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बिजनौर/नूरपुर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor News) में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली एक शर्मनाक घटना सामने आई है। नूरपुर थाना क्षेत्र के गांव गोहावर हल्लू में लकड़ी माफियाओं और स्थानीय जिम्मेदारों की कथित मिलीभगत से एक 100 साल पुराने ऐतिहासिक पिलखन के पेड़ (Pilkhan Tree) की बलि दे दी गई। गुरुवार देर रात मात्र दो घंटे के भीतर इस विशालकाय पेड़ को काटकर गायब कर दिया गया।READ ALSO:-नमो भारत ने रचा इतिहास: परिचालन के दो वर्ष में पूरी की 2 करोड़ कम्यूटर ट्रिप, बना क्षेत्र का पसंदीदा परिवहन साधन
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इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी रोष है। शिकायत मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और पुलिस ने ग्राम प्रधान बरम सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
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प्राथमिक विद्यालय में खड़ा था 100 साल पुराना गवाह

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जानकारी के मुताबिक, यह विशालकाय पिलखन का पेड़ गोहावर हल्लू के प्राथमिक विद्यालय परिसर में खड़ा था। ग्रामीणों का कहना है कि यह पेड़ बिजनौर में 100 साल पुराना पिलखन का पेड़ काटा जाने की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है। यह पेड़ न केवल स्कूल की शोभा था, बल्कि गांव की पहचान भी बन चुका था।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि गुरुवार रात तक पेड़ अपनी जगह पर शान से खड़ा था। लेकिन शुक्रवार की सुबह जब लोग सोकर उठे, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए। पेड़ के 40-40 इंच गोलाई वाले सभी मोटे तने (गुदे) गायब थे। मौके पर सिर्फ मुख्य तना और जड़ का हिस्सा ही बचा था।
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"छांगने" के नाम पर काटा गया पूरा पेड़

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ग्रामीण पतराम सिंह और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि यह सब एक सोची-समझी साजिश के तहत हुआ है। आरोप है कि "पेड़ छांगने" (Pruning) की आड़ में लकड़ी तस्करों ने पूरा पेड़ ही काट डाला।
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हैरानी की बात यह है कि गांव में देर रात तक लोगों का आवागमन रहता है, फिर भी इतना बड़ा पेड़ कटर मशीनों से काट दिया गया और किसी को भनक तक नहीं लगी। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान बरम सिंह, स्कूल प्रबंधन और स्टाफ पर मिलीभगत और लापरवाही का सीधा आरोप लगाया है।
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वन विभाग सख्त: प्रधान से पूछताछ शुरू

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मामला तूल पकड़ते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। वन विभाग के दरोगा मोतीलाल सिंह ने घटनास्थल का मुआयना किया। उन्होंने सख्त लहजे में कहा:
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"मामले की गहनता से जांच की जा रही है। बिना अनुमति के इतना पुराना पेड़ काटना गंभीर अपराध है। ग्राम प्रधान को पूछताछ के लिए पुलिस ने लिया है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई (FIR) की जाएगी।"
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छिन गई गांव की छांव और पक्षियों का घर

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इस घटना ने पर्यावरण प्रेमियों को दुखी कर दिया है। यह पिलखन का पेड़ गर्मियों में राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों के लिए एक प्राकृतिक एसी (AC) का काम करता था। इसकी छांव आधी सड़क को कवर करती थी। साथ ही, इस पेड़ पर सैकड़ों पक्षियों के घोंसले थे, जो रातों-रात बेघर हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि लकड़ी के लालच में गांव की धरोहर को नष्ट कर दिया गया।
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बिजनौर में 100 साल पुराना पिलखन का पेड़ काटा जाने से लोगों में इतना गुस्सा है कि वे अब दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी और भारी जुर्माने की मांग कर रहे हैं।
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गोहावर हल्लू की यह घटना प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे लकड़ी तस्करी के खेल को उजागर करती है। 100 साल पुराने पेड़ को पनपने में एक सदी लग गई, लेकिन उसे नष्ट करने में इंसानों ने सिर्फ 2 घंटे लगाए। अब देखना होगा कि वन विभाग इस मामले में क्या नजीर पेश करता है ताकि भविष्य में कोई पेड़ों पर आरी चलाने की जुर्रत न करे।
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