Anil Kumar Sharma Special Correspondent-धामपुर: भारतीय इतिहास के पन्नों में जब भी शौर्य, पराक्रम, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति असीम प्रेम का जिक्र होता है, तो सबसे पहला नाम मेवाड़ के मुकुटमणि महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) और उनकी पावन कर्मभूमि हल्दीघाटी (Haldighati) का आता है। इसी ऐतिहासिक और गौरवशाली स्मृति को जीवंत करने के लिए उत्तर प्रदेश के धामपुर नगर में एक भव्य और ओजस्वी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।READ ALSO:-मेरठ में शर्मनाक करतूत: ठेले पर 'जामुन' चाटकर बेचते विक्रेता का घिनौना वीडियो वायरल, हिंदू संगठनों ने कहा- 'यह जामुन जिहाद है!'
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अखिल भारतीय क्षत्रिय महासंघ (Akhil Bharatiya Kshatriya Mahasangh), धामपुर इकाई के तत्वावधान में स्थानीय ओम फार्म हाउस में “नमन हल्दीघाटी” नामक इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में न केवल महाराणा प्रताप बल्कि हल्दीघाटी के उस भीषण युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देने वाले तमाम गुमनाम वीर योद्धाओं के अद्वितीय शौर्य, उनके अडिग स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति को स्मरण करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
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विचार गोष्ठी: महाराणा का जीवन है त्याग और संघर्ष का अनुपम उदाहरण

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कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ एक विस्तृत विचार गोष्ठी (Seminar) के साथ हुआ। इस गोष्ठी में उपस्थित प्रबुद्ध वक्ताओं, इतिहासकारों और समाजसेवियों ने महाराणा प्रताप के जीवन दर्शन पर गहराई से प्रकाश डाला।
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वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 1576 में लड़ा गया हल्दीघाटी का युद्ध महज दो सेनाओं के बीच का टकराव नहीं था, बल्कि यह एक साम्राज्यवादी शक्ति (मुगलों) और मातृभूमि की स्वतंत्रता के प्रति एक सच्चे राष्ट्रभक्त के स्वाभिमान के बीच का महासंग्राम था। महाराणा प्रताप का जीवन हमें सिखाता है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों, घास की रोटी खानी पड़े या जंगलों में भटकना पड़े, लेकिन अपने राष्ट्र, धर्म और स्वाभिमान के साथ कभी समझौता नहीं करना चाहिए।
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उन्होंने वर्तमान परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति की ओर आकर्षित हो रही है। ऐसे में यह अत्यंत आवश्यक है कि युवाओं को उनके असली नायकों और गौरवशाली इतिहास से अवगत कराया जाए। युवा पीढ़ी को महाराणा प्रताप के उच्च आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित को हमेशा सर्वोपरि रखने का दृढ़ संकल्प लेना चाहिए।
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हल्दीघाटी को मिले 'राष्ट्रीय तीर्थ' का दर्जा: दीपेंद्र सिंह चौहान

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कार्यक्रम के दौरान सबसे अधिक ध्यान आकृष्ट किया अखिल भारतीय क्षत्रिय महासंघ के अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह चौहान के ओजस्वी और क्रांतिकारी संबोधन ने। उन्होंने अपने विचारों को पूरी बेबाकी और स्पष्टता के साथ रखते हुए कहा कि हल्दीघाटी की लाल मिट्टी केवल इतिहास की किताबों का एक साधारण अध्याय नहीं है; यह संपूर्ण भारतवर्ष के लिए 'राष्ट्र गौरव' और 'अडिग स्वाभिमान' का सबसे पवित्र प्रतीक है।
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अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह चौहान ने सरकार और प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करते हुए एक बड़ी मांग रखी। उन्होंने जोर देकर कहा कि हल्दीघाटी क्षेत्र के संरक्षण, संवर्धन और ऐतिहासिक विकास पर विशेष बल दिया जाना चाहिए। इस वीर भूमि को केवल एक पर्यटन स्थल तक सीमित न रखकर इसे एक 'राष्ट्रीय तीर्थ' (National Pilgrimage) के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां वहां जाकर अपनी मिट्टी के प्रति बलिदान की भावना को महसूस कर सकें।
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अपने संबोधन को एक भावनात्मक और वीर रस के चरम पर ले जाते हुए, दीपेंद्र सिंह चौहान ने हल्दीघाटी पर आधारित अपना स्वरचित और प्रेरणादायक शीर्षक गीत प्रस्तुत किया, जिसने पूरे पंडाल में जोश भर दिया:
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"स्वाभिमान का प्रण था, हल्दीघाटी का रण था, भाला और तलवार चला, मुगलों की गर्दन काटी है, गवाह इसी बात की, पावन हल्दीघाटी है।"
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इस कविता के पाठ के दौरान उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारों के साथ अपनी सहमति और उत्साह व्यक्त किया।
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कवि सम्मेलन: वीर रस की कविताओं ने रगों में भरा जोश

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विचार गोष्ठी के वैचारिक मंथन के पश्चात, कार्यक्रम का अगला चरण एक शानदार कवि सम्मेलन (Kavi Sammelan) के रूप में सामने आया। इस मंच पर क्षेत्र के प्रख्यात और सम्मानित कवियों ने अपनी लेखनी के माध्यम से वीरों की गाथाओं को शब्दों में पिरोकर प्रस्तुत किया।
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वीर रस और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत काव्य पाठ ने वहां मौजूद हर एक श्रोता की रगों में ऊर्जा और उत्साह का नया संचार कर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो हल्दीघाटी का वह ऐतिहासिक परिदृश्य ओम फार्म हाउस के प्रांगण में ही जीवंत हो उठा हो।
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कवि सम्मेलन में मुख्य रूप से इन रचनाकारों ने किया काव्य पाठ:

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    डॉ. अनिल शर्मा ‘अनिल’
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    डॉ. भूपेंद्र ‘अनाड़ी’
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    अशोक कुमार
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    नरेंद्र जीत ‘अनाम’
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    डॉ. एस.एस. राजपूत
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    राजकुमार सिंह
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इन सभी कवियों ने चेतक की स्वामिभक्ति, महाराणा के भारी भाले, और राजपूती तलवारों की धार का ऐसा सजीव चित्रण किया कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए और पूरा वातावरण वीर रस से सराबोर हो गया।
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प्रतिमा पर पुष्पांजलि और गगनभेदी जयघोष

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कार्यक्रम के अंतिम और सबसे भावुक चरण में सभी पदाधिकारी, अतिथि और प्रतिभागी पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ महाराणा प्रताप की विशाल प्रतिमा स्थल पर पहुंचे। वहां वैदिक मंत्रोच्चारण और शंखनाद के बीच प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन किया गया।
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उपस्थित जनसमूह ने कतारबद्ध होकर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके उपरांत सभी ने पूर्ण श्रद्धाभाव से प्रतिमा की परिक्रमा की। इस दौरान पूरा आसमान गगनभेदी नारों से गूंज उठा। हर तरफ से "महाराणा प्रताप अमर रहें", "हल्दीघाटी अमर रहे" और "जय राजपूताना" के जयघोष सुनाई दे रहे थे। इन नारों की गूंज ने स्पष्ट कर दिया कि सदियां बीत जाने के बाद भी महापुरुषों का बलिदान जनमानस के हृदयों में उसी तरह प्रज्वलित है।
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कार्यक्रम में इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

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इस भव्य, ऐतिहासिक और सफल आयोजन में शहर और समाज के कई गणमान्य नागरिक, प्रबुद्ध वर्ग, युवा साथी और महासंघ के पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में ऐसे आयोजनों को निरंतर करते रहने का संकल्प लिया।
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प्रमुख उपस्थित महानुभावों की सूची:

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    डॉ. एन.पी. सिंह, डॉ. आर.के. चौहान, टीकम सिंह फौजी
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    महामंत्री धनंजय सिंह, कार्यक्रम संयोजक डॉ. रवेंद्र सिंह
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    अरविंद वत्स, मनोज कुमार, ठाकुर रविकांत, डॉ. राममूर्ति सिंह
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    अरविंद कुमार, नीरज कुमार एडवोकेट, डॉ. एम.एस. राजपूत
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    डॉ. अशोक कुमार, डॉ. अभिमन्यु कुमार, डॉ. महेश कुमार, डॉ. शिखा सिंह
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    अभिनव प्रताप सिंह, विजयपाल सिंह, शोभा रानी, महावीर सिंह, अजय पाल सिंह
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    डॉ. नागेंद्र शेखावत, प्रीतम सिंह, जयवीर सिंह एडवोकेट, अनिल कुमार सिंह
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    कुंवर आशीष राजपूत, कुंवर अनिल राजपूत, डॉ. ए.के. सक्सेना
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    अवनी कुमार, श्याम सिंह चौहान, क्षेत्रपाल सिंह, अनिल गहलोत
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    दिनेश चंद्र अग्रवाल नवीन, रोमियो मयूर, जयपाल सिंह
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    श्रीमती रेखा सिंह एवं श्रीमती मोनिका चौहान
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इनके अलावा भी बड़ी संख्या में मातृशक्ति और युवा वर्ग ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर इसे एक ऐतिहासिक और अविस्मरणीय आयोजन बना दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और सभी अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापन के साथ किया गया।
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