भारत में रसोई गैस (LPG) हर घर की बुनियादी जरूरत है। ऐसे में जब भी गैस बुकिंग या इसकी आपूर्ति से जुड़ी कोई खबर आती है, तो आम जनता का चिंतित होना स्वाभाविक है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर एक खबर जंगल में आग की तरह फैल रही थी कि केंद्र सरकार ने एलपीजी सिलेंडर बुकिंग नियम (LPG Cylinder Booking Rules) में बड़ा बदलाव कर दिया है। इन भ्रामक दावों में कहा जा रहा था कि अब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों और सामान्य उपभोक्ताओं के लिए गैस बुकिंग की समय-सीमा में भारी फेरबदल किया गया है। लेकिन, बुधवार को भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने सामने आकर इन सभी अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार ने देशवासियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है और ईरान-इजरायल युद्ध (Iran-Israel War) के बावजूद देश में एलपीजी का पर्याप्त और सुरक्षित भंडार मौजूद है। READ ALSO:-देश में पेट्रोल-डीजल और गैस की कोई कमी नहीं! तेल कंपनियों ने अफवाहों को किया खारिज, 'पैनिक बाइंग' से बचने की सख्त अपील
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खबरिलाल की इस विशेष और विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि आखिर सोशल मीडिया पर क्या अफवाह फैलाई जा रही थी, सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय का इस पर क्या स्पष्टीकरण आया है, वर्तमान में एलपीजी सिलेंडर बुकिंग नियम वास्तव में क्या हैं, और मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे तनाव से निपटने के लिए भारत सरकार ने 7 'एम्पावर्ड ग्रुप्स' (Empowered Groups) का गठन क्यों किया है।
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अफवाहों का बाजार: सोशल मीडिया पर क्या फैलाया जा रहा था?
\r\n\r\nडिजिटल युग में कोई भी भ्रामक जानकारी (Fake News) मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाती है। पिछले कुछ दिनों से एक असत्यापित मैसेज तेजी से वायरल हो रहा था, जिसने देश भर के गैस उपभोक्ताओं में घबराहट (Panic) पैदा कर दी थी।
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वायरल मैसेज में यह झूठा दावा किया गया था कि:
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- \r\n उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थी: अब 45 दिनों के बाद ही अपना दूसरा गैस सिलेंडर बुक कर पाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n एकल-सिलेंडर (Single Cylinder) वाले सामान्य उपभोक्ता: 25 दिनों के अंतराल के बाद ही रिफिल के लिए आवेदन कर सकेंगे।\r\n \r\n
- \r\n डबल-सिलेंडर (Double Cylinder) वाले उपभोक्ता: 35 दिनों के बाद ही नया सिलेंडर बुक कर पाएंगे।\r\n \r\n
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इस मैसेज के साथ यह भी दावा किया जा रहा था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कमी के कारण सरकार ने गैस की 'राशनिंग' (Rationing) शुरू कर दी है। इन दावों ने आम जनता, विशेषकर बड़े परिवारों और ग्रामीण इलाकों में चिंता बढ़ा दी थी, क्योंकि उनके लिए गैस की सुचारू आपूर्ति दैनिक जीवन का अहम हिस्सा है।
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मंत्रालय का स्पष्टीकरण: एलपीजी सिलेंडर बुकिंग नियम में कोई बदलाव नहीं
\r\n\r\nजैसे ही यह अफवाह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) के संज्ञान में आई, मंत्रालय ने तुरंत एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्थिति को साफ किया। मंत्रालय के प्रवक्ता ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि एलपीजी सिलेंडर बुकिंग नियम को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे सभी दावे पूरी तरह से 'भ्रामक, तथ्यहीन और निराधार' हैं।
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मंत्रालय ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए निम्नलिखित बातें स्पष्ट कीं:
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- \r\n कोई नया नियम लागू नहीं: सरकार ने गैस सिलेंडर की रीफिल बुकिंग की समय-सीमा में हाल-फिलहाल में कोई भी नया संशोधन नहीं किया है।\r\n \r\n
- \r\n भेदभाव नहीं: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों और गैर-उज्ज्वला (सामान्य) उपभोक्ताओं के बीच बुकिंग के समय-अंतराल को लेकर कोई नया भेदभावपूर्ण नियम नहीं बनाया गया है।\r\n \r\n
- \r\n सप्लाई चेन पूरी तरह सुरक्षित: मंत्रालय ने साफ किया कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है और डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क पूरी क्षमता के साथ काम कर रहा है।\r\n \r\n
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वर्तमान में एलपीजी सिलेंडर बुकिंग नियम क्या हैं? (असली हकीकत)
\r\n\r\nचूंकि अफवाहों ने लोगों को भ्रमित कर दिया है, इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि वर्तमान में आधिकारिक एलपीजी सिलेंडर बुकिंग नियम क्या हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) जैसे इंडियन ऑयल (Indane), भारत पेट्रोलियम (Bharat Gas) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HP Gas) ने गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए पहले से ही एक पारदर्शी प्रणाली लागू कर रखी है।
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मौजूदा नियम इस प्रकार हैं:
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- \r\n शहरी क्षेत्रों के लिए 25 दिन का नियम: शहरी इलाकों में, जहां गैस की खपत का एक नियमित पैटर्न होता है, वहां उपभोक्ता एक सिलेंडर की डिलीवरी होने के 25 दिन बाद ही दूसरे सिलेंडर की बुकिंग कर सकते हैं। यह नियम जमाखोरी रोकने के लिए है।\r\n \r\n
- \r\n ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 45 दिन का नियम: ग्रामीण क्षेत्रों के डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए यह अंतराल 45 दिन का रखा गया है। यह व्यवस्था लॉजिस्टिक्स और ग्रामीण मांग के पैटर्न को ध्यान में रखकर बनाई गई थी।\r\n \r\n
- \r\n उज्ज्वला और सामान्य में समानता: यह 25 और 45 दिन का नियम उपभोक्ता की लोकेशन (शहरी या ग्रामीण डिस्ट्रीब्यूटर) पर निर्भर करता है, न कि इस बात पर कि वह उज्ज्वला योजना का लाभार्थी है या सामान्य उपभोक्ता।\r\n \r\n
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सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये नियम कोई नए नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से गैस एजेंसियों के सॉफ्टवेयर में इसी तरह से फीड हैं ताकि हर जरूरतमंद घर तक गैस समान रूप से पहुंच सके।
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आपूर्ति और भंडार: तेल कंपनियों (BPCL, IOCL) की रिपोर्ट
\r\n\r\nअफवाहों के बीच, जब लोग पैनिक बाइंग (Panic Buying) यानी घबराहट में अतिरिक्त गैस सिलेंडर बुक करने लगे, तो भारत की प्रमुख तेल कंपनियों ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की।
\r\n\r\nभारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और इंडियन ऑयल (IOCL) ने संयुक्त रूप से जनता को आश्वस्त किया है कि देश में ईंधन की कोई किल्लत नहीं है।
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रिफाइनरियों की 100% क्षमता पर काम
\r\n\r\nकंपनियों ने आधिकारिक आंकड़े जारी करते हुए बताया कि देश की सभी सरकारी और निजी तेल रिफाइनरियां (Oil Refineries) अपनी 100% स्थापित क्षमता से अधिक पर काम कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल (Crude Oil) और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) से लदे विशाल मालवाहक जहाज (VLCCs) बिना किसी रुकावट के भारत के विभिन्न बंदरगाहों पर लगातार पहुंच रहे हैं।
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भारत एक शुद्ध निर्यातक (Net Exporter)
\r\n\r\nBPCL के अधिकारियों ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण तथ्य साझा करते हुए कहा कि आम जनता को यह समझना चाहिए कि भारत भले ही कच्चा तेल आयात करता है, लेकिन हमारी रिफाइनिंग क्षमता इतनी विशाल है कि हम अपनी घरेलू जरूरतें पूरी करने के बाद पेट्रोल और डीजल जैसे रिफाइंड ईंधनों का विदेशों में भारी मात्रा में निर्यात (Export) करते हैं। हम एक 'नेट एक्सपोर्टर' हैं। इसलिए, भारत जैसे मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देश में ईंधन खत्म होने की बात सोचना ही बेमानी है।
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अफवाहों की जड़: ईरान-इजरायल युद्ध का वैश्विक प्रभाव
\r\n\r\nआखिर ऐसी अफवाहें अचानक से क्यों उठने लगीं? इस सवाल का जवाब अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति (Geopolitics) में छिपा है। वर्तमान में पश्चिम एशिया (Middle East) में ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवन रेखा है।
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जब भी मध्य पूर्व में कोई मिसाइल दागी जाती है या युद्ध की सुगबुगाहट होती है, तो दुनिया भर के शेयर बाजारों और कमोडिटी मार्केट (Commodity Market) में क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें उछलने लगती हैं।
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- \r\n होर्मुज जलडमरूमध्य का डर: दुनिया भर के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है। युद्ध के कारण इस समुद्री रास्ते के बाधित होने की आशंकाएं जताई जा रही थीं।\r\n \r\n
- \r\n सप्लाई चेन का खौफ: अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आ रही इन खबरों को कुछ असामाजिक तत्वों ने भारतीय संदर्भ में तोड़-मरोड़ कर पेश किया और सोशल मीडिया पर यह झूठ फैला दिया कि युद्ध के कारण भारत में तेल और गैस आना बंद हो गया है।\r\n \r\n
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यही कारण है कि सरकार को सामने आकर एलपीजी सिलेंडर बुकिंग नियम और देश के गैस भंडार पर स्पष्टीकरण देना पड़ा।
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संकट मोचन: सरकार ने बनाए 7 'एम्पावर्ड ग्रुप्स' (Empowered Groups)
\r\n\r\nभारत सरकार युद्ध के इस वैश्विक संकट को हल्के में नहीं ले रही है। हालांकि देश में गैस और तेल का पर्याप्त भंडार है, लेकिन भविष्य की किसी भी अनिश्चितता (Uncertainty) से निपटने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और संबंधित मंत्रालयों ने एक 'मास्टर प्लान' तैयार किया है।
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घरेलू बाजार में ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और महंगाई को नियंत्रण में रखने के लिए केंद्र सरकार ने 7 'एम्पावर्ड ग्रुप्स' (अधिकार प्राप्त विशेषज्ञ समूहों) का गठन किया है।
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इन एम्पावर्ड ग्रुप्स का काम क्या होगा?
\r\n\r\nये सात समूह अलग-अलग मोर्चों पर 24x7 निगरानी रखेंगे:
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- \r\n कच्चे तेल की आपूर्ति (Crude Oil Supply): यह समूह खाड़ी देशों के अलावा रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से कच्चे तेल के सुरक्षित आयात के वैकल्पिक रास्तों पर काम करेगा।\r\n \r\n
- \r\n एलपीजी और गैस डिस्ट्रीब्यूशन: यह समूह नजर रखेगा कि एलपीजी सिलेंडर बुकिंग नियम का गैस एजेंसियां सही से पालन कर रही हैं या नहीं, और किसी भी शहर या गांव में गैस की कृत्रिम कमी (Artificial Shortage) तो नहीं पैदा की जा रही है।\r\n \r\n
- \r\n उर्वरक (Fertilizers) और कृषि: प्राकृतिक गैस का उपयोग यूरिया और अन्य उर्वरक बनाने में होता है। एक समूह यह सुनिश्चित करेगा कि किसानों को खाद की कमी न हो।\r\n \r\n
- \r\n सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स: यह समूह बंदरगाहों से लेकर रिफाइनरियों और वहां से पेट्रोल पंपों तक तेल की सुरक्षित ढुलाई की मॉनिटरिंग करेगा।\r\n \r\n
- \r\n मूल्य नियंत्रण (Price Control): अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने की रणनीति यह समूह बनाएगा।\r\n \r\n
- \r\n रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves): आपातकालीन स्थिति में भारत के भूमिगत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों (ISPRL) के उपयोग की योजना तैयार करना।\r\n \r\n
- \r\n सूचना और संचार (Information & Communication): अफवाहों को रोकना और जनता तक सही और प्रामाणिक जानकारी पहुंचाना इस समूह का काम होगा।\r\n \r\n
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इन समूहों के गठन से यह साफ है कि सरकार 'प्रो-एक्टिव' (Pro-active) होकर काम कर रही है ताकि आम जनता को युद्ध की विभीषिका का कोई आर्थिक खामियाजा न भुगतना पड़े।
\r\n\r\n'पैनिक बाइंग' से बचें: नागरिकों से सरकार की अपील
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अफवाहों का सबसे बड़ा और खतरनाक परिणाम होता है 'पैनिक बाइंग' (घबराहट में खरीदारी)। जब लोगों को लगता है कि गैस या तेल खत्म होने वाला है, तो वे जरूरत न होने पर भी अतिरिक्त सिलेंडर बुक करने लगते हैं या पेट्रोल पंपों पर डिब्बों में तेल भरवाने लगते हैं।
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पेट्रोलियम मंत्रालय ने देशवासियों से भावुक और सख्त अपील की है:
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- \r\n सिस्टम पर अनावश्यक दबाव न डालें: जब आप बिना जरूरत के गैस बुक करते हैं, तो जो सामान्य सप्लाई चेन है वह बिगड़ जाती है। इससे उन लोगों को गैस मिलने में देरी होती है जिनका सिलेंडर सच में खत्म हो चुका है।\r\n \r\n
- \r\n कालाबाजारी को बढ़ावा: पैनिक बाइंग से गैस एजेंसियों और बिचौलियों को कालाबाजारी करने का मौका मिल जाता है।\r\n \r\n
- \r\n केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें: व्हाट्सएप पर आने वाले हर फॉरवर्डेड मैसेज को सच न मानें। किसी भी खबर की सत्यता जांचने के लिए पीआईबी फैक्ट चेक (PIB Fact Check) या पेट्रोलियम मंत्रालय के आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल को देखें।\r\n \r\n
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प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) और गैस सब्सिडी की स्थिति
\r\n\r\nचूंकि अफवाहों के केंद्र में उज्ज्वला योजना के लाभार्थी भी थे, इसलिए इस योजना की वर्तमान स्थिति को समझना भी आवश्यक है।
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2016 में शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत देश भर में 10 करोड़ से अधिक गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इसने ग्रामीण भारत में लकड़ी और कोयले के धुएं से महिलाओं को मुक्ति दिलाई है। वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए सरकार ने उज्ज्वला लाभार्थियों को मिलने वाली 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी (Subsidy) को एक और साल के लिए बढ़ा दिया है। इसका मतलब है कि गरीब परिवारों को अभी भी बाजार मूल्य से 300 रुपये कम में गैस सिलेंडर मिल रहा है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि इन करोड़ों गरीब परिवारों की रसोई का बजट वैश्विक युद्ध के कारण न बिगड़े।
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डिजिटल युग में एलपीजी गैस सिलेंडर कैसे बुक करें?
\r\n\r\nअब जब यह स्पष्ट हो गया है कि एलपीजी सिलेंडर बुकिंग नियम में कोई बदलाव नहीं हुआ है, तो उपभोक्ताओं को गैस बुकिंग के आधुनिक और डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल करना चाहिए, जो बेहद सुरक्षित और तेज हैं। अब आपको गैस एजेंसी की लाइन में लगने की जरूरत नहीं है:
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- \r\n WhatsApp के जरिए: आप अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से अपनी गैस कंपनी (Indane, HP, Bharat Gas) के आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर पर 'REFILL' लिखकर मैसेज भेज सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n Missed Call सुविधा: सभी कंपनियों ने एक टोल-फ्री मिस्ड कॉल नंबर जारी किया है। अपने रजिस्टर्ड नंबर से मिस्ड कॉल देते ही आपकी गैस बुक हो जाती है।\r\n \r\n
- \r\n मोबाइल बैंकिंग और UPI ऐप्स: Google Pay, PhonePe, Paytm, और Amazon Pay जैसे ऐप्स के 'Pay Bills' सेक्शन में जाकर 'Book a Cylinder' विकल्प चुनें। अपनी एजेंसी और उपभोक्ता नंबर डालें और ऑनलाइन पेमेंट कर दें।\r\n \r\n
- \r\n कंपनी के आधिकारिक ऐप: 'IndianOil ONE', 'HP Pay', और 'Hello BPCL' ऐप्स डाउनलोड करके भी आप आसानी से सिलेंडर बुक और ट्रैक कर सकते हैं।\r\n \r\n
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इन डिजिटल तरीकों से न केवल बुकिंग पारदर्शी होती है, बल्कि आपको डिजिटल रसीद (Digital Receipt) भी मिलती है, जिससे कोई भी हॉकर (Hawker) आपसे तय कीमत से ज्यादा पैसे नहीं मांग सकता।
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गैस सिलेंडर के सुरक्षित उपयोग के लिए महत्वपूर्ण टिप्स
\r\n\r\nखबरिलाल हमेशा अपने पाठकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। गैस की निर्बाध आपूर्ति के साथ-साथ इसका सुरक्षित इस्तेमाल भी उतना ही जरूरी है:
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- \r\n रेगुलेटर और पाइप की जांच: नियमित रूप से आईएसआई (ISI) मार्क वाले गैस पाइप (Suraksha Hose) और रेगुलेटर की जांच करें। पाइप को हर 3 से 5 साल में जरूर बदल दें।\r\n \r\n
- \r\n लीकेज होने पर क्या करें: अगर घर में गैस की बदबू आए, तो तुरंत रेगुलेटर बंद कर दें। घर के सभी दरवाजे और खिड़कियां खोल दें। कोई भी इलेक्ट्रिकल स्विच (लाइट, पंखा, एग्जॉस्ट) चालू या बंद न करें। माचिस या लाइटर बिल्कुल न जलाएं।\r\n \r\n
- \r\n इमरजेंसी नंबर: गैस लीकेज की स्थिति में तुरंत अपने डिस्ट्रीब्यूटर को फोन करें या राष्ट्रीय आपातकालीन टोल-फ्री नंबर 1906 पर कॉल करें। यह नंबर 24x7 काम करता है।\r\n \r\n
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वैश्विक स्तर पर छाई युद्ध की धुंध के बीच, भारत सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय का यह त्वरित और पारदर्शी स्पष्टीकरण आम जनता के लिए एक बड़ी राहत है। यह अब पूरी तरह से साफ हो गया है कि एलपीजी सिलेंडर बुकिंग नियम में न तो 45 दिन का, न 25 दिन का और न ही 35 दिन का कोई नया बदलाव किया गया है। पुरानी व्यवस्था ही सुचारू रूप से लागू है। भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, विशाल रिफाइनिंग क्षमता और 7 एम्पावर्ड ग्रुप्स की 24x7 निगरानी यह सुनिश्चित कर रही है कि हमारे घरों का चूल्हा बिना किसी रुकावट के जलता रहे। एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर हमारा यह कर्तव्य है कि हम अफवाहों (Fake News) को आगे न बढ़ाएं, पैनिक बाइंग से बचें और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। देश में रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार है; चिंता की कोई बात नहीं है।
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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने सोशल मीडिया पर फैल रही उन फर्जी खबरों का कड़ाई से खंडन किया है जिनमें उज्ज्वला और सामान्य उपभोक्ताओं के लिए गैस बुकिंग की समय-सीमा बदलने का दावा किया जा रहा था। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है; शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का पुराना नियम ही लागू है। ईरान-इजरायल युद्ध के मद्देनजर आपूर्ति चेन और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 7 एम्पावर्ड ग्रुप्स का गठन किया है। देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और भारत में ईंधन का पर्याप्त भंडार सुरक्षित है, इसलिए नागरिकों को पैनिक बाइंग से बचने की सलाह दी गई है।
Sabse pehle comment karne wale banein.