Anil Kumar Sharma, Special Correspondent-धामपुर (बिजनौर): किसी भी शहर, राज्य या देश की अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ उसके स्थानीय व्यापारी और दुकानदार होते हैं। सुबह शटर उठाने से लेकर रात को दुकान बढ़ाने तक, एक व्यापारी न केवल अपना घर चलाता है, बल्कि सरकार को भारी-भरकम टैक्स देकर देश के विकास में भी अहम योगदान देता है। लेकिन, जब यही व्यापारी बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा और प्रशासनिक अनदेखी का शिकार होने लगे, तो उसका आक्रोशित होना लाजमी है।READ ALSO:-मेरठ में प्यार, धोखा और खौफनाक कत्ल: गर्लफ्रेंड से मिलने गया था युवक, अटेरना नहर के पास मिली गोलियों से छलनी लाश; साजिश के जाल में उलझी पुलिस
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उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के प्रमुख व्यापारिक केंद्र धामपुर (Dhampur) में कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिला। धामपुर के प्रतिष्ठित होटल बलीना (Hotel Balina) में 'उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल' (पंजीकृत) की जिला बिजनौर इकाई की एक आवश्यक और वृहद बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक ने न केवल व्यापारियों को एक मंच पर ला खड़ा किया, बल्कि स्थानीय प्रशासन के सामने ज्वलंत मुद्दों को भी मजबूती से उठाने का काम किया है।
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भव्य स्वागत और सम्मान: संगठन की ताकत का अहसास

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बैठक की शुरुआत बेहद गरिमापूर्ण और उत्साहवर्धक माहौल में हुई। जैसे ही उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष श्री मुकुंद मिश्रा कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, वहां मौजूद सैकड़ों व्यापारियों ने जोरदार नारों और करतल ध्वनि से उनका स्वागत किया।
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संगठन के जिला अध्यक्ष जितेंद्र गोयल के कुशल संचालन में स्वागत समारोह की शुरुआत हुई। व्यापार मंडल के सभी प्रमुख पदाधिकारियों और सदस्यों ने प्रदेश अध्यक्ष मुकुंद मिश्रा को विशाल फूलमाला पहनाई और सम्मान के प्रतीक स्वरूप 'अंग वस्त्र' भेंट किया। यह भव्य स्वागत केवल एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह इस बात का स्पष्ट संदेश था कि धामपुर का व्यापारी वर्ग अपने नेतृत्व के प्रति पूरी तरह से एकजुट और निष्ठावान है।
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व्यापारियों का दर्द: बदलती परिस्थितियां और ई-कॉमर्स की मार

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सम्मान समारोह के तुरंत बाद बैठक अपने मुख्य और सबसे गंभीर एजेंडे की तरफ मुड़ गई— "व्यापारियों की वर्तमान समस्याएं।" मंच से बोलते हुए कई वक्ताओं ने बाजार की मौजूदा खस्ताहाल स्थिति का मार्मिक खाका खींचा।
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    ग्राहकों की कमी और महंगाई: बैठक में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई कि बढ़ती महंगाई के कारण आम आदमी की 'क्रय शक्ति' (Purchasing Power) कम हो गई है, जिसका सीधा असर बाजारों की रौनक पर पड़ा है।
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    ऑनलाइन शॉपिंग (ई-कॉमर्स) का बढ़ता जाल: स्थानीय खुदरा व्यापारियों (Retailers) ने बताया कि बड़ी-बड़ी ऑनलाइन कंपनियों की आक्रामक छूट और नीतियों के कारण उनका पुश्तैनी व्यापार खतरे में आ गया है। इस चुनौती से निपटने के लिए व्यापारियों को तकनीकी रूप से अपग्रेड होने और सरकार द्वारा स्थानीय व्यापार को संरक्षण देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
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शहर का सबसे बड़ा नासूर: चरमराती यातायात व्यवस्था और अतिक्रमण

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बैठक में सबसे ज्यादा अगर किसी मुद्दे पर व्यापारियों का गुस्सा फूटा, तो वह था धामपुर शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था (Traffic System)।
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व्यापारियों ने खुलकर कहा कि शहर के मुख्य बाजारों और चौराहों पर दिन भर भयंकर जाम लगा रहता है।
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    पार्किंग का अभाव: बाजारों में ग्राहकों के वाहन खड़े करने के लिए कोई सुरक्षित पार्किंग व्यवस्था नहीं है। डर के मारे और जाम के झंझट से बचने के लिए अब आस-पास के देहात का ग्राहक धामपुर के मुख्य बाजार में आने से कतराने लगा है।
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    अतिक्रमण की समस्या: सड़कों पर बेतरतीब तरीके से खड़े ठेले, रिक्शा और अवैध अतिक्रमण ने रास्तों को बेहद संकरा कर दिया है। व्यापारियों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि ट्रैफिक पुलिस की सक्रियता बढ़ाई जाए, वन-वे (One-way) ट्रैफिक के नियम सख्ती से लागू हों और एक सर्वसुविधायुक्त नगर पार्किंग का जल्द से जल्द निर्माण कराया जाए।
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सुरक्षा सबसे अहम: पुलिस गश्त और CCTV की उठी मांग

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व्यापार करने के लिए सबसे पहली शर्त होती है 'भयमुक्त माहौल'। बैठक में उपस्थित व्यापारियों ने अपनी सुरक्षा (Security) के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया।
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    रात के समय जब बाजार बंद हो जाते हैं, तब दुकानों की सुरक्षा एक बड़ी चिंता का विषय बन जाती है।
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    पदाधिकारियों ने मांग की कि व्यापारिक प्रतिष्ठानों और सराफा बाजारों के आसपास रात्रि पुलिस गश्त (Night Patrolling) को और अधिक सघन किया जाए।
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    साथ ही, शहर के सभी प्रमुख एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स सहित चौराहों पर उच्च क्षमता वाले नाइट-विजन सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए जाएं, ताकि आपराधिक तत्वों में पुलिस का खौफ बना रहे और कोई भी अप्रिय घटना होने पर अपराधियों को तुरंत पकड़ा जा सके।
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प्रदेश अध्यक्ष मुकुंद मिश्रा का हुंकार: "सामूहिक प्रयास से झुकेगा सिस्टम"

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सभी स्थानीय व्यापारियों की समस्याओं और पीड़ा को धैर्यपूर्वक सुनने के बाद, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और प्रदेश अध्यक्ष मुकुंद मिश्रा ने मंच संभाला। उनके ओजस्वी भाषण ने वहां मौजूद हर एक व्यापारी में नई ऊर्जा का संचार कर दिया।
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मुकुंद मिश्रा ने कहा, "व्यापारी कभी किसी से भीख नहीं मांगता, वह अपना हक मांगता है। आज हम जिन समस्याओं (ट्रैफिक, सुरक्षा, अतिक्रमण) का सामना कर रहे हैं, उनका समाधान केवल घर बैठने या अपनी दुकान से शिकायत करने से नहीं होगा। इन समस्याओं का समाधान हमारे 'सामूहिक प्रयासों' और चट्टान जैसी 'एकजुटता' से ही हल किया जा सकता है।"
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उन्होंने आगे कहा कि व्यापार मंडल किसी भी व्यापारी का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि स्थानीय स्तर पर प्रशासन इन जायज मांगों की अनदेखी करता है, तो संगठन सड़कों पर उतरने और शासन के उच्च स्तर तक इस लड़ाई को ले जाने से बिल्कुल भी पीछे नहीं हटेगा।
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इन प्रमुख चेहरों की रही शानदार उपस्थिति

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इस महामंथन में व्यापार जगत और राजनीति से जुड़े कई रसूखदार और वरिष्ठ लोगों ने शिरकत की, जिससे इस बैठक का वजन और भी बढ़ गया।
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    प्रदेश उपाध्यक्ष: अरुण वर्मा
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    प्रदेश महामंत्री: मुकेश रस्तोगी
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    वरिष्ठ पदाधिकारी: गुरु शरण मोहन, उदित बंसल, सुरेंद्र सिंह, विपिन गुप्ता
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    विशेष उपस्थिति: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ किसान नेता और जाने-माने व्यापारी राकेश चौधरी ने भी कार्यक्रम में उपस्थित रहकर अपनी एकजुटता दर्ज कराई।
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इनके अलावा धामपुर और आस-पास के क्षेत्रों से सैकड़ों की तादाद में कपड़ा, बर्तन, सराफा, किराना और इलेक्ट्रॉनिक व्यापार से जुड़े व्यापारी मौजूद रहे।
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अब एक्शन का है इंतजार
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कार्यक्रम के अंतिम और समापन अवसर पर जिला अध्यक्ष जितेंद्र गोयल ने एक बार फिर माइक संभाला। उन्होंने इतनी बड़ी संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी अतिथियों, पदाधिकारियों और स्थानीय व्यापारियों का हृदय से आभार (Vote of Thanks) व्यक्त किया।
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धामपुर के होटल बलीना में हुई यह बैठक महज़ एक औपचारिक मिलन समारोह नहीं थी, बल्कि यह प्रशासन के लिए एक 'अलार्म बेल' (Warning Bell) है। व्यापारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब अपनी समस्याओं पर मूकदर्शक बनकर नहीं रहेंगे। अब देखना यह है कि उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की इस 'चेतावनी' और 'मांगों' के बाद स्थानीय जिला और पुलिस प्रशासन कितनी जल्दी एक्शन में आता है और धामपुर के बाजारों को जाम-मुक्त तथा सुरक्षित बनाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
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