खबरीलाल बिजनेस डेस्क: वैश्विक बाजारों में जारी तनाव और आर्थिक उथल-पुथल का सीधा असर अब भारतीय कमोडिटी बाजार पर देखने को मिल रहा है। भारतीय वायदा बाजार (MCX) में सोने (Gold) और चांदी (Silver) की कीमतों में लगातार गिरावट का दौर जारी है। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले इन दोनों कीमती धातुओं की चमक फिलहाल फीकी पड़ती नजर आ रही है। बाजार विश्लेषकों और जानकारों का अनुमान है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में एमसीएक्स (MCX) पर सोना गिरकर ₹1.39 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर तक आ सकता है। वहीं, चांदी में भी मंदी का रुख हावी है।READ ALSO:-मेरठ की बेटी को न्याय की आस: गाजियाबाद में CM योगी से मिला ललिता गौतम का परिवार, मुख्यमंत्री ने कहा- "कोई भी दोषी बचेगा नहीं"
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आइए, विस्तार से समझते हैं कि सोने और चांदी के लिए कौन से स्तर (Levels) महत्वपूर्ण हैं और बाजार में इस उतार-चढ़ाव की मुख्य वजहें क्या हैं।
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एमसीएक्स गोल्ड (MCX Gold): निवेशकों की नजरें ₹1,40,000 के अहम स्तर पर

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हालिया कारोबारी सत्रों में सोना गिरावट के साथ बंद हुआ है, लेकिन निवेशकों के लिए राहत की बात यह रही कि इसने ₹1,40,000 के बेहद जरूरी और मनोवैज्ञानिक स्तर (Support Level) को बचाए रखा है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्तर सोने के लिए 'करो या मरो' (Make or Break) की स्थिति है।
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    गिरावट की स्थिति में: जानकारों का स्पष्ट कहना है कि अगर सोना ₹1,40,000 के स्तर से नीचे फिसलता है, तो बाजार में तकनीकी बिकवाली (Technical Selling) बहुत तेजी से बढ़ेगी। ऐसी स्थिति में सोने का भाव तेजी से गिरकर ₹1,39,300 से ₹1,38,700 के स्तर तक जा सकता है।
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    सुधार की स्थिति में: यदि बाजार में कुछ सकारात्मक सुधार आता है और खरीदारी लौटती है, तो सोने को ऊपर बढ़ने के लिए पहला कड़ा प्रतिरोध (Resistance) ₹1,40,700 से ₹1,41,000 के बीच झेलना पड़ेगा। जब तक सोना इस बाधा को पार नहीं करता, तब तक बड़ी तेजी की उम्मीद कम है। इस स्तर को पार करने के बाद ही सोना ₹1,42,000 से ₹1,42,700 की तरफ बढ़ने का प्रयास कर पाएगा।
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एमसीएक्स चांदी (MCX Silver): मंदी का रुख बरकरार

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सोने के साथ-साथ चांदी में भी भारी कमजोरी और मंदी का रुख बना हुआ है। औद्योगिक मांग में सुस्ती और वैश्विक दबाव के कारण चांदी अपने अहम स्तरों को बनाए रखने में संघर्ष कर रही है।
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    सपोर्ट लेवल: नीचे की तरफ चांदी को ₹2,15,000 से ₹2,14,000 के बीच सहारा (Support) मिलने की उम्मीद है। बाजार के जानकारों का मानना है कि अगर चांदी इस महत्वपूर्ण सहारे को तोड़ देती है, तो बिकवाली का दबाव और बढ़ेगा, जिससे इसकी कीमत घटकर ₹2,11,000 से ₹2,10,000 प्रति किलो तक आ सकती है।
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    रेजिस्टेंस लेवल: ऊपर की तरफ चांदी के लिए ₹2,17,000 से ₹2,18,000 का स्तर एक बहुत बड़ी रुकावट बना हुआ है। यदि कोई उछाल आता भी है, तो अगला कड़ा मुकाबला ₹2,20,000 से ₹2,21,000 के बीच होगा।
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विदेशी बाजारों (COMEX) का हाल

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भारतीय बाजार पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय संकेतों पर निर्भर करते हैं। विदेशी बाजार कॉमैक्स (COMEX) पर भी कीमती धातुओं की स्थिति बहुत मजबूत नहीं है:
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    कॉमैक्स गोल्ड: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना किसी तरह $4,000 के अहम स्तर को बचाने की जद्दोजहद कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह स्तर टूटता है, तो भारी बिकवाली के चलते कॉमैक्स गोल्ड $3,920 प्रति औंस तक गिर सकता है।
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    कॉमैक्स चांदी: विदेशी बाजार में चांदी $55 के आस-पास टिकने का प्रयास कर रही है। इस स्तर के टूटने पर यह $53 तक कमजोर हो सकती है, जिसका सीधा नकारात्मक असर भारतीय बाजारों पर पड़ेगा।
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बाजार में इस भारी उतार-चढ़ाव की मुख्य वजहें

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सोने और चांदी की कीमतों में इस वर्तमान गिरावट और अस्थिरता के पीछे कई प्रमुख वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं:
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    मिडल ईस्ट का तनाव (Middle East Tension): मध्य पूर्व देशों में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता (Geopolitical Uncertainty) और संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन और निवेशकों की धारणा पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
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    कच्चे तेल की कीमतें (Crude Oil Prices): कच्चे तेल के दामों में हो रहे लगातार बदलाव का सीधा असर महंगाई दरों पर पड़ता है, जो अंततः बुलियन मार्केट (Bullion Market) को प्रभावित करता है।
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    अमेरिकी फेड की नीति (US Fed Policy): ब्याज दरों (Interest Rates) को लेकर अमेरिकी सेंट्रल बैंक (Federal Reserve) का सख्त रुख सबसे बड़ा कारण है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं या उनके ऊंचे रहने की संभावना होती है, तो निवेशक सोने की बजाय डॉलर और बॉन्ड यील्ड की तरफ रुख करते हैं, जिससे सोने-चांदी पर दबाव बढ़ता है।
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आम निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

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वर्तमान में बाजार का मौजूदा रुझान (Trend) स्पष्ट रूप से कमजोर बना हुआ है। तकनीकी चार्ट और वैश्विक समीकरण दोनों ही मंदी की ओर इशारा कर रहे हैं। ऐसे अस्थिर माहौल में, बाजार विशेषज्ञों की आम निवेशकों (Retail Investors) को यही सलाह है कि वे अभी जल्दबाजी में पैसा लगाने या बड़ी 'लॉन्ग पोजीशन' (Long Position) बनाने से बचें। बाजार को एक स्थिर दिशा तय करने दें और किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से विचार-विमर्श अवश्य करें।
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