नई दिल्ली। देश के लाखों होनहार छात्रों के भविष्य से जुड़े मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट-यूजी' (NEET-UG 2026) के महा-घोटाले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के हाथ आज एक और बड़ी और अहम कामयाबी लगी है। सीबीआई जांच में यह साफ हो गया है कि पेपर बाहर से हैक नहीं हुआ था, बल्कि सिस्टम के अंदर बैठे 'रखवालों' ने ही इस महा-घोटाले की नींव रखी थी।READ ALSO:-बिजनौर के शेरकोट में गूंजी गोलियों की तड़तड़ाहट: पुलिस मुठभेड़ में लूट कांड का बड़ा खुलासा, जवाबी फायरिंग में एक लुटेरा पस्त
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सीबीआई ने 'पेपर-सेटिंग कमेटी' की एक अहम सदस्य और अनुवादक (Translator) मनीषा मंढारे को गिरफ्तार कर आज कोर्ट में पेश किया। कोर्ट रूम के भीतर सीबीआई के वकीलों ने जो दलीलें और सबूत पेश किए, उसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया। आरोपियों की चालाकी और नेटवर्क के फैलाव को देखते हुए माननीय न्यायालय ने मनीषा मंढारे को पूरे 14 दिनों के लिए सीबीआई की कस्टडी (रिमांड) में भेज दिया है। इसके साथ ही, इस भारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की साख बचाने के लिए बड़े प्रशासनिक बदलाव किए हैं।
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 Rouse Avenue Court Sends Botany Teacher Manisha Mandhare to 14-Day CBI  Custody | NEET Paper Leak

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कैसे हुआ NEET का पेपर लीक? CBI ने कोर्ट में खोले राज

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अब तक यह सवाल पूरे देश को परेशान कर रहा था कि आखिर एनटीए जैसी संस्था की कड़ी सुरक्षा के बीच से नीट का पेपर बाहर कैसे आ गया? सीबीआई ने अदालत में इस राज से पर्दा उठा दिया है।
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जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि गिरफ्तार की गई मनीषा मंढारे कोई साधारण कर्मचारी या बाहरी आरोपी नहीं है। वह एनटीए की उस बेहद गोपनीय 'पेपर-सेटिंग कमेटी' का हिस्सा थी, जिस पर परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है। मनीषा मंढारे बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) और जूलॉजी (जंतु विज्ञान) के प्रश्न पत्रों का अंग्रेजी से अन्य भाषाओं में अनुवाद (Translation) करने की विशेषज्ञ (Expert) थी।
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अनुवादक होने के नाते, मनीषा की पहुंच सीधे उन असली और अंतिम प्रश्न पत्रों तक थी, जो परीक्षा के दिन छात्रों को बांटे जाने थे। सीबीआई के मुताबिक, मनीषा ने अपनी इसी पहुंच और पद का घोर दुरुपयोग किया। उसने सुरक्षा तंत्र की आंखों में धूल झोंकते हुए 'सिस्टम' को धोखा दिया और असली प्रश्न पत्र की कॉपी परीक्षा से पहले ही बाहर निकाल ली। यह खुलासा दर्शाता है कि कैसे एक ही व्यक्ति के लालच ने 24 लाख से अधिक छात्रों की वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
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साजिश का 'त्रिकोण' और 'शुभम' की एंट्री

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अदालत में दी गई दलीलों से यह भी साफ हो गया कि मनीषा मंढारे ने यह खेल अकेले नहीं खेला था। इस पूरे महा-घोटाले के पीछे एक गहरी और सुनियोजित साजिश रची गई थी, जिसमें एक पूरा सिंडिकेट काम कर रहा था।
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सीबीआई की जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस साजिश का एक 'त्रिकोण' (Triangle) था। मनीषा मंढारे इस पूरे नेटवर्क में पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे नाम के दो अन्य प्रमुख चेहरों के साथ मिलकर काम कर रही थी। इन तीनों ने मिलकर पेपर को बाहर निकालने और उसे आगे बेचने का पूरा खाका तैयार किया था।
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जांच एजेंसी ने कोर्ट रूम में बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि मनीषा मंढारे ने अपने पास मौजूद असली प्रश्न पत्र को 'शुभम' नाम के एक अन्य अहम आरोपी को सौंप दिया था। शुभम वह कड़ी था जिसने इस लीक हुए प्रश्न पत्र को आगे दलालों, सॉल्वर गैंग और मोटी रकम देने वाले छात्रों तक पहुंचाया। सीबीआई अब शुभम की तलाश और उससे जुड़े अन्य तारों को खंगालने में जुटी हुई है।
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देशभर में फैले हैं तार, 14 दिन की रिमांड इसलिए है अहम

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सीबीआई ने मनीषा मंढारे की 14 दिनों की भारी-भरकम कस्टडी मांगते हुए कोर्ट को बताया कि यह कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय स्तर का संगठित अपराध (Organized Crime) है। इस रैकेट के तार केवल एक राज्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे देश में फैले हुए हैं।
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वर्तमान में सीबीआई की कई टीमें पूरे देश में एक साथ विभिन्न स्थानों पर छापेमारी और गहन जांच कर रही हैं। चूंकि यह नेटवर्क बहुत बड़ा है और इसमें कई बड़े शिक्षा माफियाओं के शामिल होने का अंदेशा है, इसलिए मनीषा मंढारे से लंबी पूछताछ नितांत आवश्यक है। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मनीषा को जांच और सबूत जुटाने (Evidence Collection) के सिलसिले में देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाना पड़ सकता है, ताकि पेपर लीक की पूरी चेन (Chain of Custody) को जोड़ा जा सके और उन सभी लोगों को बेनकाब किया जा सके जिन्होंने इस पेपर को खरीदा या बेचा है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए बिना किसी हिचकिचाहट के 14 दिन की रिमांड मंजूर कर ली।
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NTA में हुआ बड़ा बदलाव: केंद्र सरकार ने की 4 बड़े अधिकारियों की नियुक्ति

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नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak 2026) विवाद ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणियों के बाद, बैकफुट पर आई केंद्र सरकार ने अब एनटीए में एक बड़ा प्रशासनिक ओवरहॉल (बदलाव) किया है।
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भविष्य की परीक्षाओं को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने NTA में शीर्ष स्तर पर चार नए और अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से मंजूरी दे दी है। इनमें 2 संयुक्त सचिव (Joint Secretary) और 2 संयुक्त निदेशक (Joint Director) स्तर के अधिकारी शामिल हैं। यह महत्वपूर्ण तैनाती DoPT (कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग) ने कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) की अंतिम मंजूरी के बाद की है।
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नई नियुक्तियों के प्रमुख चेहरे:

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    अनुजा बापट (Anuja Bapat): एनटीए में संयुक्त सचिव के पद पर अनुजा बापट की नियुक्ति की गई है। अनुजा 1998 बैच की बेहद तेज-तर्रार ISS (भारतीय सांख्यिकीय सेवा - Indian Statistical Service) अधिकारी हैं। डेटा प्रबंधन और सांख्यिकी में उनकी विशेषज्ञता NTA के परीक्षा पैटर्न और रिजल्ट प्रोसेसिंग में व्याप्त खामियों को दूर करने में अहम भूमिका निभाएगी।
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    रुचिता विज (Ruchita Vij): दूसरी बड़ी नियुक्ति रुचिता विज की है। वह 2004 बैच की IRS (भारतीय राजस्व सेवा - सीमा शुल्क और अप्रत्यक्ष कर) अधिकारी हैं। एक राजस्व अधिकारी के रूप में उनका प्रशासनिक अनुभव एनटीए के वित्तीय और लॉजिस्टिक मैनेजमेंट को पारदर्शी बनाने में काम आएगा।
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इनके अलावा दो अन्य संयुक्त निदेशकों की भी तैनाती की गई है, जिनका मुख्य काम परीक्षा केंद्रों की निगरानी, पेपर की सुरक्षा और राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा।
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छात्रों की मांग और आगे की राह

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यह महा-घोटाला सिर्फ एक परीक्षा में हुई धांधली नहीं है, बल्कि यह देश के उन लाखों छात्रों की भावनाओं और उनके सपनों के साथ हुआ क्रूर मजाक है, जो दिन-रात एक करके डॉक्टर बनने की तैयारी करते हैं। छात्रों का गुस्सा और उनका तनाव पूरी तरह से जायज है। सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक, छात्र लगातार न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
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मनीषा मंढारे की गिरफ्तारी और सीबीआई द्वारा कोर्ट में रखे गए तथ्य इस बात का प्रमाण हैं कि जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है। NTA में हुए नए बदलाव भी सरकार की उस कोशिश का हिस्सा हैं, जिससे छात्रों का खोया हुआ भरोसा वापस जीता जा सके। अब पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन 14 दिनों की सीबीआई रिमांड में मनीषा मंढारे और किन-किन सफेदपोश लोगों के चेहरों से नकाब हटाती है। क्या इस गिरोह के मास्टरमाइंड तक कानून के हाथ पहुंच पाएंगे? यह आने वाले कुछ ही दिनों में साफ हो जाएगा।
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