सीबीएसई (CBSE) 12वीं के नतीजों के बाद सोशल मीडिया पर फूटे छात्रों के गुस्से ने आखिरकार शिक्षा मंत्रालय को बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सिस्टम पर उठे गंभीर सवालों के बीच शिक्षा सचिव ने एक बड़ी तकनीकी खामी को स्वीकार किया है। छात्रों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर यह है कि अब अपनी आंसरशीट (Answer Sheet) देखने या री-चेकिंग कराने के लिए उन्हें भारी-भरकम फीस नहीं चुकानी पड़ेगी। जानिए फीस में कितनी कटौती हुई है और क्यों 13 हजार छात्रों की कॉपियां दोबारा 'मैन्युअल' तरीके से जांची जा रही हैं।READ ALSO:-डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्गों को लूटने वालों का 'गेम ओवर': बैंकों ने लगाया 'Dual OTP' का डबल ताला, बिना आपकी मर्जी के माता-पिता के खाते से नहीं निकलेगा एक रुपया
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 12वीं कक्षा के परिणाम हर साल लाखों छात्रों के करियर की दिशा तय करते हैं। लेकिन इस साल जब रिजल्ट जारी हुआ, तो जश्न के बजाय कई छात्रों के चेहरों पर निराशा और गुस्सा देखने को मिला। कई मेधावी छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें उम्मीद से काफी कम अंक (Marks) मिले हैं। छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी मार्कशीट शेयर करते हुए सीबीएसई की डिजिटल कॉपी चेकिंग प्रणाली (On-Screen Marking) पर गंभीर सवाल खड़े किए।
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विवाद को बढ़ता देख शिक्षा मंत्रालय हरकत में आया और स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता सचिव संजय कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छात्रों को एक बड़ी और ऐतिहासिक राहत देने का ऐलान किया है। आइए इस पूरे विवाद, तकनीकी खामी और नए बदलावों को विस्तार से समझते हैं।
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क्या है पूरा विवाद? ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम पर क्यों उठे सवाल?

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इस पूरे विवाद की जड़ में सीबीएसई का वह डिजिटल सिस्टम है, जिसे कॉपियां जांचने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम कहा जाता है।
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    कैसे काम करता है OSM? इस सिस्टम के तहत, छात्रों द्वारा लिखी गई फिजिकल उत्तर पुस्तिकाओं (Physical Answer Sheets) को एक हाई-रेजोल्यूशन स्कैनर से स्कैन करके डिजिटल फॉर्मेट (PDF) में बदला जाता है। इसके बाद परीक्षक (Examiners) कंप्यूटर स्क्रीन पर ही इन कॉपियों को डिजिटल रूप से चेक करते हैं और वहीं मार्क्स देते हैं।
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    कहां हुई गड़बड़ी? छात्रों का आरोप था कि इस स्कैनिंग और डिजिटल चेकिंग के दौरान उनके कई सही जवाबों को या तो पढ़ा नहीं गया या उन पर मार्क्स नहीं दिए गए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर #CBSEResult2024 और #CBSECopyChecking जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे थे, जहां छात्रों ने अपनी व्यथा जाहिर की।
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शिक्षा सचिव का बड़ा कबूलनामा: 'हल्की स्याही' ने बिगाड़ा खेल

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छात्रों के इस भारी विरोध के बीच शिक्षा सचिव संजय कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने पूरी पारदर्शिता दिखाते हुए स्वीकार किया कि इवैल्यूएशन प्रोसेस (Evaluation Process) के दौरान कुछ तकनीकी त्रुटियां (Errors) सामने आई हैं।
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उन्होंने बताया कि इस साल बोर्ड ने लगभग 98 लाख आंसरशीट्स को स्कैन किया था। इनमें से कुछ हजार कॉपियों में एक विशेष समस्या पाई गई। तकनीकी खामी की असली वजह: कुछ छात्रों ने परीक्षा के दौरान हल्की स्याही (Light Ink) वाले पेन का इस्तेमाल किया था। जब इन कॉपियों को स्कैनिंग मशीन में डाला गया, तो हल्की स्याही के कारण शब्द ठीक से स्कैन नहीं हो पाए और कंप्यूटर स्क्रीन पर धुंधले दिखाई दिए। इस धुंधलेपन की वजह से परीक्षकों (Examiners) को कॉपियां पढ़ने में दिक्कत हुई और अनजाने में छात्रों को कम अंक मिल गए। यह छात्रों की गलती नहीं थी, बल्कि एक तकनीकी सीमा (Technical Limitation) का परिणाम था।
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13,000 कॉपियों की होगी 'मैन्युअल' जांच: छात्रों को मिलेगा न्याय

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इस बड़ी तकनीकी खामी को पकड़ने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने एक बेहद सराहनीय कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, स्कैनिंग के दौरान जिन कॉपियों में गड़बड़ी मिली है, उनकी पहचान कर ली गई है।
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    दोबारा चेक होंगी कॉपियां: बोर्ड ने लगभग 13,000 आंसरशीट्स को अलग किया है, जो इस 'लाइट इंक' या स्कैनिंग एरर का शिकार हुई हैं।
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    डिजिटल नहीं, अब होगी इंसानी जांच: इन 13 हजार कॉपियों को अब कंप्यूटर स्क्रीन पर नहीं, बल्कि पुराने पारंपरिक तरीके यानी मैन्युअल (Manual) रूप से परीक्षकों द्वारा दोबारा जांचा जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि छात्रों द्वारा लिखा गया एक-एक शब्द सही से पढ़ा जाए और उन्हें उनकी मेहनत के पूरे अंक मिल सकें।
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छात्रों और अभिभावकों को सबसे बड़ी राहत: फीस में ऐतिहासिक कटौती

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इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित खबर फीस में कटौती को लेकर रही। अब तक सीबीएसई में कॉपी दोबारा चेक कराना या अपनी आंसरशीट की फोटोकॉपी मांगना एक बहुत खर्चीला काम माना जाता था, जिससे कई गरीब और मध्यमवर्गीय छात्र अपने अधिकारों से वंचित रह जाते थे। लेकिन अब बोर्ड ने फीस के इस भारी बोझ को लगभग खत्म कर दिया है:
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1. आंसरशीट देखने की फीस हुई कौड़ियों के भाव: पहले अगर कोई छात्र अपनी उत्तर पुस्तिका (Answer Sheet) की स्कैन कॉपी देखना चाहता था, तो उसे 700 रुपये की भारी-भरकम फीस चुकानी पड़ती थी। अब बोर्ड ने इसे घटाकर मात्र 100 रुपये कर दिया है। यह 85% से अधिक की कटौती है!
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2. वेरिफिकेशन फीस (Verification Fee) में भी भारी कमी: मार्क्स के वेरिफिकेशन (अंकों की री-टोटलिंग) के लिए पहले छात्रों को 500 रुपये देने होते थे। छात्रों को राहत देते हुए इस फीस को भी घटाकर अब सिर्फ 100 रुपये कर दिया गया है।
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3. सिर्फ ₹25 में करवाएं एक सवाल की दोबारा जांच: यह बदलाव सबसे क्रांतिकारी है। अगर किसी छात्र को लगता है कि उसके किसी एक विशेष प्रश्न (Specific Question) के उत्तर में सही मार्क्स नहीं मिले हैं और वह सिर्फ उसी सवाल की री-चेकिंग करवाना चाहता है, तो उसे अब केवल 25 रुपये प्रति प्रश्न के हिसाब से फीस देनी होगी। पहले यह प्रक्रिया काफी जटिल और महंगी थी।
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मार्क्स बढ़े तो वापस मिलेगी पूरी फीस (Full Refund Policy)

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शिक्षा सचिव संजय कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि बोर्ड का उद्देश्य छात्रों से पैसे कमाना नहीं, बल्कि पारदर्शिता लाना है। उन्होंने ऐलान किया कि री-इवैल्यूएशन (Revaluation) और री-चेकिंग की प्रक्रिया के दौरान, यदि किसी भी छात्र के अंक (Marks) बढ़ते हैं, तो उससे ली गई री-चेकिंग की पूरी फीस वापस (Refund) कर दी जाएगी। यह कदम छात्रों का बोर्ड पर विश्वास बढ़ाने और उन्हें निडर होकर अपने हक के लिए अपील करने का हौसला देगा।
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क्या OSM सिस्टम पूरी तरह फेल है? जानिए इसके फायदे

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भले ही इस साल हल्की स्याही के कारण कुछ कॉपियों में दिक्कत आई हो, लेकिन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम नया नहीं है, इसे पहली बार 2014 में लागू किया गया था।
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    टोटलिंग की गलतियां हुईं जीरो: इस डिजिटल प्रक्रिया का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि परीक्षकों द्वारा अंकों को जोड़ने (Totaling) में होने वाली मानवीय गलतियां (Human Errors) पूरी तरह से खत्म हो गई हैं। कंप्यूटर अपने आप सारे मार्क्स कैलकुलेट कर लेता है, जिससे रिजल्ट में सटीकता (Accuracy) आई है।
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सीबीएसई और शिक्षा मंत्रालय द्वारा लिए गए ये त्वरित निर्णय इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है। आंसरशीट देखने की फीस को 700 रुपये से घटाकर 100 रुपये करना और 13,000 कॉपियों की दोबारा मैन्युअल जांच का आदेश देना, उन लाखों छात्रों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है, जो एक-एक नंबर के लिए कड़ा संघर्ष करते हैं। यह फैसला न केवल छात्रों के मानसिक तनाव को कम करेगा, बल्कि देश की सबसे बड़ी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही के एक नए युग की शुरुआत भी करेगा।
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