अनिल कुमार शर्मा (विशेष संवाददाता) धामपुर, नौरंगाबाद: धामपुर के ग्राम नौरंगाबाद में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव इन दिनों क्षेत्र के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस भक्तिमय आयोजन के दौरान वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध भागवत आचार्य कृष्ण मोहन जी महाराज के श्रीमुख से जब कृष्ण-रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाया गया, तो कथा स्थल का वातावरण भक्ति के दिव्य रंगों से सराबोर हो गया। विवाह के प्रसंग और महाराज जी की ओजस्वी वाणी को सुनकर उपस्थित जनसमूह भाव-विभोर हो उठा।
\r\n\r\nविवाह की भव्यता और बाल कलाकारों की मनोहारी प्रस्तुति
\r\n\r\nकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग को जीवंत करने के लिए कथा के दौरान एक अद्भुत झांकी का प्रदर्शन किया गया। इस मनोहारी झांकी में नन्हे बच्चों ने अपने आकर्षक स्वरूपों से सभी का मन मोह लिया।
\r\n\r\nकृष्ण-रुक्मणी स्वरूप: ईशानी चौहान ने भगवान कृष्ण और पंक्ति चौहान ने रुक्मणी का स्वरूप धारण कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
\r\n\r\nनन्हे ओजस का आकर्षण: लगभग 4 वर्षीय ओजस चौहान की विभिन्न भाव-भंगिमाओं ने श्रद्धालुओं के बीच विशेष चर्चा बटोरी और भक्तों ने उन पर अपनी आस्था प्रकट की।
\r\n\r\nभक्तिपूर्ण वातावरण: इस दौरान श्रद्धालुओं ने 'जय जय श्री राधे' और भगवान कृष्ण के पारंपरिक जयकारों से पूरे कथा स्थल को गुंजायमान कर दिया।
\r\n\r\nआचार्य कृष्ण मोहन जी महाराज के अनमोल प्रवचन
\r\n\r\nकथा के दौरान महाराज जी ने प्रेम, दांपत्य जीवन और आत्मा-परमात्मा के मिलन पर गहन प्रकाश डाला। उनके प्रवचन के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:
\r\n\r\n1. प्रेम की वास्तविक परिभाषा
\r\n\r\nमहाराज जी ने राधा-कृष्ण के प्रेम का उदाहरण देते हुए कहा कि सच्चा प्रेम करने वाला व्यक्ति ही इसकी गरिमा और मर्यादा को समझ सकता है। उन्होंने कहा, "प्रेम की पीड़ा उससे पूछिए जिसने कभी हृदय से प्रेम किया हो।"
\r\n\r\n2. दांपत्य जीवन में सामंजस्य की आवश्यकता
\r\n\r\nमहाराज जी ने वर्तमान पारिवारिक जीवन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पति-पत्नी के बीच आपसी सामंजस्य, विचारों की एकरूपता और एक-दूसरे की भावनाओं को समझने की कला बहुत आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पति-पत्नी के बीच विचारों का तालमेल न हो, तो जीवन में मिठास की जगह खटास पैदा हो जाती है, जो पूरे वैवाहिक जीवन को प्रभावित करती है।
\r\n\r\n3. संसार की नश्वरता और प्रभु से नाता
\r\n\r\nमहाराज जी ने संसार के रिश्तों की क्षणभंगुरता को समझाने के लिए अत्यंत मार्मिक पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं:
\r\n\r\n"पत्नी साथ देती है केवल मकान तक, पड़ोसी साथ देते हैं केवल शमशान तक, और बेटा भी साथ देता है केवल अग्नि दान तक।"
\r\n\r\nउन्होंने आगे जोड़ा, "आँखों पर पर्दे पड़ते ही सब रिश्ते खो जाते हैं, चार दिनों की रीत जगत में चार दिनों के नाते हैं।" उन्होंने उपस्थित जनसमूह को सलाह दी कि इन झूठे रिश्तों के स्थान पर प्रभु से नाता जोड़ना ही श्रेयस्कर है।
\r\n\r\n4. महारास की अलौकिक लीला
\r\n\r\nमहाराज जी ने महारास की चर्चा करते हुए एक रोचक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि जब भगवान भोलेनाथ गोपी का स्वरूप धारण करके महारास में पहुंचे, तो भगवान कृष्ण ने उन्हें तुरंत पहचान लिया। महाराज जी ने चुटकी लेते हुए कहा कि भगवान कृष्ण की बांसुरी के सामने भोले बाबा का डमरू बज उठा, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि घूंघट में कोई गोपी नहीं बल्कि स्वयं भोलेनाथ हैं।
\r\n\r\nआयोजन में यजमानों और सहयोगियों की भूमिका
\r\n\r\nइस सात दिवसीय महोत्सव को भव्य रूप देने में ग्राम नौरंगाबाद और रानी बाग कॉलोनी के श्रद्धालु परिवारों का विशेष योगदान रहा है:
\r\n\r\nमुख्य यजमान: समाजसेवी ठाकुर शूरवीर सिंह एवं उनकी धर्मपत्नी डॉ. सुजाता सिंह ने कथा के शुभारंभ में सामूहिक पूजन कर धर्म कार्यों में अपनी आस्था प्रदर्शित की।
\r\n\r\nसह-यजमान: अरुण कुमार चौहान, अनीता देवी चौहान, तनिष चौहान, तुषार चौहान, रघुराज सिंह चौहान, गीता देवी चौहान और शुभम चौहान ने भी आयोजन में बढ़-चढ़कर भूमिका निभाई।
\r\n\r\nसंरक्षण और निर्देशन: कार्यक्रम का संरक्षण प्रशासक प्रदीप कुमार चौहान एवं मीरा देवी चौहान द्वारा किया गया, जबकि संयोजन में संगीता देवी उर्फ बबली ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
\r\n\r\nवैश्विक योगदान: अमेरिका में रह रहे कुंवर सिद्धार्थ सिंह, वर्षा सिंह और ईरा सिंह का इस आयोजन में भावनात्मक सहयोग रहा है।
\r\n\r\nपूजा प्रक्रिया: सात दिवसीय महोत्सव के दौरान पुरोहित पंडित सचिन कुमार शर्मा ने प्रभावी मंत्रोच्चार के साथ सभी धार्मिक अनुष्ठानों को संपादित कराया।
\r\n\r\nसमापन और प्रसाद वितरण
\r\n\r\nकृष्ण-रुक्मणी विवाह के इस पावन प्रसंग के उपरांत सामूहिक आरती की गई। आरती के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर झूम उठे। कथा के विश्राम पर भक्तों के बीच प्रसाद वितरण किया गया। नौरंगाबाद एवं आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालु नित्य प्रति इस कथा में पहुँचकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।
\r\n\r\nयह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामुदायिक सौहार्द और परिवारिक मूल्यों को मजबूती प्रदान करने का भी एक सशक्त माध्यम बना है।
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