नई दिल्ली (Business & Economic News): अगर आपके घर में आने वाले दिनों में कोई शादी-समारोह है या आप निवेश के नजरिए से सोना-चांदी खरीदने का मन बना रहे थे, तो आपके लिए एक बेहद बुरी और झकझोर देने वाली खबर है। भारतीय सर्राफा बाजार (Indian Bullion Market) के इतिहास में आज एक ऐसा अप्रत्याशित मोड़ आया है, जिसने आम खरीदारों से लेकर बड़े निवेशकों तक की नींद उड़ा दी है।Read also:-मेरठ में एसटीएफ का 'ऑपरेशन क्लीन': 36 राउंड फायरिंग से गूंजा इलाका, AMU टीचर को भूनने वाला 1 लाख का इनामी जुबैर ढेर
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
केंद्र सरकार ने गिरती अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार पर मंडराते खतरे को टालने के लिए एक बेहद सख्त फैसला लिया है। सरकार ने तत्काल प्रभाव से सोने और चांदी के आयात पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। बुधवार को वित्त मंत्रालय द्वारा जारी इस आदेश का असर आज यानी 13 मई को बाजार खुलते ही सुनामी की तरह नजर आया। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर टैक्स का यह नया गणित क्या है, इसके पीछे के क्या कारण हैं, और आम आदमी से लेकर देश की अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होने वाला है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बाजार में हाहाकार: कीमत का नया गणित

\r\n\r\n
सरकार के इस फैसले के बाद सर्राफा बाजार में कीमतों ने जो छलांग लगाई है, वह आम आदमी की पहुंच से बहुत दूर हो गई है। टैक्स में हुई इस भारी-भरकम बढ़ोतरी के कारण सिर्फ एक दिन में सोना 9,000 रुपये और चांदी 22,000 रुपये तक महंगी हो गई है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    सोने का नया भाव: 10 ग्राम शुद्ध सोने का भाव अब छलांग लगाकर 1.60 लाख रुपये के ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गया है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    चांदी की उड़ान: वहीं, चांदी ने भी सारे रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए 2.87 लाख रुपये प्रति 1 किलोग्राम का जादुई आंकड़ा छू लिया है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
आपको याद दिला दें कि इसी साल (2024) के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आभूषण उद्योग को बड़ी राहत देते हुए इम्पोर्ट ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% कर दिया था। लेकिन अब नए नियमों के तहत सोने पर 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) लगा दिया गया है, जिससे कुल प्रभावी टैक्स वापस लौटकर 15% के उच्चतम स्तर पर आ गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आखिर सरकार को क्यों पीना पड़ा यह 'कड़वा घूंट'?

\r\n\r\n
सरकार कभी भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती जिससे आम जनता को सीधा नुकसान हो, लेकिन वर्तमान अंतरराष्ट्रीय हालात ने सरकार को मजबूर कर दिया है। इस कड़े फैसले के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    विदेशी मुद्रा की बेतहाशा निकासी: भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। हमारे देश की खदानों से सोना नहीं निकलता, बल्कि हम अपनी मांग पूरी करने के लिए विदेश से सोना मंगाते हैं (आयात करते हैं)। इस आयात का भुगतान हमें अमेरिकी डॉलर (US Dollar) में करना पड़ता है। जब भारी मात्रा में डॉलर देश से बाहर जाता है, तो हमारा 'चालू खाता घाटा' (Current Account Deficit) खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    अमेरिकी-ईरान युद्ध का साया: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी भीषण जंग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर हैं और दुनिया भर के निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए अमेरिकी डॉलर की तरफ भाग रहे हैं।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    रुपये का ऐतिहासिक पतन: इन वैश्विक झटकों का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा है। कल यानी 12 मई को भारतीय रुपया, डॉलर के मुकाबले 95.50 के अपने सर्वकालिक निचले स्तर (All-Time Low) पर धड़ाम हो गया। रुपये को और अधिक गिरने से बचाने के लिए 'डॉलर के खर्च' को रोकना बेहद जरूरी हो गया था।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

प्रधानमंत्री मोदी की भावुक अपील: 'देश के लिए तिजोरी बंद रखें'

\r\n\r\n
आर्थिक संकट की इस घड़ी में देश को संभालने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगे आए हैं। पीएम मोदी ने लगातार दो दिन (10 और 11 मई को) देश की जनता से एक बेहद भावुक और राष्ट्रभक्ति से जुड़ी अपील की है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
प्रधानमंत्री ने खुले मंच से कहा, "मेरे प्यारे देशवासियों, एक समय था जब हमारे देश पर कोई संकट आता था, तो लोग राष्ट्रहित में अपना सोना दान कर देते थे। आज भारत सरकार को आपके दान की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन देशहित में हमें यह तय करना होगा कि आने वाले एक साल तक हमारे घर में कोई भी कार्यक्रम हो, हम सोने के नए गहने बिल्कुल नहीं खरीदेंगे। आज देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचाना ही सच्ची देशभक्ति है। हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है, और हमें इस चुनौती को स्वीकार करके अपने रुपये को ताकत देनी होगी।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आम आदमी की जेब और सप्लाई चेन पर सीधा असर

\r\n\r\n
सरकार के टैक्स बढ़ाने से सबसे पहला असर सोने की 'लैंडिंग कॉस्ट' (भारत पहुंचने की लागत) पर पड़ता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    महंगाई की मार: इसका सीधा अर्थ है कि आम आदमी को अब अपने आभूषण बनवाने के लिए पहले से कहीं अधिक अपनी जेब ढीली करनी होगी। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अब सोना खरीदना एक सपने जैसा हो जाएगा।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    सप्लाई में आएगी भारी कमी: टैक्स के नए झमेलों और आसमान छूती कीमतों के कारण बड़े थोक कारोबारी अब विदेश से कम सोना मंगाएंगे। सर्राफा बाजार में सोने की भौतिक उपलब्धता (Physical Availability) कम होगी, जिससे मांग और आपूर्ति का नियम लागू होगा और कीमतें आगे भी ऊंची ही बनी रहेंगी।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बैंकों की परेशानी: 3% IGST ने अटकाया 'सोने का पहिया'

\r\n\r\n
इम्पोर्ट ड्यूटी के अलावा, आयात के नियमों में हुए एक अन्य बदलाव ने कोढ़ में खाज का काम किया है। सरकार ने बीते दिनों सोने-चांदी के आयात पर 3% IGST (इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) के नियमों में कड़े बदलाव किए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पहले बैंक 'बॉन्डेड वेयरहाउस' की सुविधा का फायदा उठाते थे। यानी वे सोना आयात तो कर लेते थे, लेकिन टैक्स तब भरते थे जब वह सोना ज्वैलर्स को बेचा जाता था। लेकिन अब सरकार ने शर्त लगा दी है कि सोना देश में कदम रखते ही बैंकों को तुरंत 3% IGST चुकाना होगा। इस नए नियम से बैंकों का करोड़ों-अरबों रुपया 'एडवांस टैक्स' के रूप में सरकार के पास ब्लॉक होने लगा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अपनी वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) पर पड़े इस भारी दबाव और कैश फ्लो की समस्या के कारण, बैंकों ने पिछले एक महीने से विदेश से सोना मंगाना ही बंद कर दिया है। इसका सीधा नतीजा यह हुआ है कि अप्रैल 2026 में भारत का कुल सोना आयात मात्र 15 टन रहने का अनुमान है, जो कि कोविड काल के लॉकडाउन को छोड़ दें, तो पिछले तीन दशकों में सबसे कम है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्या फिर से लौटेगा 'स्मगलिंग' का काला दौर?

\r\n\r\n
अर्थव्यवस्था को बचाने के इस प्रयास के बीच एक बड़ा खतरा भी मंडराने लगा है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता ने कहा कि यह कदम करंट अकाउंट डेफिसिट को रोकने के लिए ठीक हो सकता है, लेकिन इससे बाजार की मांग बुरी तरह प्रभावित होगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
वहीं, सर्राफा इंडस्ट्री के जानकारों का स्पष्ट मानना है कि टैक्स 6% से 15% होने के बीच जो 9% का भारी अंतर आया है, वह तस्करों (Smugglers) के लिए संजीवनी बूटी का काम करेगा। इतिहास बताता है कि जब भी सोने पर टैक्स बढ़ता है, तो ग्रे-मार्केट (अवैध बाजार) सक्रिय हो जाता है और सोने की तस्करी में भारी उछाल आता है। ड्यूटी कम होने पर जो तस्करी लगभग खत्म हो गई थी, उसके अब फिर से बेलगाम होने की पूरी आशंका है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
संक्षेप में कहें तो, अल्पकाल में यह फैसला आम जनता और कारोबारियों के लिए दर्दनाक जरूर है, लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से देखें तो यह कदम डॉलर के मुकाबले रुपये को सहारा देने और भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक तूफानों से सुरक्षित रखने के लिए एक जरूरी और मजबूत 'आर्थिक ढाल' साबित होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें