बिजनौर: "मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।" उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की एक होनहार बेटी ने इन पंक्तियों को सच कर दिखाया है। शिक्षा के क्षेत्र में अपनी मेधा का परचम लहराने वाली यूपी बोर्ड की टॉपर छात्रा सृष्टि चौहान के लिए वह दिन किसी सुनहरे सपने के सच होने जैसा था, जब उन्हें एक दिन के लिए जिले का जिलाधिकारी (District Magistrate) नियुक्त किया गया।READ ALSO:-आसमान छूती कीमतें और बेहाल आम आदमी: अप्रैल में फिर चला महंगाई का हंटर, खाने-पीने के सामान ने बिगाड़ा घर का बजट, 6 महीनों से लगातार जारी है यह 'आर्थिक मार'
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बिजनौर कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम ने न केवल सृष्टि के आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयां दीं, बल्कि प्रदेश भर की लाखों बेटियों को यह संदेश भी दिया कि अगर वे ठान लें, तो उनके लिए कोई भी मुकाम हासिल करना असंभव नहीं है। आइए, इस पूरे प्रेरणादायक घटनाक्रम और 'मिशन शक्ति' के तहत हुए इस अनूठे आयोजन को विस्तार से समझते हैं।
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1. कैसे मिला सृष्टि चौहान को यह बड़ा सम्मान?

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सृष्टि चौहान कोई आम छात्रा नहीं हैं; उन्होंने अपनी दिन-रात की कड़ी मेहनत और लगन से यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए टॉपर्स की सूची में अपनी जगह बनाई है। उनकी इसी शानदार शैक्षणिक उपलब्धि को सम्मानित करने और उनका मनोबल बढ़ाने के लिए बिजनौर जिला प्रशासन ने उन्हें एक दिन का डीएम बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
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जब सृष्टि बिजनौर कलेक्ट्रेट पहुंचीं, तो वहां का नजारा देखने लायक था। जिले के आला अधिकारियों ने उनका पूरे सम्मान के साथ स्वागत किया। एक आम छात्रा से एक दिन की 'जिलाधिकारी' बनने का यह सफर सृष्टि के साथ-साथ उनके माता-पिता और गुरुजनों के लिए भी अत्यंत गौरव का क्षण था।
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2. "हक की बात जिलाधिकारी के साथ" कार्यक्रम का आयोजन

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सृष्टि के एक दिन के कार्यकाल को सार्थक और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए बिजनौर कलेक्ट्रेट में एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस खास कार्यक्रम का नाम “हक की बात जिलाधिकारी के साथ” रखा गया था।
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इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। जब सृष्टि डीएम की कुर्सी पर बैठीं, तो वहां मौजूद हर शख्स के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान और गर्व का भाव था। इस दौरान:
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    प्रशासनिक कार्यों की ट्रेनिंग: जिले की वर्तमान तेजतर्रार डीएम जसजीत कौर ने खुद सृष्टि को प्रशासनिक कार्यों की कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने बताया कि एक जिलाधिकारी का दिन कैसे शुरू होता है, फाइलें कैसे चेक की जाती हैं और जनता की समस्याओं का त्वरित निस्तारण कैसे किया जाता है।
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    अधिकारियों के साथ बैठक: सृष्टि ने एक दिन की डीएम की हैसियत से जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ संवाद किया और प्रशासन की कार्यशैली को बेहद करीब से महसूस किया।
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3. बालिका सशक्तिकरण और सरकारी योजनाओं पर हुई गंभीर चर्चा

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'हक की बात जिलाधिकारी के साथ' कार्यक्रम केवल एक प्रतीकात्मक सम्मान नहीं था, बल्कि यह एक गंभीर मंथन का मंच भी बना। इस अवसर पर जिले की डीएम जसजीत कौर और डीएमसी (DMC) रविता राठी प्रमुख रूप से मौजूद रहीं।
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कार्यक्रम के दौरान निम्नलिखित अहम बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई:

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    महिला सुरक्षा और सम्मान: अधिकारियों ने सृष्टि और वहां मौजूद अन्य लोगों के साथ महिलाओं की सुरक्षा, उनके सम्मान और आत्मनिर्भरता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की।
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    सरकारी योजनाओं की जानकारी: उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार द्वारा बालिकाओं के उत्थान के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं (जैसे- कन्या सुमंगला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, और निराश्रित महिला पेंशन) पर प्रकाश डाला गया। सृष्टि को बताया गया कि एक जिलाधिकारी के रूप में इन योजनाओं को समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक कैसे पहुंचाया जाता है।
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4. 'मिशन शक्ति' (Mission Shakti): महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

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यह पूरा आयोजन उत्तर प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान 'मिशन शक्ति' के तत्वावधान में किया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य लक्ष्य महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन (आत्मनिर्भरता) सुनिश्चित करना है।
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    क्यों जरूरी हैं ऐसे आयोजन? मिशन शक्ति के तहत बालिकाओं को पुलिस थानों का चार्ज देना या एक दिन का अधिकारी बनाना कोई नई बात नहीं है। प्रशासन का मानना है कि जब एक बेटी प्रशासनिक कुर्सी पर बैठती है, तो उसके अंदर नेतृत्व करने की क्षमता (Leadership Quality) का विकास होता है। वह उस कुर्सी की जिम्मेदारी और ताकत दोनों को समझती है, जो उसे भविष्य में सिविल सेवा (UPSC) या अन्य उच्च प्रशासनिक पदों पर जाने के लिए प्रेरित करती है।
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    सृष्टि चौहान को डीएम बनाने के पीछे भी यही सोच थी कि उनके माध्यम से जिले की अन्य स्कूल जाने वाली बच्चियां प्रेरणा लें और शिक्षा के प्रति और अधिक गंभीर हों।
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5. डीएम जसजीत कौर और डीएमसी रविता राठी की भूमिका

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इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में बिजनौर की जिलाधिकारी जसजीत कौर और डीएमसी रविता राठी की भूमिका बेहद सराहनीय रही। डीएम जसजीत कौर ने एक बड़ी बहन और एक मेंटर (Mentor) की तरह सृष्टि को हर एक प्रशासनिक पहलू से वाकिफ कराया।
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    डीएम जसजीत कौर ने सृष्टि को समझाया कि प्रशासन सिर्फ पावर (ताकत) का नाम नहीं है, बल्कि यह आम जनता के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का दूसरा नाम है। एक अच्छे अधिकारी को हमेशा लोगों की शिकायतें धैर्य से सुननी चाहिए और उनका न्यायपूर्ण समाधान करना चाहिए।
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    डीएमसी रविता राठी ने भी बालिका सशक्तिकरण पर अपने विचार रखे और बताया कि कैसे शिक्षा एक महिला के जीवन में सबसे बड़ा हथियार बन सकती है।
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6. समाज के लिए एक कड़ा और सकारात्मक संदेश

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सृष्टि चौहान का एक दिन का डीएम बनना हमारे समाज के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है। यह उन लोगों के लिए एक करारा जवाब है जो आज भी बेटियों को बेटों से कमतर आंकते हैं। जब एक बेटी पढ़ाई में अव्वल आकर जिले की सर्वोच्च प्रशासनिक कुर्सी तक पहुंच सकती है, तो वह जीवन के किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रह सकती।
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इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी काफी सुर्खियां बटोरी हैं। स्थानीय लोगों और शिक्षाविदों ने जिला प्रशासन के इस कदम की जमकर तारीफ की है। लोगों का कहना है कि ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों में प्रशासनिक सेवाओं के प्रति रुझान बढ़ता है।
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बिजनौर कलेक्ट्रेट में बिताया गया वह एक दिन सृष्टि चौहान के जीवन का सबसे यादगार दिन बन गया है। इस अनुभव ने न केवल उनके हौसले को उड़ान दी है, बल्कि उन्हें भविष्य में एक सशक्त और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा भी दिखाई है। यूपी सरकार का 'मिशन शक्ति' अभियान इसी तरह प्रदेश की बेटियों को उनके 'हक की बात' करने और अपने अधिकारों को पहचानने का मंच प्रदान कर रहा है। उम्मीद है कि सृष्टि की यह सफलता की कहानी कई और बेटियों को उनके सपने सच करने की प्रेरणा देगी।
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