये तीनों ग्रह (चंद्रमा, शनि, नेपच्यून) एक सटीक सीधी रेखा में नहीं होंगे, बल्कि शनि और नेपच्यून के करीब चंद्रमा का गुजरना इसे एक प्रकार का 'त्रि-संयोजन' (Triple Conjunction) जैसा दृश्य बना सकता है. खगोल प्रेमियों के लिए यह एक खास मौका होगा क्योंकि एक ही 'फील्ड ऑफ व्यू' (Field of View) में तीन अलग-अलग प्रकार के खगोलीय पिंडों को देखना दुर्लभ होता है.
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    शनि: गैस का विशाल गोला जिसके चारों ओर छल्ले हैं.
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    चंद्रमा: हमारा सबसे करीबी ठोस उपग्रह.
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    नेपच्यून: बर्फ का विशाल गोला (Ice Giant).
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यह नजारा सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी आकाश में देखा जा सकेगा. इस दौरान चंद्रमा और शनि ग्रह के बीच कोणीय दूरी (एंगुलर सेपरेशन) कम होगा. इस कारण से दोनों खगोलीय पिंड विनोकुलर (Binocular) के फील्ड ऑफ व्यू (FOV) में समा जाएंगे. इसका मतलब है कि अगर आप दूरबीन से देख रहे हैं, तो आपको अपनी दूरबीन को हिलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी; दोनों पिंड एक साथ दिखाई देंगे. इस दौरान शनि ग्रह की दृश्य चमक लगभग +1.1 होगी, जो इसे मध्यम चमक वाले तारे जैसा दिखाएगी. लेकिन याद रहे, यह जोड़ी क्षितिज के नीचे डूबने से पहले कुछ ही समय के लिए दिखाई देगी, इसलिए समय का पाबंद होना जरूरी है.
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क्या होता है 'संयुग्मन' (Conjunction)?

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इस घटना की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि को समझना भी आवश्यक है. खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस प्रकार के संयोजन को 'युति' या 'कंजंक्शन' के रूप में मान्यता दी जाती है. खगोल विज्ञान की तकनीकी भाषा में इसे ऐपल्स (Appulse) यानी 'निकट आगमन' भी कहा जाता है.
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जब दो या दो से अधिक खगोलीय पिंड (जैसे ग्रह और चंद्रमा) पृथ्वी से देखने पर आकाश में एक ही देशांतर (Longitude) या राईट असेंशन (Right Ascension) पर आ जाते हैं, तो इसे 'संयुग्मन' (Conjunction) कहा जाता है. यह खगोलीय पिंडों के एक ही दिशा में संरेखित होने से बनता है. सरल शब्दों में, यह एक "दृष्टिभ्रम" (Line of sight effect) है. इसे ऐसे समझें—जैसे आप एक सीधी सड़क पर खड़े हैं. आपसे 100 मीटर दूर एक पेड़ है और उस पेड़ के ठीक पीछे 2 किलोमीटर दूर एक पहाड़ है. आपको देखने में लगेगा कि पेड़ और पहाड़ एक साथ हैं, जबकि उनके बीच बहुत दूरी है. ठीक यही स्थिति 23 जनवरी को अंतरिक्ष में होगी:
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    चंद्रमा: पृथ्वी से लगभग 3.84 लाख किलोमीटर दूर.
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    शनि: पृथ्वी से लगभग 1.5 अरब किलोमीटर दूर.
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    नेपच्यून: पृथ्वी से लगभग 4.5 अरब किलोमीटर दूर.
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ये तीनों अपनी-अपनी कक्षाओं में घूमते हुए पृथ्वी के सापेक्ष एक सीध में आ जाएंगे. भले ही वे वास्तव में लाखों-करोड़ों किलोमीटर दूर हों, लेकिन पृथ्वी से देखने पर बेहद करीब दिखाई देते हैं. यह खास क्षण चंद्रमा और शनि की युति का अद्भुत मिलन, अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए साल 2026 की शुरुआत में ही बेहद रोमांचक होगा.
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देखने के लिए जरूरी सुझाव और सावधानियां

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खगोलविद अमर पाल सिंह ने इस अद्भुत नजारे का पूरा आनंद लेने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. अगर आप इस घटना को मिस नहीं करना चाहते, तो इन बातों का ध्यान रखें:
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    स्थान का चुनाव: खगोलविद ने सुझाव दिया है कि इस घटना को देखने के लिए किसी ऊंचे स्थान (जैसे घर की छत) या ऐसे खुले मैदान का चुनाव करें जहां पश्चिम दिशा का क्षितिज साफ हो. ऊँची इमारतें या पेड़ आपके दृश्य को बाधित कर सकते हैं.
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  3. \r\n
    प्रकाश प्रदूषण से बचें: शहर की तेज रोशनी तारों और ग्रहों की चमक को फीका कर देती है. कोशिश करें कि ऐसी जगह से देखें जहां प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution) बहुत ही कम हो. अंधेरे आकाश में शनि और नेपच्यून को पहचानना आसान होगा.
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  5. \r\n
    मौसम की भूमिका: उन्होंने सलाह दी है कि इस दृश्य का आनंद लेने के लिए मौसम भी अनुकूल होना चाहिए. आकाश साफ होना चाहिए और बादल नहीं होने चाहिए. कोहरा या धुंध इस नजारे को खराब कर सकते हैं.
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    उपकरण:
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      नग्न आंखें: चंद्रमा को साधारण आंखों से साफ देख सकते हैं. इस दौरान चंद्रमा लगभग 26% रोशनी के साथ प्रकाशित होगा, जो बहुत ही मनमोहक लगेगा. साथ ही शनि ग्रह को भी बिना किसी उपकरण के देखा जा सकता है. यह एक स्थिर, बिना टिमटिमाते हुए पीले-सुनहरे तारे जैसा दिखेगा.
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      विनोकुलर (Binoculars): अगर आपके पास 10×50 की दूरबीन है, तो आप चंद्रमा के क्रेटर्स (गड्ढे) और शनि के रंग को थोड़ा बेहतर देख पाएंगे. नेपच्यून को देखने के लिए यह कम से कम जरूरत है.
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      टेलीस्कोप: शनि ग्रह के प्रसिद्ध छल्लों (Rings) को बिना किसी खगोलीय दूरबीन के नहीं देखा जा सकता है. यदि आप शनि के छल्ले और चंद्रमा के क्रेटर्स को विस्तार से देखना चाहते हैं, तो एक छोटा टेलीस्कोप अद्भुत अनुभव देगा. टेलीस्कोप से देखने पर शनि के छल्ले और चंद्रमा के क्रेटर्स एक साथ देखना किसी जादुई अनुभव से कम नहीं होगा.
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मीन राशि (Pisces) का महत्व

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यह पूरी घटना मीन (Pisces) तारामंडल की पृष्ठभूमि में घटित हो रही है. मीन राशि आकाश का एक बड़ा लेकिन धुंधला तारामंडल है. ज्योतिष और खगोल विज्ञान दोनों में इसका महत्व है. वर्तमान में शनि और नेपच्यून दोनों ही मीन राशि में भ्रमण कर रहे हैं. 23 जनवरी को चंद्रमा भी अपनी यात्रा करते हुए मीन राशि में प्रवेश करेगा, जिससे यह "त्रि-ग्रहीय मिलन" संभव हो पाएगा. मीन तारामंडल की पहचान करना थोड़ा कठिन होता है क्योंकि इसमें बहुत चमकीले तारे नहीं हैं, लेकिन 23 जनवरी को चंद्रमा स्वयं मार्कर (संकेतक) का काम करेगा. जहां चंद्रमा होगा, वही मीन राशि का क्षेत्र है.
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फोटोग्राफी के लिए सुनहरा मौका

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एस्ट्रोफोटोग्राफर्स (Astrophotographers) के लिए यह रात किसी त्योहार से कम नहीं है.
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    स्मार्टफोन: आजकल के आधुनिक स्मार्टफोन में 'नाइट मोड' का उपयोग करके आप चंद्रमा और शनि की जोड़ी की तस्वीर ले सकते हैं. अपने फोन को ट्राइपॉड पर रखें ताकि फोटो धुंधली न आए.
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    DSLR कैमरा: यदि आपके पास DSLR है, तो 200mm या उससे अधिक का जूम लेंस उपयोग करें. शटर स्पीड को थोड़ा कम रखें (1/10 से 1 सेकंड, चंद्रमा की चमक के अनुसार) और ISO को 400-800 के बीच रखें.
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    कंपोज़िशन: आप क्षितिज पर मौजूद किसी पेड़ या इमारत के सिलहूट (Silhouette) के साथ इस जोड़ी को फ्रेम कर सकते हैं, जो तस्वीर को और भी कलात्मक बना देगा.
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अर्थशाइन (Earthshine) का जादू

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एक और खास बात जो इस घटना को सुंदर बनाएगी, वह है 'अर्थशाइन' या 'दा विंची ग्लो'. जब चंद्रमा अर्धचंद्र (Crescent) अवस्था में होता है, तो उसका बाकी का अंधकारमय हिस्सा पूरी तरह काला नहीं होता, बल्कि हल्का सा चमकता है. यह चमक पृथ्वी से परावर्तित होकर चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी के कारण होती है. 23 जनवरी को 26% प्रकाशित चंद्रमा के साथ, आप उसके बाकी हिस्से पर इस "राख जैसी चमक" (Ashen glow) को देख पाएंगे. यह दृश्य दूरबीन से देखने पर बेहद रूहानी लगता है.
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23 जनवरी की शाम, विज्ञान, प्रकृति और ब्रह्मांड की सुंदरता का एक अनूठा संगम होगी. वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह द्वारा दी गई यह जानकारी हमें याद दिलाती है कि हमारा ब्रह्मांड कितना विशाल और गतिशील है. चंद्रमा और शनि की युति न केवल एक खगोलीय घटना है, बल्कि यह हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम इस अनंत ब्रह्मांड में कितने छोटे हैं.
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तो, 23 जनवरी को अपनी शाम की चाय के साथ छत पर जाना न भूलें. पश्चिम दिशा की ओर देखें और इस ब्रह्मांडीय नृत्य (Cosmic Dance) का गवाह बनें. चाहे आपके पास महंगी दूरबीन हो या सिर्फ आपकी आंखें, यह नजारा हर किसी के लिए खास है. याद रखें, समय शाम 6:00 बजे से 8:30 बजे तक ही अनुकूल रहेगा.
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23 जनवरी 2026 की शाम मीन तारामंडल में चंद्रमा, शनि और नेपच्यून का दुर्लभ संयोग देखने को मिलेगा. चंद्रमा और शनि नग्न आंखों से पश्चिम-दक्षिण पश्चिम दिशा में देखे जा सकेंगे, जबकि नेपच्यून के लिए दूरबीन की आवश्यकता होगी. यह घटना शाम 6:00 बजे से 8:30 बजे तक दृश्यमान रहेगी. खगोल प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए यह साल का पहला बड़ा अवसर है.
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