नई दिल्ली: आम आदमी की रसोई के बजट में खाने का तेल (Cooking Oil) एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अक्सर बाजार में तेल खरीदते समय ग्राहक अलग-अलग ब्रांड्स की कीमतों और उनके पैकेट के साइज को लेकर काफी कन्फ्यूजन में रहते हैं। कोई पैकेट 1 लीटर का होता है, तो कोई 900 मिलीलीटर का, जिससे सही कीमत का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।READ ALSO:-मौसम पूर्वानुमान 7 जून: दक्षिण भारत में मानसून का रेड अलर्ट, तो दिल्ली-UP में आंधी-तूफान का तांडव; जानें अपने राज्य का हाल
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
कंपनियों की इसी 'कन्फ्यूजन मार्केटिंग' और पैकेजिंग की चालाकी पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स (Department of Consumer Affairs) ने शनिवार को लीगल मेट्रोलॉजी फ्रेमवर्क (Legal Metrology Framework) के तहत खाने वाले तेल के लिए स्टैंडर्ड पैक साइज (Standard Pack Size) पूरी तरह से अनिवार्य कर दिए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस नए नियम का सीधा और स्पष्ट उद्देश्य आम ग्राहकों को बाज़ार में मौजूद अलग-अलग ब्रांड्स के बीच कीमतों की सही तुलना करने और अपने बजट के अनुसार सही फैसला लेने में मदद करना है। आइए, सरकार के इस बड़े फैसले, इसके पीछे की वजहों और आम जनता की जेब पर पड़ने वाले इसके प्रभाव को विस्तार से समझते हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सिर्फ 9 तय साइज में ही बिकेगा कुकिंग ऑयल: क्या है नया नियम?

\r\n\r\n
सरकार ने बाजार में फैली अव्यवस्था को खत्म करने के लिए नेट क्वांटिटी (Net Quantity) और स्टैंडर्ड पैक साइज तय करने के लिए अपनी 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' (SoP) में बड़ा बदलाव किया है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    9 स्टैंडर्ड साइज: नई SoP के तहत अब देश में प्रमुख कुकिंग ऑयल सिर्फ 9 तय स्टैंडर्ड पैक साइज में ही बेचे जा सकेंगे। कंपनियां अब अपनी मर्जी से 850ml या 950ml जैसे भ्रामक साइज के पैकेट बाजार में नहीं उतार सकेंगी।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    किन तेलों पर लागू होगा नियम? यह नया नियम रसोई में इस्तेमाल होने वाले लगभग सभी प्रमुख तेलों पर लागू होगा। इनमें पाम ऑयल, सोयाबीन, सनफ्लावर (सूरजमुखी), सरसों का तेल (Mustard Oil), मूंगफली, तिल, राइस ब्रान, कॉटनसीड, कॉर्न ऑयल और सभी तरह के ब्लेंडेड एडिबल ऑयल्स (मिश्रित खाद्य तेल) शामिल हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    3 महीने का अल्टीमेटम: सरकार ने रातों-रात इस नियम को थोपने के बजाय तेल कंपनियों और इंपोर्टर्स (आयातकों) को अपनी पैकेजिंग में बदलाव करने और इन नए नियमों को अपनाने के लिए 3 महीने का समय (Deadline) दिया है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

वॉल्यूम के साथ वजन (Weight) लिखना भी हुआ अनिवार्य: खत्म होगा लीटर और किलो का खेल

\r\n\r\n
खाने के तेल के मामले में कंपनियों द्वारा सबसे बड़ा खेल 'लीटर' (Volume) और 'किलो' (Weight) के बीच किया जाता है। विज्ञान के अनुसार, तेल का घनत्व (Density) पानी से कम होता है, इसलिए 1 लीटर तेल का वजन 1 किलोग्राम नहीं होता (यह लगभग 910 ग्राम के आसपास होता है)। कई कंपनियां इसका फायदा उठाकर ग्राहकों को गुमराह करती थीं।
\r\n\r\n
इस धोखाधड़ी को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने एक बेहद सख्त प्रावधान जोड़ा है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
\r\n
"नए नियमों के मुताबिक, अगर खाने वाले तेल के पैकेट पर उसकी मात्रा वॉल्यूम यानी लीटर (Litre) या मिलीलीटर (ml) में प्रमुखता से दिखाई गई है, तो उस पर 'लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) रूल्स, 2011' के तहत उसके बिल्कुल बराबर का वजन (ग्राम या किलोग्राम में) भी साफ-साफ और बड़े अक्षरों में लिखना होगा।"
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
यह नियम देश में बनने वाले (Domestic) और विदेशों से आयात होने वाले (Imported) दोनों तरह के खाद्य तेलों पर एक समान रूप से लागू होगा। इससे ग्राहक यह आसानी से समझ सकेंगे कि वे जितने पैसे दे रहे हैं, उसके बदले उन्हें असल में कितने ग्राम तेल मिल रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

छोटे पैकेट्स और गरीबों को मिली खास छूट

\r\n\r\n
भारत में एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो दिहाड़ी मजदूरी करता है और अपनी रोजमर्रा की जरूरत के हिसाब से छोटे पाउच या पैकेट में तेल खरीदता है। सरकार ने इस वर्ग की जरूरतों और बाजार की व्यावहारिकता को ध्यान में रखते हुए कुछ महत्वपूर्ण छूट भी दी हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    200 ml/ग्राम की छूट: बाजार में कम कीमत वाले छोटे पैकेट्स (Sachets) की उपलब्धता लगातार बनी रहे, इसके लिए 200 मिलीलीटर या 200 ग्राम से कम साइज वाले पैकेट्स को इस 'स्टैंडर्ड पैक साइज' के कड़े नियम से बाहर रखा गया है।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    माइनर ऑयल्स (Minor Oils): इसके अलावा जो 'माइनर एडिबल ऑयल्स' हैं, यानी ऐसे तेल जिनका इस्तेमाल बहुत कम या विशेष औषधीय/अन्य कार्यों के लिए होता है, उन्हें भी इस दायरे से छूट दी गई है।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    स्वैच्छिक शुरुआत: जो कंपनियां दी गई 3 महीने की डेडलाइन से पहले ही इस नए नियम को अपनी पैकेजिंग पर अपनाना चाहती हैं, वे तुरंत इसकी शुरुआत कर सकती हैं। सरकार उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित कर रही है।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

90% इंडस्ट्री की सहमति और समर्थन से लिया गया फैसला

\r\n\r\n
अक्सर जब सरकार ऐसे कड़े नियम लाती है, तो उद्योग जगत (Industry) इसका विरोध करता है। लेकिन कुकिंग ऑयल के इस मामले में ऐसा नहीं है।
\r\n\r\n
सरकार का यह आधिकारिक फैसला एडिबल ऑयल सेक्टर के लगभग 90% हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख उद्योग संघों (Industry Associations) के साथ लंबी, पारदर्शी और विस्तृत चर्चा के बाद ही लिया गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
IVPA ने किया फैसले का स्वागत: इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने सरकार के इस दूरदर्शी कदम का खुले दिल से स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि, "इस फैसले से बाजार में एक 'लेवल प्लेइंग फील्ड' (बराबरी का मौका) तैयार होगा। अब कोई भी कंपनी भ्रामक पैकेजिंग के जरिए दूसरी ईमानदार कंपनी या ग्राहकों को धोखा नहीं दे पाएगी।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

पिछले 3 सालों से बाजार में क्यों मचा था इतना भारी कंफ्यूजन?

\r\n\r\n
इस नए नियम की जरूरत क्यों पड़ी, इसे समझना भी बहुत जरूरी है। सुधाकर देसाई ने बाजार की स्थिति पर खुलकर बात करते हुए बताया कि पिछले तीन साल से 'नॉन-स्टैंडर्डाइजेशन' (पैकेट का कोई एक तय साइज न होने) की वजह से बाजार काफी बुरी तरह प्रभावित हो रहा था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    आजादी का गलत इस्तेमाल: उन्होंने बताया कि पहले सरकार ने इंडस्ट्री को व्यापार में आसानी (Ease of doing business) देने के लिए पैक साइज तय नहीं किए थे। कंपनियों को अपने हिसाब से पैकिंग की आजादी दी गई थी।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    श्रिंकफ्लेशन (Shrinkflation) का खेल: लेकिन पिछले 3 सालों में इस प्रैक्टिस ने मार्केट के पूरे गणित को बिगाड़ दिया। जब तेल के दाम बढ़ते थे, तो कंपनियां पैकेट की कीमत बढ़ाने के बजाय चुपके से उसकी मात्रा कम कर देती थीं (जैसे 1 लीटर को 900ml कर देना)।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    अजीबोगरीब पैकेट्स की बाढ़: बाजार में 850ml, 920ml, 1.8 लीटर जैसे अजीबोगरीब साइज के पैकेट्स की बाढ़ आ गई थी। इससे आम ग्राहकों के बीच काफी भ्रम (Confusion) पैदा हो रहा था। दो अलग-अलग ब्रांड्स की कीमत की तुलना करना एक आम गृहिणी के लिए लगभग असंभव हो गया था।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अब इन 9 स्टैंडर्ड साइज के लागू होने से यह सारा 'पैकेजिंग का खेल' हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्या है लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट (Legal Metrology Act) और क्यों है यह जरूरी?

\r\n\r\n
इस पूरी खबर में 'लीगल मेट्रोलॉजी फ्रेमवर्क' का बार-बार जिक्र आया है। हर उपभोक्ता को इस कानून के बारे में जानना चाहिए, क्योंकि यह उनके अधिकारों की ढाल है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    भारत में पैकेट बंद सामानों (Packaged Commodities) की तौल, माप और उस पर लिखी जाने वाली महत्वपूर्ण जानकारियों (जैसे- MRP, शुद्ध वजन, मैन्युफैक्चरिंग डेट, और एक्सपायरी डेट) को रेगुलेट करने के लिए लीगल मेट्रोलॉजी कानून (Legal Metrology Act) बनाया गया है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    मुख्य उद्देश्य: इस कानून का सबसे बड़ा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि पैकेट पर जो लिखा है, ग्राहक को पैकेट के अंदर हूबहू उतनी ही मात्रा मिले।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    उपभोक्ता संरक्षण: यह कंपनियों को कम वजन देकर या पैकेजिंग में हेराफेरी करके ग्राहकों को गुमराह करने और ठगने से रोकता है। अगर कोई कंपनी इस एक्ट का उल्लंघन करती है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और संबंधित अधिकारियों को जेल भी हो सकती है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आम उपभोक्ता की बड़ी जीत

\r\n\r\n
डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स का यह कदम भारतीय बाजार को अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल (Consumer-friendly) बनाने की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक है। अब जब आप सुपरमार्केट या अपनी गली की किराना दुकान पर खाने का तेल खरीदने जाएंगे, तो आपको कैलकुलेटर निकालकर यह हिसाब नहीं लगाना पड़ेगा कि कौन सी कंपनी आपको कम तेल देकर ज्यादा पैसे ऐंठ रही है। 9 तय साइज और 'लीटर के साथ किलो' लिखने की अनिवार्यता ने अब गेंद पूरी तरह से ग्राहकों के पाले में डाल दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें