बिजनौर/अल्हैपुर (विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट-Nishant Kumar Gaur Special Correspondent):
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स्मार्ट क्लास, डिजिटल इंडिया और स्वच्छ भारत अभियान... ये वो भारी-भरकम नारे हैं जो उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग (Basic Education Department) की फाइलों और विज्ञापनों में तो खूब चमकते हैं, लेकिन बिजनौर जिले के अल्हैपुर ब्लॉक (Block - Allhepur) में स्थित यू.पी.एस. धामपुर हुसैनपुर (U.P.S. Dhampur Husainpur) की चौखट पर आते ही ये सारे दावे औंधे मुंह गिर पड़ते हैं।READ ALSO:-बिजनौर के गोहावर में 'नसीम गिफ्ट सेंटर' का शानदार आगाज: मुफ्ती रियाज की दुआ से हुआ शुभारंभ, उमड़े क्षेत्र के गणमान्य लोग
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इस विद्यालय की हालत इतनी दयनीय और डरावनी हो चुकी है कि मासूम बच्चों का भविष्य और स्वास्थ्य दोनों दांव पर लगे हैं। सिस्टम की घोर लापरवाही और विभागीय अधिकारियों की उदासीनता से तंग आकर, इस विद्यालय की मुख्य अध्यापिका ने बच्चों के भविष्य को बचाने की आखिरी उम्मीद के साथ प्रखण्ड विकास पदाधिकारी (BDO महोदय), अल्हैपुर को एक विस्तृत और मार्मिक पत्र लिखा है।
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16 फरवरी 2026 को लिखे गए इस पत्र में स्कूल की उन 8 भयानक और गंभीर समस्याओं का जिक्र किया गया है, जिन्हें पढ़कर किसी भी जागरूक नागरिक का सिर शर्म से झुक जाएगा।
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बाढ़ का खौफ: जब स्कूल परिसर बन गया था तालाब, भर गया था 5 फीट 6 इंच पानी

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मुख्य अध्यापिका द्वारा BDO को लिखे गए आधिकारिक शिकायती पत्र में जो सबसे हैरान और विचलित करने वाला खुलासा किया गया है, वह स्कूल में होने वाले भीषण जलभराव (Waterlogging) से जुड़ा है।
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पत्र के दूसरे बिंदु में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि विद्यालय परिसर में तत्काल मिट्टी के भराव (Earth Filling) और एक मजबूत मुख्य द्वार (Gate) की सख्त आवश्यकता है।
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कबाड़ हो गया 'डिजिटल इंडिया':

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पत्र में बताया गया है कि पिछले वर्ष बारिश के दिनों में स्कूल परिसर में कई दिनों तक लगातार 5 फुट 6 इंच (यानी एक औसत इंसान के कद से भी ज्यादा) पानी भरा रहा था। जरा कल्पना कीजिए, जिस ज्ञान के मंदिर में इतना पानी भर जाए, वहाँ का शैक्षणिक माहौल कैसा होगा?
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इस खौफनाक जलभराव के कारण स्कूल का बेशकीमती सरकारी सामान, बच्चों के बैठने की मेज-कुर्सियां, अलमारी, जरूरी सरकारी रजिस्टर और 'डिजिटल शिक्षा' के लिए शासन से मिले महंगे 'कम्प्यूटर' पूरी तरह गल कर पानी में तैरते हुए कबाड़ में तब्दील हो गए। हर साल मानसून में यहां बाढ़ जैसे हालात बनते हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग आंखों पर पट्टी बांधे बैठा है।
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दूषित पानी और बदबूदार शौचालय: अभिभावकों का सवाल- 'हम अपने बच्चों को मौत के मुंह में कैसे भेजें?'

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'स्वच्छ भारत अभियान' के तहत हर सरकारी स्कूल में साफ-सुथरा शौचालय और पीने के शुद्ध पानी (Drinking Water) की व्यवस्था होना अनिवार्य है। लेकिन UPS धामपुर हुसैनपुर में स्थिति इसके बिल्कुल उलट और भयावह है।
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    जर्जर रसोईघर (Mid-Day Meal Kitchen): स्कूल की रसोईघर की हालत इतनी खस्ता है कि दीवारों में भारी सीलन है और फर्श के टायल्स उखड़े हुए हैं। सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि रसोई में पानी की कोई व्यवस्था (Water Supply) तक नहीं है। ऐसे अस्वच्छ और बिना पानी वाले माहौल में बच्चों का 'मिड-डे मील' कैसे पकता होगा, यह एक बहुत बड़ा सवालिया निशान है।
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    दूषित पानी से बीमार पड़ रहे बच्चे: अध्यापिका ने पत्र के 7वें बिंदु में स्थानीय अभिभावकों के भारी आक्रोश का जिक्र किया है। स्कूल में पीने का पानी पूरी तरह से अशुद्ध, पीला और दूषित है। इस जहरीले पानी को पीकर मासूम बच्चे आए दिन बीमार पड़ रहे हैं।
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    गायब सफाई कर्मचारी: टॉयलेट और मैदान दोनों जगह गंदगी का अंबार है। टायल्स टूटे पड़े हैं और गांव का सफाई कर्मचारी (Sweeper) महीनों तक स्कूल में झांकने तक नहीं आता।
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अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन को सीधी चेतावनी देते हुए तीखा सवाल किया है कि, "हम अपने बच्चों को ऐसे स्कूल में कैसे भेजें, जहां पीने को साफ पानी तक नहीं है? बिना पानी के बच्चे शौचालय का उपयोग आखिर कैसे करें?"
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जर्जर इमारत और खुले आसमान के नीचे 'मिड-डे मील'

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पत्र में स्कूल की इमारत (Building) की जर्जर स्थिति का जो वर्णन किया गया है, वह किसी भी दिन एक बड़े और दर्दनाक हादसे (Accident) को न्यौता देता प्रतीत होता है।
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स्कूल की दीवारों का प्लास्टर जगह-जगह से झड़ रहा है। छत की हालत इतनी जर्जर है कि उसे तुरंत मरम्मत (Repairing) की आवश्यकता है। बारिश के दिनों में छत टपकती है और कभी भी इसका कोई बड़ा हिस्सा भरभरा कर गिर सकता है, जिससे मासूम बच्चों और शिक्षकों की जान पर बन सकती है।
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इसके अलावा, बच्चों को दोपहर का भोजन (Mid-Day Meal) करने के लिए स्कूल में कोई सुरक्षित और साफ स्थान नहीं है। मुख्य अध्यापिका ने प्रशासन से एक 'टीन शेड' (Tin Shed) की मांग की है, ताकि कड़कड़ाती धूप या बारिश के मौसम में मासूम बच्चे कम से कम सुकून से बैठकर अपना खाना खा सकें।
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सुरक्षा राम भरोसे: स्कूल बना शराबियों का अड्डा, रोज होती हैं चोरियां

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एक तरफ स्कूल में बुनियादी सुविधाओं का अकाल पड़ा है, तो दूसरी तरफ जो थोड़ा बहुत सामान बचा है, उसे इलाके के असामाजिक तत्व और चोर अपना निशाना बना रहे हैं।
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    बाउंड्रीवॉल का अभाव: विद्यालय में सुरक्षा के नाम पर कोई ऊंची चहारदीवारी (Boundary Wall) नहीं है और न ही कंटीले तार (Fencing) लगाए गए हैं।
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    अध्यापिका का छलका दर्द: पत्र के 8वें बिंदु में अध्यापिका का दर्द छलक कर सामने आया है। उन्होंने लिखा है कि बाउंड्रीवॉल न होने के कारण आए दिन अज्ञात व्यक्तियों और नशेड़ियों द्वारा स्कूल की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है। पिछले साल भी अराजक तत्वों ने रात के अंधेरे में स्कूल की खिड़कियां और दरवाजे तोड़ दिए थे।
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    हैरान करने वाली बात यह है कि शिक्षा विभाग ने इसकी सुध नहीं ली, बल्कि मुख्य अध्यापिका ने अपनी जेब से पैसे खर्च करके, या अपने निजी प्रयासों से पिछले वर्ष उन खिड़कियों की मरम्मत करवाई थी। यह साबित करता है कि स्थानीय पुलिस (Local Police) और प्रशासन का कोई खौफ इन असामाजिक तत्वों में नहीं है।
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क्या जागेगा प्रशासन या होगा किसी बड़े हादसे का इंतजार?

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मुख्य अध्यापिका द्वारा लिखा गया यह पत्र सिर्फ एक साधारण आवेदन नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा प्रणाली (UP Basic Education) के दावों के मुंह पर एक करारा तमाचा है। एक शिक्षिका, जिसका मुख्य काम बच्चों का भविष्य संवारना होना चाहिए, वह आज अपनी आधी ऊर्जा स्कूल की टूटी छत, गायब सफाई कर्मचारी, दूषित पानी और चोरों से लड़ने में बर्बाद कर रही है।
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उन्होंने अपने पत्र के अंत में बड़ी ही विनम्रता और मजबूरी के साथ लिखा है, "विनम्र निवेदन है कृपया विद्यालय परिसर में कुछ सुधार करवाने की कृपा करें।"
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अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या अल्हैपुर ब्लॉक के प्रखण्ड विकास पदाधिकारी (BDO) इस दर्द भरे पत्र को गंभीरता से लेंगे? क्या बिजनौर के जिलाधिकारी (DM) और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) इस विद्यालय का तत्काल संज्ञान लेकर 'ऑपरेशन कायाकल्प' के तहत इस स्कूल की दशा सुधारेंगे? या फिर सिस्टम कुंभकर्णी नींद से तब जागेगा जब कोई जर्जर छत किसी मासूम पर गिर पड़ेगी या दूषित पानी पीने से गांव में कोई महामारी फैल जाएगी?
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ग्रामीण क्षेत्र के गरीब बच्चों का भी यह संवैधानिक अधिकार है कि वे एक सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधायुक्त वातावरण में शिक्षा प्राप्त करें। प्रशासन को चाहिए कि वह तुरंत एक जांच टीम यू.पी.एस. धामपुर हुसैनपुर भेजे और युद्ध स्तर पर स्कूल में मिट्टी का भराव, बाउंड्रीवॉल का निर्माण, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था और जर्जर इमारत की मरम्मत का कार्य शुरू करवाए। वरना, 'सब पढ़ें, सब बढ़ें' का नारा बिजनौर के इस स्कूल में सिर्फ एक भद्दा मजाक बनकर रह जाएगा।
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(नोट: यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट विद्यालय की मुख्य अध्यापिका द्वारा 16 फरवरी 2026 को BDO अल्हैपुर को लिखे गए आधिकारिक शिकायती पत्र के सत्यापित तथ्यों पर आधारित है।)
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