देश में बढ़ती महंगाई के बीच आम आदमी के बजट से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव के बाद अब हर किसी की नजरें रसोई गैस यानी डोमेस्टिक एलपीजी (LPG) सिलेंडर के दामों पर टिकी हुई हैं। इस बीच, LPG सिलेंडर के दामों पर सरकार का बयान सामने आया है, जिसने बाजार और उपभोक्ताओं दोनों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। सरकारी तेल कंपनियों के ताजा वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते घरेलू LPG सिलेंडर पर होने वाला नुकसान अब भी बहुत ज्यादा बना हुआ है।READ ALSO:-मेरठ में ये क्या हुआ! जब 'फायरब्रांड' बीजेपी नेता संगीत सोम पर मुस्लिम महिलाओं ने की नोटों और फूलों की बारिश, वीडियो ने मचाया तहलका
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रिपोर्ट्स की मानें तो तेल कंपनियों को वर्तमान में एक ही सिलेंडर पर करीब 700 रुपये तक का भारी-भरकम घाटा (Under-recovery) उठाना पड़ रहा है। इस भारी घाटे के कारण सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर कीमतें बढ़ाने का दबाव लगातार बना हुआ है। ऐसे में आम जनता के मन में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले दिनों में रसोई गैस सिलेंडर और महंगा होने जा रहा है? आइए, इस लेख में सरकार के बयान, तेल कंपनियों के घाटे और सब्सिडी के पूरे गणित को विस्तार से समझते हैं।
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पेट्रोल-डीजल से राहत, लेकिन LPG पर घाटा बरकरार

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पिछले कुछ महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई आंशिक बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों को अंडर-रिकवरी के मोर्चे पर कुछ राहत जरूर मिली है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल पर कंपनियों का घाटा पहले की तुलना में काफी घट गया है, लेकिन घरेलू LPG सिलेंडर पर होने वाला नुकसान अभी भी पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल कंपनियों के लिए गहरी चिंता का विषय बना हुआ है।
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तेल कंपनियों की वित्तीय रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 में पेट्रोल पर अंडर-रिकवरी करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 105 रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। इसके बाद घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में किए गए संशोधन (मूल्य वृद्धि) के बाद यह अंतर काफी कम हुआ है। वर्तमान जून महीने में पेट्रोल पर अंडर-रिकवरी घटकर लगभग 6 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर रह गई है। लेकिन एलपीजी के मामले में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है, जहां सुधार के संकेत नहीं दिख रहे हैं।
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₹700 प्रति सिलेंडर का नुकसान: क्या है असली वजह?

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LPG सिलेंडर के दामों पर सरकार का बयान इस बात को साफ करता है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर पर तेल कंपनियों को अब भी करीब 700 रुपये प्रति सिलेंडर का शुद्ध नुकसान हो रहा है। इस भारी नुकसान के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:
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    अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतें: वैश्विक स्तर पर एलपीजी के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रोपेन और ब्यूटेन की कीमतें काफी ऊंची बनी हुई हैं।
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    घरेलू स्तर पर नियंत्रित खुदरा रेट: सरकार आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए खुदरा कीमतों (Retail Rates) को एक निश्चित दायरे से बाहर बढ़ने नहीं दे रही है।
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सरकार के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में एक घरेलू LPG सिलेंडर की असली लागत (Actual Cost) करीब 1,600 रुपये तक पहुंच चुकी है। इसके विपरीत, उपभोक्ताओं को यह सिलेंडर बाजार में इससे काफी कम कीमत पर मुहैया कराया जा रहा है। 
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दिल्ली में क्या है आज का भाव?

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उदाहरण के लिए, देश की राजधानी दिल्ली में इस समय घरेलू LPG सिलेंडर की खुदरा कीमत 942 रुपये है। अब अगर 1,600 रुपये की असली लागत और 942 रुपये के बिक्री मूल्य के बीच के अंतर को देखें, तो यह साफ तौर पर लगभग 658 से 700 रुपये बैठता है। यही अंतर तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी या घाटा कहलाता है।
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उज्ज्वला योजना और सब्सिडी का गणित

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इस भारी घाटे और अंतर के बीच सरकार गरीब परिवारों को राहत देने के लिए अपनी तरफ से सब्सिडी भी प्रदान कर रही है। सरकार वर्तमान में 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' (PMUY) के लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सीधी वित्तीय सब्सिडी दे रही है। इसके चलते इन पात्र गरीब उपभोक्ताओं को रसोई गैस सिलेंडर सामान्य ग्राहकों की तुलना में काफी कम कीमत पर मिलता है।
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हालांकि, इस सरकारी सब्सिडी के बावजूद तेल कंपनियों का कुल वित्तीय नुकसान पूरी तरह से कम नहीं हो पा रहा है, क्योंकि सामान्य (Non-Ujjwala) उपभोक्ताओं के लिए भी बिक्री मूल्य लागत से बहुत कम रखा गया है। इसका सीधा वित्तीय बोझ अंततः कंपनियों की बैलेंस शीट पर ही पड़ रहा है। 
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ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर बढ़ता वित्तीय दबाव

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देश की तीन प्रमुख सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां— इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)— भारत में घरेलू LPG की आपूर्ति का लगभग 90% से अधिक का बड़ा हिस्सा संभालती हैं।
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LPG पर लगातार बनी इस अंडर-रिकवरी का सीधा और नकारात्मक असर इन महारत्न और नवरत्न कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन (Quarterly Profits) पर पड़ रहा है।
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ईंधन घाटे की वर्तमान स्थिति (June 2026 Table)

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ईंधन का प्रकार (Fuel Type)
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अप्रैल 2026 में घाटा (प्रति ली/सिली)
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जून 2026 में घाटा (प्रति ली/सिली)
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स्थिति (Status)
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पेट्रोल (Petrol)
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₹24
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₹6
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सुधार की ओर
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डीजल (Diesel)
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₹105
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₹30
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काफी हद तक नियंत्रित
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घरेलू LPG (14.2 KG)
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₹700
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₹700
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अत्यधिक चिंताजनक
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हालिया मूल्य संशोधन के बाद पेट्रोल और डीजल से जुड़ा दबाव तो कम हुआ है, लेकिन एलपीजी पर जारी भारी नुकसान फिलहाल इन तेल कंपनियों के लिए चालू वित्त वर्ष की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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क्या आने वाले दिनों में बढ़ेंगे दाम?

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LPG सिलेंडर के दामों पर सरकार का बयान इस ओर इशारा करता है कि सरकार फिलहाल आम जनता पर कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा बोझ डालने के पक्ष में नहीं है। सरकार का प्रयास है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में नरमी आने का इंतजार किया जाए या फिर तेल कंपनियों के इस घाटे की भरपाई के लिए सरकार उन्हें अलग से बजटीय सहायता (Budgetary Support) या वन-टाइम ग्रांट (One-time Grant) प्रदान करे, जैसा कि पहले भी कई बार किया जा चुका है।
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हालांकि, जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में स्थिति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतें क्या रुख अपनाती हैं। यदि वैश्विक स्तर पर कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो सरकार को तेल कंपनियों को वित्तीय संकट से बचाने के लिए खुदरा दामों में मामूली बढ़ोतरी जैसे कड़े फैसले भी लेने पड़ सकते हैं।
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घरेलू मोर्चे पर महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। LPG सिलेंडर के दामों पर सरकार का बयान यह स्पष्ट करता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लागत ₹1600 होने के बावजूद दिल्ली में सिलेंडर ₹942 में मिल रहा है, जिसके कारण तेल कंपनियों को ₹700 प्रति सिलेंडर का बड़ा घाटा उठाना पड़ रहा है। पेट्रोल और डीजल के मोर्चे पर तो अंडर-रिकवरी कम हुई है, लेकिन एलपीजी का यह नुकसान कंपनियों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। फिलहाल सरकार उज्ज्वला लाभार्थियों को ₹300 की सब्सिडी दे रही है और आम उपभोक्ताओं के लिए भी कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में एलपीजी की कीमतें बढ़ेंगी या नहीं, यह पूरी तरह से वैश्विक बाजार के रुख और सरकार की आर्थिक नीतियों पर निर्भर करेगा।
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