बिजनौर (Bijnor Weather Update): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। जहाँ एक तरफ मई के महीने में आमतौर पर सूरज आग उगलता है और चिलचिलाती धूप से लोग बेहाल रहते हैं, वहीं इस साल मौसम का एक बिल्कुल अलग ही रूप देखने को मिल रहा है। जिले के थाना नूरपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कस्बा व ग्राम गोहावर में अचानक मौसम का मिजाज पूरी तरह से बिगड़ गया। आसमान में काले बादल छा गए और तेज हवाओं के साथ एक भयंकर धूल भरी आंधी ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। इस अचानक आए अंधड़ से न केवल आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, बल्कि स्थानीय विद्युत आपूर्ति भी चरमरा गई है।READ ALSO:-बिजनौर की खौफनाक 'मर्डर मिस्ट्री': धामपुर के अमखेड़ा में गन्ने के खेत से मिला 40 वर्षीय शख्स का शव, परिजनों की चीख-पुकार से दहला गांव, हत्या की गहरी साजिश का शक
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अचानक बिगड़ा मौसम, आसमान में छाए धूल के गुबार

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बुधवार के दिन रोजमर्रा की तरह लोग अपने-अपने कामों में व्यस्त थे। सुबह के समय मौसम सामान्य लग रहा था, लेकिन दोपहर होते-होते अचानक हवाओं की गति तेज होने लगी। देखते ही देखते इन तेज हवाओं ने एक विकराल धूल भरी आंधी का रूप ले लिया। नूरपुर और विशेषकर गोहावर इलाके में धूल का ऐसा गुबार उठा कि दिन के उजाले में ही शाम जैसा अंधेरा छा गया।
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सड़कों पर विजिबिलिटी (दृश्यता) नाममात्र की रह गई, जिसके कारण दुपहिया और चौपहिया वाहन चालकों को अपने वाहन सड़क किनारे रोकने पड़े। बाजार में खरीदारी कर रहे लोग और खेतों में काम कर रहे किसान खुद को आंधी से बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। दुकानों के बाहर रखे टीन-शेड, होर्डिंग्स और छतों पर रखे हल्के सामान तेज हवा के झोंकों में उड़ने लगे, जिससे इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
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चरमराई बिजली व्यवस्था: आंधी के कारण नगर की विद्युत आपूर्ति ठप

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तेज हवाओं और आंधी का सबसे पहला और सबसे बड़ा असर स्थानीय बिजली व्यवस्था पर पड़ा है। गोहावर और नूरपुर नगर के कई हिस्सों में तेज आंधी शुरू होते ही विद्युत आपूर्ति (Power Supply) पूरी तरह से बाधित हो गई। बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा की दृष्टि से और तारों के टूटने या शॉर्ट सर्किट की आशंका को देखते हुए एहतियातन तुरंत बिजली काट दी गई।
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कई जगहों पर पेड़ों की टहनियां टूटकर बिजली की हाईटेंशन और एलटी (LT) लाइनों पर गिरने की सूचना है, जिससे फॉल्ट उत्पन्न हो गए हैं। बिजली न होने के कारण भीषण उमस का तो ज्यादा असर नहीं है, लेकिन रोजमर्रा के काम (जैसे- पानी की मोटर चलाना, इनवर्टर चार्ज करना, और दुकानों में कामकाज) बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। बिजली विभाग के कर्मचारी और लाइनमैन आंधी थमने के बाद लाइनों की पेट्रोलिंग कर रहे हैं ताकि फॉल्ट्स को ढूंढकर जल्द से जल्द विद्युत आपूर्ति बहाल की जा सके। हालांकि, खबर लिखे जाने तक कई इलाकों में बत्ती गुल थी।
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मई का महीना या सावन? गायब हुआ गर्मी का एहसास

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इस पूरी मौसमी घटना का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि इस साल मई का महीना अपने पारंपरिक स्वरूप से बिल्कुल अलग व्यवहार कर रहा है। उत्तर भारत में मई का महीना भीषण लू (Heatwave) और 40-45 डिग्री सेल्सियस तापमान के लिए जाना जाता है। लेकिन इस बार बिजनौर और आसपास के इलाकों में लगातार पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण मौसम का मिजाज ठंडा बना हुआ है।
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लगातार रुक-रुक कर हो रही बारिश, बादलों की आवाजाही और अब इस धूल भरी आंधी के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि "ऐसा लग ही नहीं रहा है कि यह मई का महीना है। पंखे और कूलर तो चल रहे हैं, लेकिन एसी (AC) चलाने की वह नौबत अभी तक नहीं आई है जो अक्सर अप्रैल के अंत तक आ जाती थी।" मौसम के इस बदलते चक्र को कई पर्यावरण विशेषज्ञ ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) का सीधा असर मान रहे हैं।
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किसानों की चिंताएं: आम की फसल को नुकसान की आशंका

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हालांकि इस ठंडे मौसम से आम जनता को चिलचिलाती गर्मी से राहत जरूर मिली है, लेकिन बिजनौर के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। गेंहू की फसल की कटाई और उठान का काम लगभग पूरा हो चुका है, जो एक राहत की बात है। लेकिन यह समय आम की फसल के लिए बेहद नाजुक होता है।
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तेज हवाओं और धूल भरी आंधी के कारण पेड़ों पर लगी कच्ची अंबिया (कैरी) टूटकर भारी मात्रा में जमीन पर गिर गई हैं। नूरपुर और गोहावर क्षेत्र में आम के कई बाग हैं। बागवानों का कहना है कि अगर हवाओं की गति इसी तरह तेज रही और बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई, तो आम की फसल को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा, खेतों में खड़ी गन्ने की छोटी फसल को भी तेज हवाओं से आंशिक नुकसान पहुंचने की संभावना है।
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प्रशासन और मौसम विभाग का अलर्ट

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स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे मौसम में विशेष सावधानी बरतें। जब तक आंधी-तूफान पूरी तरह से शांत न हो जाए, तब तक अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें।
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    सुरक्षा के उपाय: तेज आंधी के दौरान बड़े और पुराने पेड़ों के नीचे या जर्जर इमारतों के पास खड़े होने से बचें।
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    विद्युत लाइनों से दूरी: बिजली के खंभों और टूटे हुए तारों से दूर रहें। अगर कहीं कोई तार टूटा हुआ दिखे, तो तुरंत बिजली विभाग को सूचित करें, उसे खुद छूने का प्रयास न करें।
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    वाहन चालकों के लिए: हाइवे या मुख्य मार्गों पर विजिबिलिटी कम होने पर वाहनों की गति धीमी रखें और हेडलाइट्स/पार्किंग लाइट्स ऑन करके ही सफर करें।
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कब तक सुधरेगा मौसम?

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मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले एक-दो दिनों तक बिजनौर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का यह आंख-मिचौली का खेल जारी रह सकता है। बीच-बीच में तेज हवाएं चलने और हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना बनी हुई है। फिलहाल नूरपुर और गोहावर के लोग आंधी थमने और बिजली की सुचारू रूप से बहाली का इंतजार कर रहे हैं। यह बदलता मौसम जहां एक तरफ गर्मी से राहत दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ अंधड़ और बिजली कटौती के रूप में नई मुश्किलें भी पैदा कर रहा है।
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