पर्यावरण संरक्षण और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक (Single-Use Plastic) कचरे की बढ़ती चुनौती से निपटने की दिशा में भारत के डेयरी सेक्टर से एक बेहद क्रांतिकारी और राहत भरी खबर सामने आई है। देश की अग्रणी डेयरी कंपनियों में शुमार 'मदर डेयरी' (Mother Dairy) ने मंगलवार को भारत का पहला 'सेल्फ-डिग्रेडेबल' (Self-Degradable) यानी प्राकृतिक रूप से अपने आप नष्ट होने वाला दूध का पाउच लॉन्च कर दिया है।READ ALSO:-उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदना होगा बेहद सस्ता: नई 'EV पॉलिसी 2026' तैयार; 100% रोड टैक्स फ्री, चार्जिंग स्टेशन लगाने पर 25 लाख तक की सब्सिडी
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यह पैकेजिंग उद्योग में एक ऐसा मील का पत्थर है, जो न केवल पर्यावरण को प्लास्टिक के जहर से बचाएगा, बल्कि उपभोक्ताओं को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के एक स्थायी (Sustainable) विकल्प भी प्रदान करेगा। कंपनी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस नई तकनीक के इस्तेमाल से पैकेजिंग का खर्च जरूर बढ़ेगा, लेकिन इसका बोझ आम जनता पर नहीं डाला जाएगा।
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क्या है 'सेल्फ-डिग्रेडेबल' पाउच और कैसे करेगा काम?

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नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष लॉन्च कार्यक्रम में इस शानदार तकनीक की घोषणा की गई। मदर डेयरी और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के चेयरमैन मीनेश शाह ने इस प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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    4 साल की रिसर्च: इस अनोखे बायोडिग्रेडेबल (Biodegradable) पाउच को तैयार करने के लिए कंपनी की रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) टीम ने लगातार चार साल से अधिक समय तक काम किया है।
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    गलने की वैज्ञानिक प्रक्रिया: सामान्य प्लास्टिक पाउच को नष्ट होने में सदियां लग जाती हैं, लेकिन इस नए पाउच को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि कचरे में फेंके जाने के बाद यह नष्ट होने की प्रक्रिया के दौरान एक 'बायोअवेलेबल वैक्स' (प्राकृतिक मोम) में बदल जाता है। कुछ ही वर्षों के भीतर यह मोम पूरी तरह से प्राकृतिक तत्वों में टूटकर मिट्टी में विलीन हो जाएगा।
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    दिल्ली-NCR से शुरुआत: विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के मौके पर इस पाउच को शुरुआती तौर पर दिल्ली-NCR के बाजारों में उतारा जाएगा। शुरुआत में यह पैकेजिंग मदर डेयरी के 'गाय के दूध' (Cow Milk) के लिए पेश की जाएगी। आपको बता दें कि इस क्षेत्र में कंपनी की कुल दूध बिक्री में गाय के दूध की हिस्सेदारी लगभग 35 प्रतिशत है।
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उपभोक्ताओं को बड़ी राहत: दूध की कीमतों में नहीं होगी कोई बढ़ोतरी

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नई और उन्नत पैकेजिंग तकनीक हमेशा महंगी होती है, ऐसे में उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठना लाजिमी था कि क्या अब दूध के दाम फिर से बढ़ जाएंगे?
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इस चिंता को दूर करते हुए मीनेश शाह ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं को फिलहाल किसी तत्काल बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "अभी उपभोक्ताओं के लिए कीमतें और बढ़ाने का हमारा कोई इरादा नहीं है। यह सच है कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों और लॉजिस्टिक्स (परिवहन) खर्च में भारी बढ़ोतरी के कारण पैकेजिंग सामग्री की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लेकिन फिलहाल, हम इन अतिरिक्त लागतों को खुद वहन करने (Absorb) की योजना बना रहे हैं।"
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एक महीने पहले ही बढ़े थे दाम: गौरतलब है कि एक महीने से भी कम समय पहले मदर डेयरी ने किसानों को दिए जाने वाले खरीद मूल्य में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए अपने लिक्विड दूध के दामों में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी। संगठित डेयरी कंपनियां आमतौर पर किसानों को अधिक भुगतान करने और लागत की भरपाई के लिए साल में एक बार कीमतों में संशोधन करती हैं। शाह ने भरोसा दिलाया कि वर्तमान स्थिति बिल्कुल आरामदायक है।
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किसानों को मिलता है उपभोक्ता के पैसे का 85% तक हिस्सा

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अक्सर सहकारी समितियों (Cooperatives) पर यह आरोप लगता है कि वे उपभोक्ताओं से मिलने वाले पैसे का एक बड़ा हिस्सा अपने पास मुनाफे के तौर पर रख लेती हैं। मीनेश शाह ने इन आलोचनाओं को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने ऑडिटेड वित्तीय विवरणों (Audited Financial Statements) का हवाला देते हुए बताया:
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    अधिकांश सहकारी समितियां उपभोक्ता से मिलने वाले एक रुपये का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा सीधे किसानों को देती हैं।
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    वहीं, मदर डेयरी जैसे बड़े संगठन दूध उत्पादकों (किसानों) को 80 से 85 प्रतिशत तक वापस ट्रांसफर करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
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    मदर डेयरी की दूध खरीद (Milk Procurement) में पिछले साल लगभग 3-3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो दर्शाता है कि कंपनी दूध संग्रह और उत्पादन दोनों ही मोर्चों पर शानदार प्रदर्शन कर रही है।
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पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी है यह कदम?

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भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, जो वैश्विक दूध उत्पादन में अकेले लगभग एक-चौथाई (25%) का योगदान देता है। देश के डेयरी उद्योग में दूध के पाउच अपनी कम लागत और बेहतरीन वितरण नेटवर्क के कारण सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं।
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मीनेश शाह ने इस बात पर जोर दिया कि, "वितरण दक्षता और लागत प्रभावशीलता (Cost Effectiveness) के मामले में पाउच का मुकाबला कोई अन्य पैकेजिंग नहीं कर सकती। इसलिए, हमारे लिए यह बहुत महत्वपूर्ण था कि हम एक ऐसा इनोवेशन करें जो ग्राहकों की आदतें न बदले और पर्यावरण को भी बचाए।" सालाना अरबों की संख्या में इस्तेमाल होने वाले दूध के पाउच को देखते हुए, यह तकनीक पर्यावरण पर एक बहुत बड़ा और सकारात्मक प्रभाव डालने वाली है।
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मानसून की चिंताएं बेअसर: दूध की आपूर्ति रहेगी सुचारू

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इस साल सामान्य से कम मानसून रहने की भविष्यवाणियों के कारण चारे की उपलब्धता और दूध उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी। इस पर NDDB चेयरमैन ने देश को आश्वस्त करते हुए कहा कि डेयरी क्षेत्र बेहद मजबूत स्थिति में है।
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उन्होंने स्पष्ट किया:

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"देश में हमेशा ही एक 'लीन' (कम उत्पादन वाला) और 'फ्लश' (अधिक उत्पादन वाला) सीजन होता है। अगर उम्मीद से कम बारिश होती है, तो कुछ क्षेत्रों में हरे चारे के उत्पादन पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन अन्य क्षेत्र इसकी आसानी से भरपाई कर देंगे। हमें कोई चुनौती दिखाई नहीं दे रही है।"
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भारत वर्तमान में सालाना लगभग 248 से 250 मिलियन टन दूध का उत्पादन करता है और चालू वित्तीय वर्ष के दौरान इसमें 4 से 6 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। पशु स्वास्थ्य, ब्रीडिंग और पोषण पर केंद्रित सरकारी योजनाएं इस क्षेत्र को और भी आत्मनिर्भर बना रही हैं।
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मदर डेयरी की तेज रफ्तार: ₹24,000 करोड़ का है लक्ष्य

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मदर डेयरी न केवल नई तकनीकों में, बल्कि व्यापार में भी लगातार नई ऊंचाइयां छू रही है। कंपनी के प्रबंध निदेशक (Managing Director) जयतीर्थ चारी ने कारोबार से जुड़े कुछ बेहद शानदार आंकड़े साझा किए:
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    गर्मियों की बिक्री में उछाल: पिछले वर्ष की तुलना में इस बार गर्मियों की बिक्री में (जिसमें आइसक्रीम, छाछ, लस्सी और मौसमी उत्पाद शामिल हैं) 30 प्रतिशत से अधिक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
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    भविष्य का लक्ष्य: कंपनी लगभग 20 प्रतिशत की कुल राजस्व (Revenue) वृद्धि का लक्ष्य लेकर चल रही है। उम्मीद है कि वित्तीय वर्ष 2027 तक मदर डेयरी का कुल टर्नओवर लगभग ₹24,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर जाएगा।
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    दैनिक बिक्री के आंकड़े: मदर डेयरी वर्तमान में हर दिन 50 लाख लीटर से अधिक दूध को प्रोसेस करती है और कई राज्यों में दैनिक रूप से लगभग 55 लाख लीटर दूध बेचती है।
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    सबसे बड़ा बाजार: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-NCR) मदर डेयरी का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है, जो कंपनी के कुल कारोबार में लगभग 58 प्रतिशत का योगदान देता है, जबकि शेष 42 प्रतिशत हिस्सा बाहरी बाजारों से आता है।
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मदर डेयरी का 'सेल्फ-डिग्रेडेबल' पाउच लॉन्च करना भारतीय कॉरपोरेट जगत के लिए एक नजीर है। यह साबित करता है कि अगर सही नीयत और विजन हो, तो व्यापारिक तरक्की के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई जा सकती है, वह भी आम उपभोक्ता की जेब पर बिना कोई अतिरिक्त बोझ डाले।
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