भारत की न्यायिक प्रणाली में लंबित मुकदमों का बोझ एक बड़ी चुनौती है। अदालतों में सालों-साल चलने वाले मुकदमों के कारण आम आदमी का समय, पैसा और मानसिक शांति तीनों ही दांव पर लग जाते हैं। इसी समस्या के समाधान और आम जनमानस को त्वरित व सुलभ न्याय प्रदान करने के उद्देश्य से पूरे देश में लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है। इसी कड़ी में, उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में आगामी 12 सितंबर 2026 को 'राष्ट्रीय लोक अदालत' (National Lok Adalat) का एक विशाल आयोजन होने जा रहा है।READ ALSO:-बिजनौर: धामपुर के नहटौर रेलवे फाटक पर खौफनाक हादसा, ट्रेन की चपेट में आने से व्यक्ति के उड़े चीथड़े; इलाके में मची भारी अफरा-तफरी!
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इस महत्वपूर्ण न्यायिक आयोजन के संबंध में सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) बिजनौर ने 06 सितंबर को आधिकारिक जानकारी साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि समाज में आपसी सौहार्द और भाईचारे को फिर से स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम है। जहां सालों की दुश्मनी और कानूनी दांव-पेंच चंद मिनटों की बातचीत और आपसी सहमति से सुलझाए जा सकते हैं।
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किसके निर्देश और मार्गदर्शन में हो रहा है आयोजन?

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बिजनौर में आयोजित होने वाली यह राष्ट्रीय लोक अदालत कोई साधारण अदालत नहीं है, बल्कि इसे राष्ट्रीय और राज्य स्तर के सर्वोच्च विधिक संस्थानों के दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UPSLSA), लखनऊ के सीधे निर्देशों के अनुपालन में किया जा रहा है।
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जनपद स्तर पर इस पूरी प्रक्रिया की कमान माननीय जनपद न्यायाधीश (District Judge) एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिजनौर के हाथों में होगी। उनके कुशल मार्गदर्शन में 12 सितंबर 2026 को प्रातः 10:00 बजे से जनपद न्यायालय (District Court) परिसर बिजनौर के साथ-साथ जिले की सभी तहसीलों और बाह्य स्थित न्यायालयों (Outstation Courts) में लोक अदालत की कार्यवाही विधिवत रूप से शुरू की जाएगी।
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किन मामलों का होगा त्वरित और निःशुल्क निस्तारण?

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राष्ट्रीय लोक अदालत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें लंबी बहस या गवाहियों की आवश्यकता नहीं होती। इसमें दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर न्यायाधीश और मध्यस्थों की उपस्थिति में समझौते पर पहुंचते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव के अनुसार, इस लोक अदालत में 'प्री-लिटिगेशन' (यानी वे मामले जो अभी तक अदालत में दर्ज नहीं हुए हैं) और न्यायालयों में लंबित समझौतायोग्य (Compoundable) वादों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निःशुल्क निस्तारण किया जाएगा।
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इस लोक अदालत में मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकृति के मुकदमों की सुनवाई और उनका निपटारा किया जाएगा:
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    धारा-138 एन.आई. एक्ट (चेक बाउंस मामले): व्यापारिक और व्यक्तिगत लेन-देन में चेक बाउंस होने के मामले अदालतों में बड़ी संख्या में लंबित हैं। लोक अदालत में दोनों पक्ष लेन-देन की राशि पर सहमति बनाकर इन मामलों को खत्म कर सकते हैं।
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    बैंक रिकवरी वाद: बैंकों के ऋण बकायेदारों के लिए यह एक सुनहरा अवसर होता है, जहां बैंक अक्सर ब्याज में छूट (One Time Settlement) देकर मामले को रफा-दफा करते हैं।
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    मोटर दुर्घटना दावा (MACT): सड़क हादसों में घायल या मृतकों के परिजनों को बीमा कंपनियों के माध्यम से त्वरित मुआवजा दिलाने के लिए इन वादों का निस्तारण प्रमुखता से किया जाता है।
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    वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद: पति-पत्नी के बीच के मनमुटाव, भरण-पोषण और अन्य घरेलू विवादों को काउंसलिंग के जरिए सुलझाने का प्रयास किया जाता है, ताकि परिवार टूटने से बच सके।
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    श्रम (लेबर) विवाद: मजदूरों और नियोक्ताओं के बीच वेतन या नौकरी से निकाले जाने के विवादों का भी मौके पर समाधान किया जाएगा।
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    बिजली एवं पानी के बिल: बिजली चोरी या बकाया बिलों से संबंधित वादों में विभाग द्वारा नियमों के तहत छूट प्रदान कर मामले सुलझाए जाते हैं।
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    राजस्व एवं भूमि अधिग्रहण वाद: जमीन की पैमाइश, दाखिल-खारिज और सरकारी भूमि अधिग्रहण के मुआवजे से जुड़े विवाद।
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    सेवा संबंधी प्रकरण: सरकारी या गैर-सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन से संबंधित मामले।
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    अन्य दीवानी एवं आपराधिक शमनीय वाद: मारपीट, गाली-गलौज जैसे छोटे आपराधिक मामले जिनमें कानूनन समझौता किया जा सकता है।
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लोक अदालत के अनगिनत फायदे

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आम जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि नियमित अदालत के बजाय लोक अदालत में अपने मामलों को क्यों ले जाएं? इसके कई ऐसे लाभ हैं जो इसे न्याय की सबसे सुलभ प्रणाली बनाते हैं:
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    पूरी तरह से निःशुल्क: लोक अदालत में मामले के निस्तारण के लिए किसी भी प्रकार का कोई कोर्ट शुल्क (Court Fee) नहीं लगता है।
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    कोर्ट फीस की वापसी: यदि कोई मामला पहले से ही किसी नियमित अदालत में लंबित है और वहां कोर्ट फीस जमा की गई थी, तो लोक अदालत में समझौता होने पर वह कोर्ट फीस नियमानुसार वापस कर दी जाती है।
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    अंतिम और सर्वमान्य फैसला: लोक अदालत द्वारा सुनाया गया फैसला अंतिम (Final) होता है। इसके फैसले के खिलाफ किसी भी ऊपरी अदालत (High Court या Supreme Court) में अपील नहीं की जा सकती है, जिससे मामला हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
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    समय और धन की भारी बचत: वकीलों की भारी-भरकम फीस और तारीख-दर-तारीख अदालत के चक्कर काटने से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है।
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    आपसी सौहार्द की जीत: इसमें कोई पक्ष हारता या जीतता नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों की जीत होती है। इससे विवादित पक्षों के बीच कटुता खत्म होती है और आपसी रिश्ते फिर से मधुर हो जाते हैं।
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अधिकारियों की जनसामान्य से विशेष अपील

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इस महा-आयोजन की सफलता आम जनता की भागीदारी पर निर्भर करती है। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बिजनौर ने जिले के सभी वादकारियों (Litigants), वकीलों, बैंक अधिकारियों, बीमा कंपनियों और पुलिस प्रशासन से विशेष अपील की है। उन्होंने कहा है कि वे अधिक से अधिक संख्या में 12 सितंबर को आयोजित होने वाली इस राष्ट्रीय लोक अदालत में उपस्थित हों।
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उन्होंने जनता से अनुरोध किया है कि अपने छोटे-बड़े विवादों को अहंकार का मुद्दा न बनाएं। सुलह और समझौते का रास्ता अपनाकर अपने मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान कराएं। ऐसा करके नागरिक न केवल अपने समय और धन की बचत कर सकते हैं, बल्कि अनावश्यक न्यायिक प्रक्रिया और मानसिक तनाव से बचते हुए इस जनहितकारी व्यवस्था का भरपूर लाभ उठा सकते हैं। जो भी व्यक्ति अपने मामले को लोक अदालत में लगवाना चाहता है, वह समय रहते संबंधित न्यायालय या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय में संपर्क कर सकता है।
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