Anil Kumar Sharma, Special Correspondent, Dhampur (Bijnor)-धामपुर (ग्राउंड रिपोर्ट): मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले, अदम्य साहस और स्वाभिमान के प्रतीक, हिंदू हृदय सम्राट एवं अमर बलिदानी वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती धामपुर में अत्यंत भव्यता और उल्लास के साथ मनाई गई। हरिद्वार-काशीपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित राजपूताना रिजॉर्ट में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में न केवल क्षत्रिय समाज बल्कि सर्वसमाज के लोगों ने भारी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराकर राष्ट्रनायक को अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।READ ALSO:-खाकी पर गिरी गाज: बिजनौर SP अभिषेक झा का 'ऑपरेशन क्लीन', 3 दरोगा सहित 6 पुलिसकर्मी एक ही झटके में सस्पेंड!
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इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन, ओजस्वी वक्ताओं के विचार, एक विशाल एवं मनमोहक शोभायात्रा और जनसेवा के कार्यों ने पूरे धामपुर नगर के वातावरण को देशभक्ति और 'जय राजपूताना' के नारों से गुंजायमान कर दिया।
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वैदिक हवन और शंखनाद से हुई कार्यक्रम की मंगल शुरुआत

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कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह राजपूताना रिजॉर्ट में पूर्ण हिंदू रीति-रिवाजों और सनातन परंपराओं के अनुसार किया गया। पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ एक भव्य हवन का आयोजन हुआ, जिसमें उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों और समाज के प्रमुख लोगों ने आहुति डालकर राष्ट्र की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। हवन की पवित्र अग्नि और शंखनाद ने पूरे आयोजन स्थल को एक अलौकिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
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मुख्य अतिथि डॉ. इंद्रदेव सिंह का ओजस्वी उद्बोधन

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इस ऐतिहासिक और भव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में विश्व हिंदू महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष तथा अफजलगढ़ के पूर्व विधायक डॉ. इंद्रदेव सिंह ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। मंच से उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए डॉ. इंद्रदेव सिंह ने महाराणा प्रताप के जीवन चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डाला।
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उन्होंने अपने ओजस्वी भाषण में कहा, "महाराणा प्रताप केवल एक ऐतिहासिक योद्धा नहीं थे, बल्कि वे भारतीय स्वाभिमान, स्वतंत्रता और सनातन धर्म के रक्षक की एक जीवंत संस्था थे। जब पूरे भारतवर्ष में मुगलों की सत्ता का खौफ था, तब मेवाड़ के उस अकेले शेर ने घास की रोटी खाना स्वीकार किया, जंगलों में भटकना स्वीकार किया, लेकिन अपनी मातृभूमि और अपने धर्म का सौदा कभी नहीं किया।"
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डॉ. सिंह ने युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी को पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण को छोड़कर महाराणा प्रताप के त्याग, शौर्य और राष्ट्रभक्ति के आदर्शों को अपने जीवन में उतारना चाहिए। अन्य वक्ताओं ने भी अपने-अपने विचार रखे और समाज को एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प दिलाया।
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धामपुर की सड़कों पर उमड़ा केसरिया सैलाब: भव्य शोभायात्रा का वर्णन

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रिजॉर्ट में आयोजित विचार गोष्ठी और सम्मान समारोह के पश्चात् क्षत्रिय समाज के नेतृत्व में एक अत्यंत भव्य और विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया गया। यह शोभायात्रा अपने आप में एक ऐतिहासिक दृश्य प्रस्तुत कर रही थी।
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शोभायात्रा में दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर महाराणा प्रताप के जीवन और उनके प्रिय अश्व 'चेतक' को दर्शाती हुई मनमोहक झांकियां सजाई गई थीं। हजारों की संख्या में युवा, बुजुर्ग और बच्चे अपने हाथों में केसरिया ध्वज लिए, डीजे की देशभक्ति धुनों और ढोल-नगाड़ों की थाप पर कदमताल करते हुए चल रहे थे। "महाराणा प्रताप अमर रहें" और "जय भवानी, जय राजपूताना" के गगनभेदी नारों से धामपुर नगर की सड़कें गूंज उठीं।
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यह विशाल शोभायात्रा राजपूताना रिजॉर्ट से शुरू होकर नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए गुजरी। मार्ग में जगह-जगह नगरवासियों ने अपने घरों की छतों और बालकनियों से शोभायात्रा पर पुष्पवर्षा की और झांकियों का स्वागत किया। अपार जनसमूह के कारण धामपुर की सड़कें केसरिया रंग में रंगी हुई प्रतीत हो रही थीं।
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आरएसएम इंटर कॉलेज तिराहे पर भावपूर्ण माल्यार्पण

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उत्साह और उमंग से लबरेज यह शोभायात्रा जब धामपुर के प्रमुख आरएसएम (RSM) इंटर कॉलेज के तिराहे पर पहुंची, तो वहां का माहौल अत्यंत भावुक और ऊर्जावान हो गया। आरएसएम इंटर कॉलेज के तिराहे पर स्थित महाराणा प्रताप की आदमकद और भव्य प्रतिमा पर पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ माल्यार्पण किया गया।
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उपस्थित सभी अतिथियों, क्षत्रिय समाज के पदाधिकारियों और युवाओं ने प्रतिमा के समक्ष शीश नवाकर उस महान आत्मा को नमन किया जिसने कभी विदेशी आक्रांताओं के आगे घुटने नहीं टेके। इस दौरान युवाओं का उत्साह चरम पर था और हवा में तलवारें व पताकाएं लहराकर वीर रस का अद्भुत प्रदर्शन किया गया।
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क्षत्रिय सभा द्वारा जनसेवा शिविर का आयोजन और पुष्पांजलि

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महाराणा प्रताप का जीवन केवल युद्ध और शौर्य तक सीमित नहीं था, बल्कि प्रजा की सेवा और उनका कल्याण भी उनके शासन का मुख्य अंग था। इसी जनसेवा के भाव को चरितार्थ करते हुए धामपुर के महाराणा प्रताप चौक पर क्षत्रिय सभा के तत्वावधान में एक विशाल सेवा शिविर (छबील) का आयोजन किया गया।
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भीषण गर्मी को देखते हुए इस शिविर के माध्यम से राहगीरों, शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं और आम जनता को शीतल जल और शरबत का वितरण किया गया। इस पुनीत सेवा कार्य में क्षत्रिय सभा के पदाधिकारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सेवा कार्य के साथ-साथ इन सभी गणमान्य व्यक्तियों ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।
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इस सेवा शिविर के सफल आयोजन और संचालन में निम्नलिखित पदाधिकारियों की प्रमुख भूमिका रही:
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    दीपेंद्र सिंह चौहान (अध्यक्ष, क्षत्रिय सभा)
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    धनंजय सिंह (महामंत्री)
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    नागेंद्र सिंह (कोषाध्यक्ष)
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    डॉ. रविंद्र सिंह (संयोजक)
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    डॉ. एस. राजपूत (वरिष्ठ सदस्य)
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    डॉ. अशोक कुमार (वरिष्ठ सदस्य)
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इन सभी पदाधिकारियों ने अपने हाथों से लोगों को जलपान कराया और समाज को यह संदेश दिया कि सच्चा क्षत्रिय वही है जो समाज के हर वर्ग की रक्षा और सेवा के लिए सदैव तत्पर रहे।
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आज के युग में महाराणा प्रताप की प्रासंगिकता 

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धामपुर में आयोजित यह 486वीं जयंती समारोह केवल एक वार्षिक आयोजन भर नहीं था, बल्कि यह समाज के लिए एक वैचारिक पुनर्जागरण का दिन था। हल्दीघाटी के युद्ध में जिस अदम्य साहस का परिचय महाराणा प्रताप ने दिया था, वह आज भी हर भारतीय की धमनियों में रक्त बनकर दौड़ता है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि व्यक्ति के भीतर अपने संकल्प के प्रति दृढ़ता है, तो दुनिया की कोई भी ताकत उसे परास्त नहीं कर सकती।
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राजपूताना रिजॉर्ट से लेकर आरएसएम इंटर कॉलेज तिराहे तक निकली यह शोभायात्रा और सेवा शिविर इस बात का प्रमाण है कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। कार्यक्रम का समापन शांतिपूर्ण ढंग से हुआ, लेकिन यह अपने पीछे राष्ट्रप्रेम, धर्म रक्षा और सामाजिक एकजुटता की एक अमिट छाप छोड़ गया। प्रशासन द्वारा भी इस पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए थे, जिससे पूरा कार्यक्रम निर्विघ्न संपन्न हुआ।
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