New Delhi: पूरी दुनिया में जहां स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और 'सोबर' (Sober) यानी नशामुक्त होने का ट्रेंड चल रहा है, वहीं भारत में गंगा उल्टी बह रही है। भारत में Alcohol Consumption (शराब की खपत) में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। हालात ये हैं कि शराब के बाजार में भारत ने चीन (China) को भी पीछे छोड़ दिया है और अब अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है।READ ALSO:-दिल्ली में प्रदूषण पर 'इमरजेंसी': अब कोई ढिलाई नहीं, फेल हुए तो सरकारी विभागों पर चलेगा ‘FIR का हथौड़ा’
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फ्रांसीसी शराब निर्माता कंपनी ‘पर्नोड रिकार्ड इंडिया’ (Pernod Ricard India) के आंकड़ों और ग्लोबल रिपोर्ट्स ने भारतीय बाजार की इस बदलती तस्वीर को उजागर किया है। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों भारतीय युवा और बाजार इस दिशा में इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं।
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2 करोड़ युवा हर साल थाम रहे जाम
\r\n\r\nपर्नोड रिकार्ड इंडिया के सीईओ जीन टूबौल (Jean Touboul) के मुताबिक, भारत में शराब की खपत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह यहां की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) है। भारत में हर साल करीब 2 करोड़ युवा उस उम्र (Legal Drinking Age) में प्रवेश करते हैं, जहां वे कानूनी तौर पर शराब पी सकते हैं।
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यह एक विशाल ग्राहक वर्ग है जो सीधे बाजार में कदम रख रहा है। टूबौल का कहना है कि भारत में लोगों की आय (Income) और क्रय शक्ति (Purchasing Power) बढ़ी है। इसके साथ ही सामाजिक सोच में भी बदलाव आया है, जिससे शराब पीना अब 'टैबू' की जगह 'लाइफस्टाइल' का हिस्सा बनता जा रहा है।
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सस्ती नहीं, अब 'प्रीमियम' शराब की डिमांड
\r\n\r\nएक दिलचस्प ट्रेंड यह देखने को मिला है कि भारतीय अब सिर्फ नशा करने के लिए नहीं पी रहे, बल्कि वे 'क्वालिटी' पर फोकस कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, Alcohol Consumption in India का पैटर्न बदल रहा है। लोग अब सस्ती या लोअर कैटेगरी की शराब (Low-end liquor) से हटकर महंगी और प्रीमियम ब्रांड्स (Premium Brands) की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं।
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कंपनियां भी इस बदलाव को भांप चुकी हैं। यही वजह है कि पर्नोड रिकार्ड जैसी दिग्गज कंपनियां अब अपना पूरा फोकस प्रीमियम और सुपर-प्रीमियम ड्रिंक्स पर लगा रही हैं, क्योंकि भारतीय उपभोक्ता अब क्वालिटी के लिए जेब ढीली करने से कतरा नहीं रहे हैं।
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चीन छूटा पीछे, अब अमेरिका से मुकाबला
\r\n\r\nइकोनॉमिक्स टाइम्स (ET) की रिपोर्ट बताती है कि भारत अब शराब कंपनियों के लिए सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि 'ग्रोथ इंजन' बन चुका है।
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- \r\n ग्लोबल शेयर: पिछले वित्तीय वर्ष में पर्नोड रिकार्ड की वैश्विक बिक्री में भारत का योगदान 13% रहा।\r\n \r\n
- \r\n रैंकिंग: इस मामले में भारत ने चीन को पछाड़ दिया है और अब वह अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर काबिज हो गया है।\r\n \r\n
- \r\n अनुमान: मैक्रोइकोनॉमिक ट्रेंड्स इशारा कर रहे हैं कि वह दिन दूर नहीं जब शराब खपत और बाजार के मामले में भारत, अमेरिका को भी पछाड़ देगा।\r\n \r\n
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दुनिया से अलग है भारत का ट्रेंड
\r\n\r\nजहां पश्चिमी देशों में 'Gen-Z' शराब से दूरी बना रहा है, वहीं भारत में खपत बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
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- \r\n खपत में उछाल: साल 2024 से 2029 के बीच भारत में शराब की खपत में 357 मिलियन लीटर की भारी बढ़ोतरी होने का अनुमान है।\r\n \r\n
- \r\n प्रति व्यक्ति खपत: ब्लूमबर्ग के मुताबिक, 2020 में भारत में प्रति व्यक्ति शराब की खपत 3.1 लीटर थी, जो 2023 में बढ़कर 3.2 लीटर हो गई। 2028 तक इसके 3.4 लीटर तक पहुंचने की संभावना है।\r\n \r\n
- \r\n मार्केट साइज: बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, आज भारत में शराब का बाजार 60 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 5 लाख करोड़ रुपए) का हो चुका है।\r\n \r\n
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भारत में बढ़ती आय, युवा आबादी और प्रीमियम लाइफस्टाइल की चाहत ने Alcohol Consumption को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। जहां दुनिया शराब छोड़ रही है, वहीं भारत में यह बाजार 60 अरब डॉलर का हो चुका है। यह ट्रेंड न केवल कंपनियों के लिए मुनाफे का सौदा है, बल्कि समाज में आ रहे बड़े बदलावों का भी संकेत है।
Sabse pehle comment karne wale banein.