नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क): यदि आप अपने घर में शादी-ब्याह के लिए गहने बनवाने की सोच रहे हैं या फिर सोने-चांदी में निवेश करने का मन बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है। भारतीय सर्राफा बाजार (Bullion Market) में इस हफ्ते सोने और चांदी (Gold and Silver Prices) की कीमतों में तगड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले कुछ महीनों से आसमान छू रहे इन कीमती धातुओं के दाम अब तेजी से नीचे आ रहे हैं।
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इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सोने और चांदी ने अपने उच्चतम स्तर (All-Time High) से गोता लगाया है। जनवरी 2026 में जो सोना आम आदमी की पहुंच से बाहर होता दिख रहा था, उसमें अब जबरदस्त करेक्शन देखने को मिला है। आइए इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं कि कीमतों में कितनी गिरावट आई है, इसके पीछे के वैश्विक कारण क्या हैं और बाजार का मौजूदा हाल क्या कहता है।
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IBJA के अनुसार इस हफ्ते का प्राइस अपडेट

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बाजार में इस पूरे हफ्ते उठापटक का दौर जारी रहा। पिछले सप्ताह के मुकाबले इस सप्ताह के अंत तक आते-आते दोनों कीमती धातुओं ने निवेशकों को चौंका दिया।
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कीमती धातु
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23 मई का रेट
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वर्तमान रेट (इस हफ्ते के अंत में)
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कुल गिरावट
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सोना (24 कैरेट - 10 ग्राम)
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1.58 लाख रुपये
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1.56 लाख रुपये
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1,654 रुपये
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चांदी (1 किलोग्राम)
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2.66 लाख रुपये
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2.63 लाख रुपये
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2,650 रुपये
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नोट: ये कीमतें इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी की गई हैं। इनमें जीएसटी (GST) और ज्वेलर्स का मेकिंग चार्ज (Making Charges) शामिल नहीं होता है। जब आप बाजार में गहने खरीदने जाते हैं, तो अंतिम कीमत इन शुल्कों के जुड़ने के बाद अधिक होती है।
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सोने की कीमतों का सफर: ₹1.76 लाख से ₹1.56 लाख तक का गोता

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साल 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में सोने ने निवेशकों को हैरतअंगेज रिटर्न दिया था। बाजार के जानकारों को भी इतनी जल्दी इतनी बड़ी उछाल की उम्मीद नहीं थी। लेकिन अब ट्रेंड पलट चुका है। पिछले कुछ हफ्तों में भारी मुनाफावसूली (Profit Booking) और वैश्विक कारणों से सोने की चमक थोड़ी फीकी पड़ी है।
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    शुरुआती स्तर (31 दिसंबर 2025): साल के अंत में सोने का भाव 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था, जो निवेशकों के लिए एक सुरक्षित दांव माना जा रहा था।
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    ऑलटाइम हाई (29 जनवरी 2026): नए साल की शुरुआत के मात्र एक महीने के भीतर ही सोने में भारी उछाल आया और यह 1.76 लाख रुपये के ऐतिहासिक और अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया।
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    मौजूदा स्थिति और गिरावट: आज की तारीख में सोना 1.56 लाख रुपये पर आ गया है। इसका सीधा मतलब है कि यह अपने जनवरी के उच्चतम स्तर से अब तक लगभग 20,000 रुपये सस्ता हो चुका है।
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चांदी की कीमतों में क्रैश: ₹3.86 लाख से ₹2.63 लाख तक की ढलान

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सोने के मुकाबले चांदी के बाजार में हमेशा से ही ज्यादा अस्थिरता (Volatility) देखने को मिलती है, और इस बार भी ऐसा ही हुआ। चांदी ने अपने निवेशकों को पहले तो मालामाल किया और फिर अचानक से एक बड़ी गिरावट का शिकार हो गई। औद्योगिक मांग में कमी और बाजार के सेंटिमेंट बदलने से चांदी औंधे मुंह गिरी है।
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    शुरुआती स्तर (31 दिसंबर 2025): 2025 के आखिरी दिन चांदी का भाव 2.30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम था।
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    ऑलटाइम हाई (29 जनवरी 2026): सोने की तरह ही चांदी ने भी 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपये का ऐतिहासिक स्तर छू लिया था। इस जादुई आंकड़े ने पूरे बाजार को अचंभे में डाल दिया था।
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    गिरावट का चौंकाने वाला आंकड़ा: पिछले 118 दिनों के सफर में चांदी में बड़ा क्रैश आया है। वर्तमान में यह 2.63 लाख रुपये पर ट्रेड कर रही है। यानी अपने उच्चतम स्तर से चांदी 1.23 लाख रुपये सस्ती हो गई है। यह गिरावट उन निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका है जिन्होंने जनवरी के पीक पर खरीदारी की थी।
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कीमतों में इस भारी गिरावट के मुख्य कारण

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आमतौर पर यह देखा जाता है कि जब भी दुनिया में कोई युद्ध, महामारी या भू-राजनीतिक संकट (Geopolitical Crisis) आता है, तो सोने-चांदी के दाम रॉकेट की तरह बढ़ते हैं। लोग शेयर बाजार से पैसा निकालकर 'सेफ हेवन' माने जाने वाले गोल्ड में लगाते हैं। लेकिन मौजूदा परिदृश्य में स्थिति थोड़ी अलग और दिलचस्प है:
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1. मेटल छोड़कर 'कैश' (नकद) पर भरोसा:

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वर्तमान में मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चल रहे तनाव और जंग के माहौल के कारण निवेशक अत्यधिक सतर्क हो गए हैं। इस बार वे जोखिम लेने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। अप्रत्याशित संकट से निपटने के लिए बड़े निवेशक और फंड हाउस अपने गोल्ड और सिल्वर रिजर्व को बेचकर 'कैश' (Liquidity) इकट्ठा कर रहे हैं। उनका मानना है कि घोर अनिश्चितता के समय में लिक्विड मनी (नकद) सबसे ज्यादा काम आती है। कैश इन हैंड होने से उन्हें भविष्य में सस्ते वैल्यूएशन पर अन्य संपत्तियां खरीदने का मौका भी मिलेगा।
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2. बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग (Profit Booking):

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जनवरी 2026 में जब सोने और चांदी की कीमतें अपने रिकॉर्ड ऑलटाइम हाई पर पहुंच गई थीं, तब बाजार ओवरवैल्यूड हो गया था। जो निवेशक निचले स्तरों (2025) से बाजार में बने हुए थे, उन्हें लगा कि यह मुनाफावसूली का सबसे सही समय है। बड़े संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) ने ऊंचे दामों पर अपनी होल्डिंग बेचना शुरू कर दिया। जब बाजार में अचानक से बिकवाली का दबाव बढ़ता है और सप्लाई ज्यादा हो जाती है, तो कीमतें स्वाभाविक रूप से नीचे आ जाती हैं।
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3. डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड का प्रभाव:

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है या अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़ती है, तो सोने का आकर्षण कम हो जाता है। निवेशक सोने (जिस पर कोई ब्याज नहीं मिलता) की बजाय बॉन्ड में पैसा लगाना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद समझते हैं।
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ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन महत्वपूर्ण बातों का रखें ध्यान

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बाजार में आई इस गिरावट को देखते हुए कई लोग ज्वेलरी शोरूम का रुख कर रहे हैं। लेकिन सोना खरीदते समय भावनाओं में बहने की बजाय हमेशा सतर्कता बरतनी चाहिए। आपकी जीवन भर की गाढ़ी कमाई सही जगह लगे, इसके लिए निम्नलिखित नियमों का पालन जरूर करें:
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    सर्टिफाइड और हॉलमार्क गोल्ड ही खरीदें:
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    सरकार के सख्त नियमों के बाद अब बिना हॉलमार्क के सोना बेचना गैर-कानूनी है। हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें।
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    HUID कोड की जांच करें:
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    हर हॉलमार्क ज्वेलरी पर 6 अंकों का एक अल्फान्यूमेरिक कोड होता है, जिसे HUID (Hallmark Unique Identification) कहते हैं। यह नंबर कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। आप अपने स्मार्टफोन में 'BIS Care App' डाउनलोड करके इस कोड को स्कैन या दर्ज कर सकते हैं। यह ऐप आपको तुरंत बता देगा कि सोना कितने कैरेट का है, इसे किस ज्वेलर्स ने बनाया है और इसकी हॉलमार्किंग कब हुई है।
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    कीमतों को क्रॉस चेक जरूर करें:
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    सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी आधिकारिक कीमत को विभिन्न सोर्सेज से क्रॉस चेक करें। आप इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वेबसाइट या बिजनेस न्यूज़ पोर्टल्स पर जाकर उस दिन का सही भाव पता कर सकते हैं। ज्वेलर्स जो रेट बता रहा है, उसकी तुलना आधिकारिक रेट से करें।
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    मेकिंग चार्जेज पर मोलभाव करें:
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    ज्वेलर्स गहनों की डिजाइन के आधार पर 8% से लेकर 25% तक मेकिंग चार्ज (बनवाई) वसूलते हैं। यह कोई फिक्स रेट नहीं होता है। आप इसमें मोलभाव (Bargaining) कर सकते हैं। मशीन से बने गहनों पर मेकिंग चार्ज कम होता है, जबकि हाथ से बने और जटिल डिजाइन वाले गहनों पर यह अधिक होता है।
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    पक्का बिल (Invoice) लेना न भूलें:
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    चाहे आप कितना भी सोना खरीदें, ज्वेलर से पक्का बिल (GST Invoice) लेना कभी न भूलें। बिल पर गहने का नाम, वजन, कैरेट (22K या 18K), HUID कोड और मेकिंग चार्ज स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए। भविष्य में जब आप गहने वापस बेचने या एक्सचेंज करने जाएंगे, तो यही बिल आपके काम आएगा।
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आगे क्या है बाजार की दिशा?

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मौजूदा गिरावट ने रिटेल खरीदारों के चेहरे पर मुस्कान जरूर ला दी है, लेकिन निवेशकों के मन में अभी भी संशय है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतों में यह करेक्शन बाजार के लिए एक स्वस्थ संकेत (Healthy Correction) है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिडिल ईस्ट का तनाव पूरी तरह से शांत नहीं हो जाता और ग्लोबल महंगाई दर काबू में नहीं आती, तब तक कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की संभावना है।
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लॉन्ग टर्म (दीर्घावधि) के नजरिए से सोना हमेशा से ही मुद्रास्फीति (Inflation) के खिलाफ एक मजबूत ढाल रहा है। इसलिए, जो लोग लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह गिरावट 'डिप्स पर खरीदारी' (Buy on Dips) का एक शानदार मौका साबित हो सकती है।
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