बिजनौर (उत्तर प्रदेश)। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हाल ही में हुई दर्दनाक मौत (शहादत) के बाद उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में शिया समुदाय का शोक और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ताज़ा मामला नगीना देहात के जामा मस्जिद स्थित इमामबाड़े का है, जहां भारी संख्या में अकीदतमंदों ने इकट्ठा होकर अपने सर्वोच्च रहबर को याद किया।READ ALSO:-बिजनौर ग्राउंड रिपोर्ट: अयातुल्लाह अली खामेनेई की शहादत से दहला शिया समुदाय, जोगीपुरा में गूंजे 'अमेरिका-इजरायल मुर्दाबाद' के नारे
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इस दौरान जहां एक तरफ 'फतेहा' (शोक प्रार्थना) का एहतमाम कर उनकी आत्मा की शांति के लिए दुआएं की गईं, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक कूटनीति से नाराज युवाओं ने 'अमेरिका मुर्दाबाद' और 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' के नारे लगाकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। कार्यक्रम के अंत में शिया समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय थाना प्रभारी (SHO) को एक ज्ञापन भी सौंपा।
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मुख्य बिंदु (Key Highlights):

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    स्थान: जामा मस्जिद स्थित इमामबाड़ा, नगीना (बिजनौर)।
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    आयोजन: अयातुल्लाह खामेनेई की शहादत पर 'फतेहा' और मजलिस का एहतमाम।
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    नारेबाजी: अंतरराष्ट्रीय राजनीति को लेकर आक्रोश, 'अमेरिका और पाकिस्तान मुर्दाबाद' की गूंज।
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    प्रशासनिक कदम: शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद थाना प्रभारी को राष्ट्रपति/भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
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1. इमामबाड़े में गमगीन माहौल और 'फतेहा' का एहतमाम

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अयातुल्लाह खामेनेई केवल ईरान के राजनेता नहीं थे, बल्कि वे दुनियाभर के शिया मुसलमानों के बड़े धार्मिक मार्गदर्शक (मर्जा-ए-तकलीद) थे। नगीना की जामा मस्जिद के इमामबाड़े में सुबह से ही काले लिबास में लोगों का आना शुरू हो गया था।
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    उलेमाओं (धर्मगुरुओं) ने उनकी शहादत पर रौज़ा (शोक सभा) पढ़ा, जिसे सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
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    इसके बाद सामूहिक रूप से 'फतेहा' (Quranic prayers for the departed) का एहतमाम किया गया। समुदाय के लोगों ने अल्लाह से दुआ की कि उनके रहबर को जन्नत-उल-फिरदौस में आला मुकाम अता हो और उनके मिशन को आगे बढ़ाने की हिम्मत मिले।
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    बुजुर्गों से लेकर युवाओं और बच्चों तक, सभी के चेहरों पर एक अजीब सी खामोशी और गहरा दुख साफ देखा जा सकता था।
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2. 'अमेरिका और पाकिस्तान मुर्दाबाद' के नारों के मायने

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इस प्रदर्शन में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात नारों का स्वरूप था। इसराइल के साथ-साथ इस बार 'अमेरिका मुर्दाबाद' और 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' के नारे भी जोर-शोर से लगाए गए।
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    अमेरिका का विरोध: अमेरिका का विरोध स्वाभाविक है क्योंकि 28 फरवरी 2026 को हुए जिस हवाई हमले में खामेनेई की जान गई, उसमें अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (CIA) और वायु सेना का सीधा और अहम रोल रहा है।
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    पाकिस्तान का विरोध क्यों?: मध्य पूर्व के इस संघर्ष में शिया समुदाय पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी अक्सर संशय में रहता है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि पाकिस्तान एक इस्लामी देश होने के बावजूद अक्सर अमेरिकी दबाव में काम करता है और उसने ईरान के खिलाफ अमेरिकी नीतियों का खुलकर विरोध नहीं किया है। क्षेत्रीय राजनीति और कुछ पुरानी कूटनीतिक दूरियों के कारण भी यह आक्रोश देखने को मिला।
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3. शांतिपूर्ण मार्च और थाना प्रभारी को ज्ञापन

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शिया समुदाय ने अपने दुख और गुस्से को पूरी तरह से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त किया। इमामबाड़े में शोक सभा के बाद समुदाय के दर्जनों जिम्मेदार लोग नगीना थाने पहुंचे।
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    वहां उन्होंने थाना प्रभारी (Station House Officer) से मुलाकात की और एक लिखित ज्ञापन सौंपा।
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    ज्ञापन की मुख्य मांगें: इस ज्ञापन के जरिए भारत सरकार से अपील की गई है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच (जैसे संयुक्त राष्ट्र) पर इस तरह की 'टारगेटेड किलिंग' और संप्रभु देश पर हुए हमले की कड़ी निंदा करे। साथ ही, मध्य पूर्व में शांति बहाली के लिए भारत अपने कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करे।
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    पुलिस प्रशासन ने भी पूरी संवेदनशीलता दिखाते हुए ज्ञापन स्वीकार किया और इलाके में शांति व सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया।
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4. पुलिस प्रशासन हाई अलर्ट पर

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अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए बिजनौर जिले के आला अधिकारी (SP और DM) लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। नगीना सहित जिले के अन्य शिया बहुल इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है। थाना प्रभारी ने सभी समुदाय के लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।
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नगीना के इमामबाड़े में हुआ यह आयोजन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि अयातुल्लाह अली खामेनेई का निधन केवल एक भौगोलिक घटना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा वैश्विक भूचाल है जिसने भारत के छोटे-छोटे कस्बों तक में रहने वाले लोगों की भावनाओं को झकझोर कर रख दिया है। शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन सौंपकर शिया समुदाय ने अपनी आवाज को संवैधानिक तरीके से हुक्मरानों तक पहुंचाने का काम किया है।
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