भारत में सोने और चांदी के भाव में गिरावट का सिलसिला लगातार तीसरे हफ्ते जारी रहा है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, यह हफ्ता निवेशकों और खरीदारों के लिए राहत भरा रहा, क्योंकि सोने के दाम कम हुए हैं। कीमतों में यह कमी मुख्य रूप से वैश्विक तनाव में कमी और घरेलू मांग के सामान्य होने के कारण आई है। दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों के बाद बाजार अब प्रॉफिट-टेकिंग (मुनाफा वसूली) मोड में आ गया है।Read also:-Meerut Health Crisis: डेंगू-टाइफाइड के मरीजों की बाढ़! Meerut ब्लड बैंक में B और O ग्रुप की सबसे ज्यादा मांग, 60 यूनिट सप्लाई
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सोने और चांदी का साप्ताहिक रुझान (7 नवंबर 2025 तक)

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इस हफ्ते, सोने के भाव ₹670 प्रति 10 ग्राम कम हुए हैं, जबकि चांदी की कीमतों में ₹850 प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है।
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धातु
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अंतिम कारोबारी दिन (31 अक्टूबर)
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इस हफ्ते का आखिरी दिन (7 नवंबर)
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शुद्ध गिरावट
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सोना (24K/10 ग्राम)
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₹1,20,770
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₹1,20,100
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₹670
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चांदी (1 किलो)
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₹1,49,125
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₹1,48,275
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₹850
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    लगातार गिरावट: यह लगातार तीसरा सप्ताह है जब सोने का भाव गिरा है। इससे पहले, 17 अक्टूबर को 10 ग्राम सोने की कीमत ₹1,29,584 के रिकॉर्ड स्तर पर थी।
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    चांदी का प्रदर्शन: चांदी की कीमत भी घटकर ₹1,48,275 प्रति किलोग्राम पर आ गई है।
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सोना-चांदी के दाम में गिरावट के प्रमुख कारण

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सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई बड़े आर्थिक और तकनीकी कारण हैं:
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    सीजनल बाइंग का खत्म होना: दिवाली और धनतेरस जैसे बड़े त्योहारों के बाद भारत में सीजनल बाइंग (मौसमी खरीददारी) लगभग थम गई है। घरेलू मांग में कमी आने से सोने के दाम नरम पड़े हैं।
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    ग्लोबल टेंशन में कमी: सोना-चांदी को 'सेफ-हेवन' (Safe-Haven) माना जाता है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों, खासकर मध्य-पूर्व के संघर्ष, में थोड़ी कमी आने से निवेशक अब जोखिम वाली संपत्तियों (जैसे इक्विटी) की ओर लौट रहे हैं, जिससे सोने की मांग कम हुई है।
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    प्रॉफिट-टेकिंग और ओवरबॉट सिग्नल: कीमतों में आई लंबी रैली के बाद निवेशक मुनाफा बुक कर रहे हैं। इसके अलावा, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) जैसे तकनीकी इंडिकेटर्स दिखा रहे थे कि कीमतें 'ओवरबॉट जोन' (Overbought Zone) में पहुँच चुकी थीं। इसलिए ट्रेंड फॉलोअर्स और डीलर्स ने बिकवाली शुरू कर दी है।
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इस साल रिकॉर्ड बढ़ोतरी: 2025 का अब तक का रिटर्न

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गिरावट के बावजूद, वर्ष 2025 में सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है।
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    सोना (24K/10 ग्राम): 31 दिसंबर 2024 को कीमत ₹76,162 थी, जो अब ₹1,20,100 हो गई है। यानी, इस साल अब तक सोने की कीमत ₹43,938 बढ़ी है।
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    चांदी (1 किलो): 31 दिसंबर 2024 को कीमत ₹86,017 थी, जो अब ₹1,48,275 हो गई है। यानी, इस दौरान चांदी का भाव ₹62,258 बढ़ गया है।
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शहरों में Gold Price Difference के 4 मुख्य कारण

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देश के अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतों में अंतर पाया जाता है। इसके मुख्य कारण हैं:
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  1. \r\n
    परिवहन के खर्चे: सोना एक फिजिकल कमोडिटी है जिसका आयात मुख्य रूप से हवाई जहाज से होता है। आंतरिक इलाकों तक पहुँचाने में लगने वाले ईंधन, सुरक्षा और बीमा के खर्चे अंतिम दाम में जुड़ जाते हैं।
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    सोने की खरीदारी की मात्रा: साउथ इंडिया जैसे उच्च खपत वाले क्षेत्रों में सेलर बल्क में सोना खरीदते हैं, जिससे उन्हें डिस्काउंट मिलता है और दाम कम होते हैं। टियर-2 शहरों में यह लाभ कम मिलता है।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: तमिलनाडु में ज्वेलर्स एंड डायमंड ट्रेडर्स एसोसिएशन जैसे स्थानीय संगठन अपने क्षेत्र में दैनिक सोने के दाम तय करते हैं, जिससे कीमतों में एकरूपता नहीं रहती।
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  7. \r\n
    सोने का खरीद मूल्य: यह सबसे बड़ा कारक है। जिस कीमत पर ज्वेलर ने अपना स्टॉक खरीदा होता है (पुराना या नया स्टॉक), वह अंतिम खुदरा कीमत को प्रभावित करता है।
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सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान

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खरीदारों को हमेशा Gold Rate को सत्यापित करना चाहिए:
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  1. \r\n
    सर्टिफाइड गोल्ड: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। हॉलमार्क संख्या (जैसे AZ4524) सोने की शुद्धता (कैरेट) को प्रमाणित करती है।
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  3. \r\n
    कीमत क्रॉस चेक: खरीदारी से पहले IBJA की वेबसाइट जैसे विश्वसनीय स्रोतों से 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के दाम को क्रॉस चेक करें।
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