आज दुनिया भर की निगाहें मध्य पूर्व (Middle East) और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर टिकी हुई हैं। वैश्विक स्तर पर जारी अमेरिका-ईरान (US-Iran) संघर्ष ने एक बार फिर से पूरी दुनिया को ऊर्जा संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। इस भू-राजनीतिक तनाव का सबसे बड़ा असर सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) पर पड़ा है। इस अहम समुद्री मार्ग की नाकेबंदी की आशंकाओं ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
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​आपको बता दें कि दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इस सप्लाई चेन में आई रुकावट और अनिश्चितता के कारण क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में रातों-रात 2% का बड़ा उछाल देखा गया है। इसके परिणामस्वरूप, ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 96 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुका है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव जल्द शांत नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर का आंकड़ा भी छू सकती हैं, जिसका सीधा और विनाशकारी असर भारत जैसे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
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​तेल कंपनियों (OMCs) पर भारी दबाव: दो हफ्तों में 4 बार बढ़े दाम

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​अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की इन आसमान छूती कीमतों ने भारतीय तेल विपणन कंपनियों (Oil Marketing Companies - OMCs) की कमर तोड़ कर रख दी है। पिछले कई महीनों से इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL), और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों पर अंडर-रिकवरी (घाटे) का भारी बोझ लगातार बढ़ता जा रहा था। इस भारी नुकसान की भरपाई करने और अपने मार्जिन को संतुलित करने के लिए कंपनियों ने पिछले कुछ दिनों में सिलसिलेवार ढंग से ईंधन के दामों में वृद्धि की है।
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​आंकड़ों पर गौर करें तो, यह दो हफ्तों के भीतर हुई चौथी बड़ी बढ़ोतरी थी। इस हालिया प्राइस रिवीजन (मूल्य संशोधन) चक्र में आम आदमी की जेब पर सीधा डाका पड़ा है। इन चंद दिनों में ही:
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    ​पेट्रोल की कीमतों में कुल ₹2.61 प्रति लीटर की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
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    ​डीजल की कीमतों में कुल ₹2.71 प्रति लीटर का बड़ा इजाफा हुआ है।
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​हालांकि, आम जनता के लिए आज (28 मई) थोड़ी राहत की बात यह है कि आज सुबह 6 बजे जारी किए गए नए रेट्स में कोई ताज़ा बदलाव नहीं किया गया है और कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। लेकिन पहले ही हो चुकी मूल्य वृद्धि ने घरेलू बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
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​महानगरों में टूट गए सारे रिकॉर्ड: दिल्ली और मुंबई का बुरा हाल

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​देश के बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर (All-time High) पर कारोबार कर रहे हैं। ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले अलग-अलग वैट (VAT) के कारण महानगरों में कीमतों का भारी अंतर देखने को मिल रहा है।
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    ​राजधानी दिल्ली का हाल: हालिया बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल ने ₹100 का मनोवैज्ञानिक स्तर बहुत पीछे छोड़ दिया है। यहां पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है। वहीं, कमर्शियल वाहनों की रीढ़ माना जाने वाला डीजल ₹95.20 प्रति लीटर के भाव पर पहुँच गया है।
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    ​आर्थिक राजधानी मुंबई में हाहाकार: मायानगरी मुंबई में ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं। महाराष्ट्र में लगने वाले उच्च टैक्स के कारण यहाँ पेट्रोल ₹110 की लक्ष्मण रेखा को पार करते हुए ₹111.18 प्रति लीटर पर स्थिर है। मुंबई में डीजल भी शतक लगाने को बेताब है और यह ₹97.83 प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है।
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28 मई: प्रमुख शहरों में आज ईंधन का भाव (लेटेस्ट रेट लिस्ट)

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​तेल कंपनियों द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची के अनुसार, आज विभिन्न शहरों में पेट्रोल के दाम और कल के मुकाबले हुए आंशिक बदलाव (रुपये प्रति लीटर में) इस प्रकार हैं:
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शहर का नाम (City)
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आज का भाव (₹/लीटर)
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बदलाव (Change)
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नई दिल्ली (New Delhi)
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₹95.20
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0.00 (स्थिर)
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कोलकाता (Kolkata)
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₹99.82
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0.00 (स्थिर)
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मुंबई (Mumbai)
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₹97.83
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0.00 (स्थिर)
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चेन्नई (Chennai)
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₹99.55
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-0.43 (गिरावट)
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गुड़गांव (Gurugram)
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₹95.36
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-0.15 (गिरावट)
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नोएडा (Noida)
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₹95.44
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+0.07 (बढ़त)
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बेंगलुरु (Bengaluru)
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₹98.80
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0.00 (स्थिर)
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भुवनेश्वर (Bhubaneswar)
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₹100.68
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+0.16 (बढ़त)
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चंडीगढ़ (Chandigarh)
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₹89.47
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0.00 (स्थिर)
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हैदराबाद (Hyderabad)
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₹103.82
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0.00 (स्थिर)
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जयपुर (Jaipur)
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₹97.45
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-0.20 (गिरावट)
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लखनऊ (Lucknow)
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₹95.55
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+0.19 (बढ़त)
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पटना (Patna)
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₹99.71
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+0.06 (बढ़त)
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तिरुवनंतपुरम (Thiruvananthapuram)
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₹104.41
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+0.29 (बढ़त)
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नोट: ग्राहकों की सुविधा के लिए बता दें कि तेल विपणन कंपनियाँ हर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए रेट अपडेट करती हैं। SMS के जरिए आप अपने शहर का सटीक भाव जान सकते हैं।)
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​इनसाइड स्टोरी: आखिर कैसे तय होते हैं भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम?

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​अक्सर आम जनता के मन में यह सवाल उठता है कि अलग-अलग शहरों में पेट्रोल के दाम अलग क्यों होते हैं और कच्चे तेल के महंगा होने से भारत में कीमतें रातों-रात क्यों बढ़ जाती हैं? आइए इसके पीछे का अर्थशास्त्र समझते हैं:
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    ​आयात पर भारी निर्भरता (Import Dependency): भारत अपनी घरेलू जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों (मुख्यतः खाड़ी देशों और रूस) से आयात करता है। इसलिए, अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में होने वाला मामूली सा बदलाव भी भारत में पेट्रोल-डीजल के बेस प्राइस (Base Price) को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    ​डॉलर बनाम रुपया (Currency Exchange Rate): भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल खरीदने के लिए अमेरिकी डॉलर (US Dollar) में भुगतान करता है। इसलिए, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (INR) की मजबूती या कमजोरी तेल के आयात खर्च में अहम भूमिका निभाती है। यदि रुपया डॉलर के मुकाबले टूटता है या कमजोर होता है, तो भारत को समान मात्रा में तेल मंगाने के लिए अधिक पैसे चुकाने पड़ते हैं। यह बढ़ा हुआ खर्च अंततः जनता की जेब से वसूला जाता है।
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  4. \r\n
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    ​टैक्स का भारी जाल (Taxes and Duties): जो पेट्रोल विदेशों से कच्चा आता है, वह रिफाइनरी में साफ होने के बाद डीलर तक पहुँचता है। इस बेस प्राइस पर सबसे पहले केंद्र सरकार अपनी एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) वसूलती है। इसके बाद डीलर का कमीशन जुड़ता है, और फिर अंत में राज्य सरकारें अपना वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) लगाती हैं। चूंकि हर राज्य का वैट अलग-अलग होता है, इसलिए दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में तेल की कीमतें अलग-अलग होती हैं।
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  6. \r\n
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    ​माल ढुलाई (Freight Charges): रिफाइनरी से पेट्रोल पंप तक तेल पहुँचाने का खर्च भी शहर की दूरी के हिसाब से जुड़ता है, जिससे अंतिम मूल्य में मामूली बदलाव आता है।
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  8. \r\n
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आम आदमी पर क्या होगा असर?

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​डीजल और पेट्रोल की कीमतों में इस भारी उछाल का सीधा असर माल ढुलाई (Transportation) और लॉजिस्टिक्स पर पड़ेगा। माल ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा की जरूरी चीजों, जैसे— फल, सब्जियां, दूध, राशन और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी आने की पूरी संभावना है। ऐसे में आम आदमी के लिए अपने मासिक बजट को संभालना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, तब तक भारतीय उपभोक्ताओं को तेल की कीमतों में किसी बड़ी राहत की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।
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