Anil Kumar Sharma, Special Correspondent, Dhampur-उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर शहर में मुहर्रम के मुक़द्दस मौके पर अकीदत और एहतराम का अनूठा नज़ारा देखने को मिला। बड़ी मंडी स्थित सय्यद नमक शाह बाबा की दरगाह पर एक विशेष रूहानी महफ़िल सजी।READ ALSO:-धामपुर: दमयंती देवी प्रेरणा संस्थान ने आयोजित किया 219वां निशुल्क चिकित्सा शिविर, 65 मरीजों को मिली मुफ्त स्वास्थ्य सेवा
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इस ख़ास अवसर पर नातख़्वानी, फ़ातिहाख़्वानी और हुसैनी लंगर का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन स्थानीय लोगों की गहरी आस्था का केंद्र रहा, जहाँ सभी ने मिलकर कर्बला के शहीदों को याद किया।
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सय्यद नमक शाह बाबा की दरगाह पर सजा रूहानी समां

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हर साल की तरह इस वर्ष भी धामपुर की बड़ी मंडी में स्थित इस प्रसिद्ध दरगाह पर मुहर्रम बहुत ही शांति और अकीदत के साथ मनाया गया। सय्यद नमक शाह बाबा की दरगाह पर आयोजित कार्यक्रमों में शहर के कोने-कोने से अकीदतमंद पहुंचे।
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यहाँ दरगाह के प्रांगण में विशेष सजावट की गई थी। मुहर्रम का महीना हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 साथियों की शहादत की याद दिलाता है। इसलिए पूरे आयोजन में सादगी और इबादत का खास माहौल बना रहा।
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9वीं मुहर्रम की रात: नातख़्वानों ने पेश किए ईमान अफ़रोज़ कलाम

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कार्यक्रम की शुरुआत 9वीं मुहर्रम की रात को नातख़्वानी महफ़िल से हुई। इस रूहानी महफ़िल में कई मशहूर नातख़्वानों और शायरों ने बड़ी अकीदत के साथ शिरकत की।
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इनमें मुख्य रूप से हबीब हसन सकलैनी, ऐजाज़ धमपुरी, हाशिम कुरैशी, नईम जज़्बी और मोहम्मद शालू शामिल थे। इन सभी ने हज़रत इमाम हसन (अ.स.), हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शहीदाने कर्बला की शान में अपने बेहतरीन और ईमान अफ़रोज़ कलाम पेश किए।
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महफ़िल में मौजूद अकीदतमंदों ने जब कर्बला के दर्दनाक वाक़िए को सुना, तो उनकी आँखें अश्कबार हो गईं। पूरे माहौल में इश्क़-ए-अहलेबैत की खुशबू बिखर गई और हर कोई इमाम हुसैन की याद में डूब गया।
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यौमे आशूरा पर फ़ातिहाख़्वानी और विशाल हुसैनी लंगर

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अगले दिन, यानी यौमे आशूरा (10वीं मुहर्रम) की सुबह सय्यद नमक शाह बाबा की दरगाह पर विशेष फ़ातिहाख़्वानी का आयोजन किया गया। इसके तुरंत बाद एक विशाल हुसैनी लंगर बरता गया।
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इस लंगर में सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोगों और अकीदतमंदों ने शिरकत की। सभी ने मिलकर लंगर ग्रहण किया और हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की अज़ीम कुर्बानी को अपनी सच्ची ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश की।
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लंगर बना समानता का प्रतीक

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लंगर का आयोजन बहुत ही व्यवस्थित और अनुशासित तरीके से किया गया था। इसमें अमीर और गरीब का कोई भेद नहीं रखा गया था। एक ही सफ में बैठकर सभी ने लंगर खाया, जो इंसानियत और समानता का एक बहुत बड़ा संदेश देता है।
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कर्बला का पैग़ाम: सब्र, इंसाफ़ और हक़ की जीत

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मुहर्रम का यह आयोजन केवल एक शोक मनाने का दिन नहीं है, बल्कि यह दुनिया को एक शाश्वत संदेश भी देता है। दरगाह के सज्जादा नशीन और अन्य वक्ताओं ने कर्बला के इस अहम पैग़ाम पर रौशनी डाली।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्बला सिर्फ़ इतिहास का एक वाक़िआ नहीं है। यह जीवन में सब्र, इंसाफ़, इंसानियत और हक़ के रास्ते पर हमेशा डटे रहने का एक ज़िंदा रहने वाला पैग़ाम है।
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हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) ने अपनी शहादत देकर यह सिखाया है कि चाहे सामने कितना भी बड़ा जुल्म या ताकत हो, इंसान को कभी भी सच्चाई का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए। यह शिक्षा आज के आधुनिक समय में भी पूरी तरह से प्रासंगिक और जरूरी है।
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दरगाह पर गणमान्य लोगों की प्रमुख शिरकत

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इस मुक़द्दस और रूहानी अवसर पर शहर के कई प्रमुख लोगों, समाजसेवियों और दरगाह के जिम्मेदारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस धार्मिक कार्यक्रम को सफल बनाने में इन सभी लोगों का अहम योगदान रहा।
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सय्यद नमक शाह बाबा की दरगाह के सज्जादा नशीन मोहम्मद आबिद सक़लैनी की देखरेख में सभी कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुए। उनके अलावा हाजी ज़ाकिर सलमानी, इश्तियाक सैफ़ी, और मालिक रज़ा सक़लैनी भी वहां मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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इनके साथ ही, अहमद रज़ा सक़लैनी, सोनू सलमानी, हैदर अली सक़लैनी, शान सलमानी, अदनान सलमानी, उमैर अली और जावेद शमसी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने अपनी अकीदत का इज़हार किया।
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निष्कर्ष के तौर पर, धामपुर की सय्यद नमक शाह बाबा की दरगाह पर मुहर्रम का यह आयोजन शांति, सौहार्द और इंसानियत की एक बेहतरीन मिसाल बनकर सामने आया। नातख़्वानी की महफ़िल से लेकर हुसैनी लंगर तक, हर कार्यक्रम में हज़रत इमाम हुसैन की शहादत और उनके पैग़ाम को पूरी शिद्दत के साथ याद किया गया।
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