नई दिल्ली (खबरीलाल पर्सनल फाइनेंस डेस्क):
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पैसा कमाना जितना मुश्किल है, आज के समय में उस पैसे को बिना कानूनी पचड़े के बैंक में सुरक्षित रखना भी उतनी ही बड़ी कला है। हम में से बहुत से लोग, खासकर छोटे व्यापारी, दुकानदार, प्रॉपर्टी डीलर या आम नौकरीपेशा लोग अक्सर जरूरत पड़ने पर सेविंग्स अकाउंट (Savings Account) में भारी भरकम नकद (Cash) जमा कर देते हैं। उन्हें लगता है कि पैसा उनका है और खाता भी उनका, तो इसमें डर कैसा?
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​लेकिन, हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। काले धन (Black Money), टैक्स चोरी (Tax Evasion) और मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) पर अंतिम प्रहार करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने ऐसे नियम लागू कर दिए हैं, जो सीधे आपकी जेब और सुकून पर असर डालते हैं। बैंक अब सिर्फ पैसे जमा करने की जगह नहीं रहे, बल्कि वे इनकम टैक्स विभाग के 'मुखबिर' के तौर पर भी काम कर रहे हैं। आइए 'खबरीलाल' की इस रिपोर्ट में आसान भाषा में समझते हैं कि कैश डिपॉजिट को लेकर वो कौन सी लक्ष्मण रेखा है, जिसे पार करते ही आपके घर पर इनकम टैक्स का खौफनाक नोटिस दस्तक दे सकता है।
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1. 10 लाख रुपये का 'रेड अलर्ट' रडार (The 10 Lakh SFT Rule)

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​आयकर विभाग ने देश के सभी बैंकों, पोस्ट ऑफिस और को-ऑपरेटिव बैंकों को एक सख्त निर्देश दिया हुआ है। इसे 'स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन' (SFT) कहा जाता है।
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    ​नियम क्या कहता है? यदि कोई भी व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष (Financial Year - 1 अप्रैल से 31 मार्च के बीच) में अपने एक या एक से अधिक सेविंग्स अकाउंट में कुल मिलाकर 10 लाख रुपये या उससे अधिक की नकद राशि जमा करता है, तो बैंक इसकी रिपोर्ट सीधे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को भेज देते हैं।
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    ​समझिए इसका गणित: यह जरूरी नहीं है कि आप 10 लाख रुपये एक ही दिन में जमा करें। अगर आप पूरे साल भर में हर महीने 85-90 हजार रुपये भी नकद जमा करते हैं, तो 12 महीने में आपका कुल डिपॉजिट 10 लाख के पार चला जाएगा और आपका डेटा टैक्स विभाग के कंप्यूटर में 'हाई-रिस्क' की श्रेणी में दर्ज हो जाएगा।
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(ध्यान दें: चालू खाते यानी Current Account के लिए यह कैश डिपॉजिट की लिमिट 50 लाख रुपये सालाना तय की गई है, क्योंकि व्यापार में ज्यादा नकद लेन-देन की जरूरत होती है।)
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2. 10 लाख की लिमिट पार हुई तो आगे क्या होगा?

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​अगर SFT के जरिए आपका नाम टैक्स विभाग के पास पहुंच गया है, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आपके दरवाजे पर तुरंत पुलिस आ जाएगी या बैंक आपका पैसा जब्त कर लेगा। लेकिन यहां से शुरू होता है असली स्क्रूटनी (Scrutiny) का खेल:
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    आय के स्रोत (Source of Income) का मिलान: जब आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करेंगे, तो विभाग का सुपर कंप्यूटर आपके द्वारा घोषित आय का मिलान आपके बैंक खाते में जमा हुए 10 लाख या उससे अधिक के कैश से करेगा।
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    ​नोटिस का आगमन: अगर आपने ITR में अपनी सालाना कमाई 5 लाख रुपये दिखाई है, लेकिन खाते में कैश 15 लाख जमा हुआ है, तो विभाग आपको सेक्शन 133(6) या 148 के तहत 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) जारी कर देगा।
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    ​सबूत मांगना: आपको टैक्स अधिकारियों को यह साबित करना होगा कि वह अतरिक्त कैश कहां से आया? क्या यह किसी पुरानी पुश्तैनी जमीन को बेचने से आया, क्या यह आपकी कृषि आय (Agriculture Income) है, या किसी रिश्तेदार ने उपहार दिया है? आपके पास इसके पक्के कागजात, रसीदें या एग्रीमेंट होने चाहिए।
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    ​जुर्माना और टैक्स की मार: अगर आप उस कैश का संतोषजनक हिसाब नहीं दे पाए, तो आयकर विभाग इसे आपकी अघोषित आय (Unexplained Cash Credit) मानकर सेक्शन 68 या 115BBE के तहत आप पर 60% फ्लैट टैक्स, 25% सरचार्ज और पेनल्टी लगाकर आपकी कमर तोड़ सकता है।
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3. एक दिन में ₹50,000 कैश जमा करने का नियम (The PAN Card Mandatory Rule)

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​सालाना 10 लाख की लिमिट के अलावा रोजमर्रा की बैंकिंग के लिए भी एक बड़ी शर्त है। अगर आप बैंक की शाखा में जाकर एक ही दिन में या एक ही ट्रांजेक्शन में 50,000 रुपये या उससे अधिक का नकद जमा करते हैं, तो आपको जमा पर्ची (Deposit Slip) के साथ अपना स्थायी खाता संख्या यानी PAN Card नंबर देना अनिवार्य है।
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​अगर किसी कारणवश आपके पास पैन कार्ड नहीं है, तो आपको बैंक में 'फॉर्म 60' (Form 60) भरकर देना होगा। इस नियम का मुख्य उद्देश्य यह है कि टैक्स विभाग एक-एक बड़ी एंट्री को आपके पैन नंबर के साथ जोड़कर आपकी पूरी फाइनेंशियल हिस्ट्री (Financial History) पर नजर रख सके।
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4. सबसे खूंखार नियम: सेक्शन 269ST (एक दिन में 2 लाख की लक्ष्मण रेखा)

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​बैंक से बाहर भी नकद लेन-देन पर सरकार ने भारी पहरा बिठाया हुआ है। इनकम टैक्स एक्ट का सेक्शन 269ST एक ऐसा नियम है, जिसकी जानकारी देश के 90% लोगों को आज भी नहीं है और वे अनजाने में इसका उल्लंघन कर बैठते हैं।
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    ​नियम क्या है? आप किसी भी एक व्यक्ति से, एक दिन में या किसी एक बिल/इवेंट के लिए 2 लाख रुपये या उससे अधिक नकद (Cash) नहीं ले सकते।
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    ​उदाहरण से समझें: मान लीजिए आपने अपनी कोई पुरानी कार 3 लाख रुपये में बेची। अगर आप उस कार के खरीदार से 3 लाख रुपये नकद ले लेते हैं, तो आप सेक्शन 269ST का उल्लंघन कर रहे हैं। आपको यह पैसा चेक, NEFT, RTGS या UPI के माध्यम से ही लेना चाहिए।
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    ​100% का भारी जुर्माना: इस नियम की सबसे खतरनाक बात इसका जुर्माना है। अगर टैक्स विभाग को पता चल गया कि आपने 3 लाख रुपये कैश लिए हैं, तो आप पर 3 लाख रुपये का ही (यानी 100 प्रतिशत) भारी जुर्माना ठोक दिया जाएगा।
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5. अन्य जरूरी नकद लिमिट्स, जिन पर रहती है नजर

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​सेविंग्स अकाउंट के अलावा कुछ और भी जगहें हैं जहां कैश लिमिट तय है:
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    ​क्रेडिट कार्ड बिल: अगर आप एक साल में 1 लाख रुपये या उससे अधिक का क्रेडिट कार्ड बिल 'कैश' (नकद) में भरते हैं, तो भी बैंक टैक्स विभाग को रिपोर्ट करेगा।
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    ​फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): अगर आप एक वित्त वर्ष में 10 लाख रुपये से ज्यादा कैश देकर फिक्स्ड डिपॉजिट बनवाते हैं, तो भी आप SFT के रडार पर आ जाएंगे।
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एक्सपर्ट एडवाइज (Expert Advice to Stay Safe)

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​नकद रखना या बैंक में जमा करना कोई जुर्म नहीं है। भारत सरकार का उद्देश्य सिर्फ इतना है कि अर्थव्यवस्था में बहने वाला पैसा 'सफेद' (White Money) हो और उस पर ईमानदारी से टैक्स दिया गया हो। टैक्स की उलझनों और बेवजह के सीए (CA) के चक्करों से बचने के लिए खबरीलाल आपको ये उपाय दे रहा है:
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    ​अपने बड़े लेन-देन, जैसे प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री, महंगी गाड़ियों का लेन-देन या थोक का व्यापार हमेशा डिजिटल माध्यम (Banking Channel) से ही करें।
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    ​अगर आप व्यापारी हैं, तो अपनी रोज की नकद बिक्री की रसीदें (Cash Invoices) जरूर मेंटेन करें, ताकि नोटिस आने पर आप बता सकें कि यह पैसा व्यापार का है।
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    ​अपनी आमदनी के अनुसार हर साल समय पर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) जरूर भरें। ITR आपके और सरकार के बीच एक पारदर्शी शीशे की तरह काम करता है।
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​(पर्सनल फाइनेंस, टैक्स बचाने के अचूक टिप्स और बिजनेस जगत की हर ऐसी ही इनसाइड स्टोरी के लिए हमेशा जुड़े रहें आपके अपने भरोसेमंद न्यूज़ नेटवर्क - खबरीलाल के साथ!)
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