बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में इंसान और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन जिले के किसी न किसी हिस्से से तेंदुए (गुलदार) के हमले या उसकी दस्तक की खौफनाक खबरें सामने आ रही हैं। ताजा और सनसनीखेज मामला बिजनौर की चांदपुर वन रेंज से सामने आया है, जहां एक तेंदुए ने आबादी वाले इलाके में घुसकर एक पालतू जर्मन शेफर्ड (German Shepherd) कुत्ते को अपना निवाला बना लिया।READ ALSO:-बिजनौर में खौफ का अंत: शिवाला कलां में पिंजरे में कैद हुआ खूंखार गुलदार, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
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इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है, क्योंकि जिस कुत्ते को तेंदुए ने अपना शिकार बनाया, वह कोई आवारा कुत्ता नहीं था, बल्कि एक मजबूत कद-काठी का पालतू जर्मन शेफर्ड था, जिसे तेंदुआ सीधे किसान के घर के आंगन से उठाकर जंगल की ओर ले गया। इस दुस्साहसिक घटना के बाद ग्रामीण खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं और उन्होंने वन विभाग से तत्काल पिंजरा लगाकर इस आदमखोर प्रवृत्ति के तेंदुए को पकड़ने की गुहार लगाई है।
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कैसे घटी यह खौफनाक वारदात?
\r\n\r\nप्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना बिजनौर जिले के चांदपुर वन रेंज (Chandpur Forest Range) के अंतर्गत आने वाले गांव रुस्तमपुर चक की है। गांव के रहने वाले प्रमुख किसान शूरवीर सिंह सिरोही का घर जंगल और खेतों के काफी समीप स्थित है। शूरवीर सिंह ने अपने घर की रखवाली और शौक के लिए एक जर्मन शेफर्ड नस्ल की मादा कुत्ता पाली हुई थी।
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किसान शूरवीर सिंह ने बताया कि उनकी पालतू जर्मन शेफर्ड हमेशा घर के आंगन में ही रहती थी और रात के समय भी वह आंगन में ही सो रही थी। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन शुक्रवार तड़के (सुबह करीब चार बजे) अचानक वह कुतिया रहस्यमय तरीके से घर के आंगन से लापता हो गई।
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जब सुबह परिवार के लोग उठे और उन्होंने कुत्ते को अपनी जगह पर नहीं पाया, तो उन्हें अनहोनी की आशंका हुई। परिवार वालों ने तुरंत घर के आस-पास, पड़ोस और गांव के बाहरी इलाकों में उसकी काफी तलाश की, लेकिन शुक्रवार को पूरे दिन उसका कहीं कोई सुराग नहीं मिला।
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शनिवार की सुबह चारे के खेत में मिला क्षत-विक्षत शव
\r\n\r\nलापता कुत्ते की तलाश का दुखद अंत शनिवार की सुबह हुआ। किसान शूरवीर सिंह सिरोही जब अपने रोजमर्रा के कृषि कार्यों के लिए गांव के बाहरी छोर पर स्थित अपने चारे के खेत में पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
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चारे के खेत के बीचों-बीच उनकी प्यारी पालतू जर्मन शेफर्ड का शव बेहद क्षत-विक्षत (Mutilated) हालत में पड़ा हुआ था। कुत्ते के शरीर पर गहरे घाव और दांतों के निशान थे, जो स्पष्ट रूप से किसी खूंखार जंगली जानवर, विशेषकर तेंदुए (Guldar) के हमले की गवाही दे रहे थे।
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शव की हालत देखकर यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता था कि शुक्रवार तड़के जब पूरा परिवार गहरी नींद में सो रहा था, तब दबे पांव आए एक खूंखार तेंदुए ने आंगन में सो रही जर्मन शेफर्ड पर अचानक और जानलेवा हमला किया। कुत्ते को संभलने का या भौंकने का मौका भी नहीं मिला होगा और तेंदुआ उसे जबड़े में दबाकर सीधे गन्ने और चारे के खेतों की तरफ खींच ले गया, जहां उसने उसे अपना निवाला बना लिया।
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मजबूत नस्ल के कुत्ते का शिकार बनने से ग्रामीणों में भारी खौफ
\r\n\r\nइस घटना के बाद रुस्तमपुर चक और आस-पास के आधा दर्जन से अधिक गांवों में भारी खौफ और दहशत का माहौल पैदा हो गया है। ग्रामीणों की चिंता का सबसे बड़ा कारण यह है कि जर्मन शेफर्ड कुत्तों की एक बेहद मजबूत, सतर्क और आक्रामक नस्ल मानी जाती है। यदि एक तेंदुआ इतने मजबूत और बड़े कुत्ते को बिना किसी शोर-शराबे के घर के अंदर से उठा सकता है, तो छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग उसके सामने कितने असुरक्षित हैं, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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ग्रामीणों का कहना है कि:
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- \r\n आबादी में दस्तक: तेंदुआ अब केवल जंगलों या खेतों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वह बेखौफ होकर इंसानी आबादी (Human Settlements) के बीच घुसपैठ कर रहा है, जो एक बहुत बड़े खतरे की घंटी है।\r\n \r\n
- \r\n कर्फ्यू जैसा सन्नाटा: शाम ढलते ही पूरे गांव में अघोषित कर्फ्यू जैसा सन्नाटा पसर जाता है। लोग अपने बच्चों को घरों से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं और खुद भी खेतों में जाने से कतरा रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n किसानी पर असर: वर्तमान में खेतों में कई तरह के कृषि कार्य चल रहे हैं, लेकिन तेंदुए की इस मौजूदगी के कारण किसानों ने अकेले खेतों की तरफ जाना बंद कर दिया है, जिससे किसानी का काम भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।\r\n \r\n
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वन विभाग से तत्काल पिंजरा लगाने की पुरजोर मांग
\r\n\r\nअपने पालतू कुत्ते को खोने के दुख और भविष्य की बड़ी अनहोनी की आशंका को देखते हुए किसान शूरवीर सिंह और गांव के अन्य गणमान्य लोगों ने तुरंत इस घटना की सूचना स्थानीय वन विभाग (Forest Department) को दी।
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ग्रामीणों ने वन विभाग के आला अधिकारियों से मांग की है कि:
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- \r\n पिंजरा लगाया जाए: गांव के आस-पास और चारे के खेतों के नजदीक तत्काल प्रभाव से लोहे का पिंजरा (Cage) लगाया जाए ताकि इस आदमखोर होते तेंदुए को जल्द से जल्द कैद किया जा सके।\r\n \r\n
- \r\n गश्त बढ़ाई जाए: शाम और रात के समय वन विभाग की टीम और पीआरवी (PRV) पुलिस द्वारा क्षेत्र में सघन गश्त (Patrolling) की जाए ताकि जंगली जानवरों को आबादी की तरफ आने से रोका जा सके।\r\n \r\n
- \r\n ड्रोन से निगरानी: गन्ने और चारे के बड़े खेतों में ड्रोन कैमरों (Drone Cameras) की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया जाए, ताकि तेंदुए की सटीक लोकेशन का पता लगाया जा सके।\r\n \r\n
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क्या बोले वन विभाग के अधिकारी? (रेंजर का बयान)
\r\n\r\nघटना की संवेदनशीलता को देखते हुए वन विभाग भी तुरंत हरकत में आ गया है। चांदपुर वन रेंज के रेंजर (Forest Ranger) दुष्यंत सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि, "किसान शूरवीर सिंह सिरोही के माध्यम से पालतू कुत्ते के मारे जाने की सूचना विभाग को प्राप्त हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए और त्वरित जांच के लिए वन विभाग की एक विशेष टीम को तुरंत घटनास्थल (रुस्तमपुर चक गांव) के लिए रवाना कर दिया गया है।"
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रेंजर दुष्यंत सिंह ने आगे स्पष्ट किया कि टीम घटनास्थल और उस चारे के खेत का बारीकी से निरीक्षण कर रही है जहां कुत्ते का शव मिला है। टीम वहां जंगली जानवर के पगचिह्नों (Pugmarks) की तलाश कर रही है ताकि यह शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जा सके कि यह हमला तेंदुए का ही है या किसी अन्य हिंसक जानवर (जैसे लकड़बग्घा या जंगली कुत्ते) का।
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उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर तुरंत आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यदि पगचिह्न तेंदुए के पाए जाते हैं, तो उच्चाधिकारियों से अनुमति लेकर गांव में पिंजरा लगाने की कवायद जल्द ही शुरू कर दी जाएगी। फिलहाल, वन विभाग ने सभी ग्रामीणों से अपील की है कि वे सतर्कता बरतें, रात के समय अकेले घरों से बाहर न निकलें और खेतों में जाते समय समूह में जाएं तथा शोर मचाते हुए चलें। बिजनौर में लगातार बढ़ रहे ये मामले एक बार फिर साबित कर रहे हैं कि जंगलों के सिकुड़ने का खामियाजा अब इंसानों और उनके पालतू जानवरों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
Sabse pehle comment karne wale banein.