Anil Kumar Sharma, Special Correspondent(Khabreelal Media)बिजनौर जिले के औद्योगिक विकास की रीढ़ और हजारों किसानों की जीवनरेखा माने जाने वाली धामपुर शुगर मिल (Dhampur Sugar Mill) ने अपने स्थापना दिवस को एक बेहद ही खास और प्रेरणादायक अंदाज में मनाया है। अक्सर बड़ी-बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां अपना स्थापना दिवस भव्य पार्टियों और भारी-भरकम आयोजनों में खर्च कर देती हैं, लेकिन धामपुर शुगर मिल प्रबंधन ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए इस ऐतिहासिक दिन को 'मानव सेवा' को समर्पित करने का एक शानदार फैसला लिया।READ ALSO:-'छापेमारी गैंग' का गेमओवर: नजीबाबाद में होटलों में घुसकर ब्लैकमेलिंग और मोटी उगाही करने वाले शातिर पुलिस के हत्थे चढ़े
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मिल के उपाध्यक्ष आशीष कुमार शर्मा की एक शानदार और मानवीय पहल पर आज धामपुर शुगर मिल की अपनी अधिकृत डिस्पेंसरी में एक विशाल 'स्वैच्छिक रक्तदान शिविर' (Voluntary Blood Donation Camp) का भव्य आयोजन किया गया। इस शिविर में मिल के आला अधिकारियों से लेकर सामान्य कर्मचारियों तक ने भारी उत्साह के साथ हिस्सा लिया और कुल 40 यूनिट रक्त (Blood) संग्रहित किया गया। आइए इस पूरे आयोजन, इसके पीछे के नेक उद्देश्य और शुगर मिल के ऐतिहासिक सफर पर विस्तार से नजर डालते हैं।
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स्थापना के 93 वर्ष पूरे: 22 मई 1933 को रखी गई थी मजबूत नींव

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रक्तदान शिविर के दौरान अपने संबोधन में धामपुर शुगर मिल के उपाध्यक्ष (Vice President) श्री आशीष कुमार शर्मा ने मिल के गौरवशाली इतिहास और इसके सफर पर प्रकाश डाला। उन्होंने वहां उपस्थित सभी कर्मचारियों, डॉक्टरों और रक्तदाताओं को जानकारी देते हुए बताया कि धामपुर शुगर मिल की स्थापना आज से कई दशक पूर्व 22 मई 1933 को हुई थी।
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यह केवल एक औद्योगिक इकाई या केवल चीनी बनाने की फैक्ट्री नहीं है, बल्कि यह पूरे धामपुर और बिजनौर क्षेत्र के विकास का एक जीता-जागता गवाह है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "चूंकि आज (22 मई) हमारी शुगर मिल का स्थापना दिवस (Foundation Day) है, इसलिए इस शुभ अवसर को किसी साधारण जश्न तक सीमित रखने के बजाय, हमने इसे एक ऐसे कार्य के साथ मनाने का निर्णय लिया जिससे सीधे तौर पर समाज के जरूरतमंदों की जान बचाई जा सके। समाज में रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है, और यही हमारे संस्थान के मूल संस्कार रहे हैं।"
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लीडिंग बाय एग्जांपल (Leading by Example): जब अधिकारियों ने किया प्रथम रक्तदान

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इस संपूर्ण स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का सबसे सुंदर, उत्कृष्ट और प्रेरक पल वह था, जब मिल के शीर्ष अधिकारियों ने दूसरों को उपदेश देने के बजाय स्वयं आगे आकर 'लीड' किया।
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शिविर की शुरुआत करते हुए प्रथम रक्तदानी (First Donors) के रूप में स्वयं शुगर मिल के उपाध्यक्ष आशीष कुमार शर्मा और मुख्य केमिस्ट (Chief Chemist) विजय कुमार गुप्ता ने अपना कीमती रक्त दान किया। जब किसी भी संस्थान का मुखिया स्वयं इस तरह के पुण्य कार्य में सबसे पहले आगे आता है, तो उसके मातहत काम करने वाले कर्मचारियों का मनोबल और उत्साह अपने आप दोगुना हो जाता है।
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अधिकारियों को बेड पर लेटकर मुस्कुराते हुए रक्तदान करते देख मिल के अन्य कर्मचारियों, इंजीनियरों और मजदूरों में भी रक्तदान के प्रति गजब का उत्साह देखने को मिला। देखते ही देखते रक्तदान करने वालों की लंबी कतार लग गई और शिविर की समाप्ति तक कुल 40 यूनिट शुद्ध और सुरक्षित रक्त सफलतापूर्वक संग्रहित कर लिया गया। एकत्रित किया गया यह रक्त जिले के जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त में उपलब्ध कराया जाएगा।
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मेडिकल टीम का रहा अहम योगदान: बिजनौर से पहुंची थी विशेष टीम

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इस विशाल और महत्वपूर्ण रक्तदान शिविर को चिकित्सा मानकों के अनुरूप और पूरी तरह से सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए बिजनौर जिला मुख्यालय से विशेष डॉक्टरों की टीम बुलाई गई थी।
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यह पूरा आयोजन पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय, बिजनौर (Pt. Deen Dayal Upadhyay Govt. Hospital, Bijnor) के अनुभवी और प्रशिक्षित स्टाफ के विशेष सहयोग से संपन्न हुआ। मेडिकल टीम ने पूरी सावधानी के साथ रक्तदाताओं की हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) और ब्लड प्रेशर (BP) की गहन जांच करने के बाद ही उनसे रक्त लिया, ताकि डोनर के स्वास्थ्य पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।
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इस सफल आयोजन में सहयोग देने वाली मेडिकल टीम के प्रमुख सदस्य:

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पद / संस्थान
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नाम
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अहम योगदान
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प्रभारी चिकित्सा अधिकारी (राजकीय चिकित्सालय, बिजनौर)
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डॉ. सुमित कुमार राव
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शिविर का सफल नेतृत्व, मेडिकल सुपरविजन और डोनर्स की जांच।
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सहयोगी मेडिकल स्टाफ (राजकीय चिकित्सालय)
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नीरज कुमार, विनोद कुमार, नरेश नरवाल
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सुरक्षित तरीके से रक्त संग्रह और डोनर्स की देखभाल।
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नर्सिंग स्टाफ (राजकीय चिकित्सालय)
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नर्स मुकेश देवी, विमल गहलोत
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साफ-सफाई, आधुनिक उपकरणों का उपयोग और मरीजों की काउंसलिंग।
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सहायक मेडिकल ऑफिसर (धामपुर शुगर मिल)
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कमल सिंह पवार
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मिल डिस्पेंसरी में शिविर की पूरी व्यवस्था और अस्पताल से समन्वय।
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स्टाफ नर्स (धामपुर शुगर मिल)
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कविता रानी
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अपनी ही डिस्पेंसरी में आने वाले डोनर्स की सुविधा और जलपान का ध्यान रखना।
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मिल के मुख्य केमिस्ट विजय कुमार ने भी अपने तकनीकी ज्ञान के साथ मेडिकल टीम का भरपूर सहयोग किया और पूरी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा।
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क्यों जरूरी है रक्तदान? (एक यूनिट रक्त बचा सकता है 3 मासूम जानें)

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धामपुर शुगर मिल में आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य केवल रक्त एकत्रित करना नहीं था, बल्कि लोगों के बीच रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना और जागरूकता (Awareness) फैलाना भी था। अक्सर लोगों के मन में भ्रांति होती है कि रक्तदान करने से शरीर में भारी कमजोरी आ जाती है, लेकिन विज्ञान इसे पूरी तरह से गलत मानता है।
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    रक्त की कमी को दूर करना: बिजनौर जिले के अस्पतालों में अक्सर गर्भवती महिलाओं, थैलेसीमिया (Thalassemia) से पीड़ित छोटे बच्चों, और सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले गंभीर मरीजों के लिए रक्त की भारी कमी हो जाती है। ऐसे में यह 40 यूनिट रक्त कई टूटती हुई सांसों के लिए 'संजीवनी' साबित होगा।
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    स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक: चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, रक्तदान करने से शरीर में नया खून (Red Blood Cells) तेजी से बनता है। इससे खून का गाढ़ापन कम होता है, जिससे हृदय रोग (Heart Attack) और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
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    समाजिक दायित्व का निर्वहन: रक्त एक ऐसी चीज है जिसे किसी भी फैक्ट्री या लैब में नहीं बनाया जा सकता; यह केवल एक इंसान से दूसरे इंसान को ही दिया जा सकता है। धामपुर शुगर मिल के कर्मचारियों ने आज इसी मानवीय दायित्व को पूरी शिद्दत और ईमानदारी से निभाया है।
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पूरे समाज के लिए एक प्रेरणादायक कदम

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धामपुर शुगर मिल (Dhampur Sugar Mill) द्वारा अपने ऐतिहासिक स्थापना दिवस पर उठाया गया यह कदम पूरे बिजनौर जिले के अन्य औद्योगिक संस्थानों, फैक्ट्रियों और आम जनता के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है। यदि जिले के सभी बड़े संस्थान अपने स्थापना दिवस या किसी भी बड़े आयोजन पर इसी प्रकार 'स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों' का आयोजन करने लगें, तो हमारे जिले के ब्लड बैंकों में कभी भी खून की कमी नहीं होगी और समय पर रक्त न मिलने के कारण किसी भी मरीज की जान नहीं जाएगी।
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समाज और स्वास्थ्य विभाग धामपुर शुगर मिल के उपाध्यक्ष आशीष कुमार शर्मा, मुख्य केमिस्ट विजय कुमार गुप्ता, डॉ. सुमित कुमार राव और उन सभी 40 रक्तदाताओं के जज्बे को सलाम करता है जिन्होंने अपना कीमती रक्त देकर इंसानियत की सेवा का एक नया और स्वर्णिम अध्याय लिखा है।
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