Anil Kumar Sharma (Special Correspondent) Khabareelal Media-धामपुर: वैवाहिक और पारिवारिक रिश्तों में आने वाली कड़वाहट, गलतफहमियों और विवादों को अदालती मुकदमों में बदलने से पहले आपसी संवाद से सुलझाने के उद्देश्य से आज एक महत्वपूर्ण पहल की गई। माननीय राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के माह मई के एक्शन प्लान के तहत निर्धारित प्राथमिकताओं और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशानुसार आज एक विशेष कानूनी साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर स्थानीय महिला रिपोर्टिंग पुलिस चौकी, धामपुर के परिसर में "मुकदमेबाजी से पूर्व वैवाहिक विवादों का निपटारा मध्यस्थता द्वारा" विषय पर आयोजित किया गया।READ ALSO:-यूपी में 'आग उगलती' गर्मी के बीच रोडवेज का बड़ा फैसला: एसी बसों में आग के खतरे को रोकने के लिए 12 सूत्रीय कड़े नियम जारी; लापरवाही पर नपेगा स्टाफ
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शिविर में कानूनी विशेषज्ञों और महिला पुलिस अधिकारियों ने उपस्थित महिलाओं और स्थानीय नागरिकों को जागरूक करते हुए बताया कि कैसे मामूली विवादों के चलते हंसते-खेलते परिवार बिखर जाते हैं, और कैसे विधिक सेवा प्राधिकरण की मध्यस्थता (Mediation) प्रक्रिया के जरिए मुकदमों के जाल में फंसे बिना रिश्तों को दोबारा सहेजा जा सकता है।
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आपसी बातचीत और मध्यस्थता से बचता है समय और पैसा: पीएलवी जयवीर सिंह
\r\n\r\nइस विधिक साक्षरता अवसर पर मौजूद पैरा लीगल वालंटियर (PLV) जयवीर सिंह ने वैवाहिक जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव और उनके समाधान पर गहराई से प्रकाश डाला। उन्होंने शिविर को संबोधित करते हुए कहा:
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\r\n\r\n\r\n"वैवाहिक व पारिवारिक विवादों का निपटारा यदि आपसी बातचीत, मध्यस्थता या परिवार परामर्श केन्द्रों के जरिए किया जाए, तो वह सबसे उत्तम रहता है। अदालतों के चक्कर काटने से न केवल समय और धन की भारी बर्बादी होती है, बल्कि दोनों पक्षों को अत्यधिक भावनात्मक तनाव (Emotional Stress) से भी गुजरना पड़ता है। मध्यस्थता के जरिए दोनों पक्ष सम्मान के साथ एक मेज पर बैठकर अपनी बात रख सकते हैं।"\r\n
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घरेलू हिंसा और दहेज विवादों के निपटारे की गोपनीय प्रक्रिया: एसआई सीमा खोखर
\r\n\r\nमहिला रिपोर्टिंग चौकी की उपनिरीक्षक (SI) सीमा खोखर ने मध्यस्थता की कानूनी और व्यावहारिक बारीकियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि घरेलू हिंसा, तलाक तथा दहेज सम्बन्धी गंभीर विवादों का निपटारा करने के लिए यह एक पूरी तरह से स्वैच्छिक व अत्यंत गोपनीय (Confidential) प्रक्रिया है।
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उन्होंने आगे कहा कि इस प्रक्रिया के तहत पीड़ित पति-पत्नी को बिना किसी बाहरी दबाव या पूर्वाग्रह के एक शांत और सुरक्षित वातावरण में बातचीत करने का अवसर तैयार करके दिया जाता है। परामर्श केंद्र और मध्यस्थता टीम द्वारा दोनों पक्षों की चिंताओं को बेहद ध्यानपूर्वक सुना जाता है, जिसके बाद कानून के दायरे में रहते हुए ऐसा सर्वमान्य समाधान निकाला जाता है जो दोनों पक्षों को सहर्ष स्वीकार्य हो।
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गलतफहमियों और अहंकार को दूर कर विवाह बचाने का प्रयास: एसआई शिवानी चौहान
\r\n\r\nशिविर में मौजूद उपनिरीक्षक (SI) शिवानी चौहान ने रिश्तों में आने वाली दूरी के मनोवैज्ञानिक कारणों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में अधिकांश वैवाहिक विवादों की मुख्य जड़ आपस में संवाद की कमी (Communication Gap), छोटी-छोटी गलतफहमियां और व्यक्तिगत अहंकार (Ego) होते हैं।
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विधिक सेवा प्राधिकरण और परामर्श केन्द्र की विशेषज्ञ टीम इन विसंगतियों को पहचानकर जीवन-साथियों के बीच उत्पन्न हुई कड़वाहट को दूर करने का भगीरथ प्रयास करती है। टीम का एकमात्र लक्ष्य कानूनी कार्रवाई की बजाए काउंसलिंग के माध्यम से हर संभव प्रयास करके बिखरते हुए विवाह और बच्चों के भविष्य को बचाना होता है।
\r\n\r\nस्थानीय महिलाओं ने बढ़-चढ़कर लिया भाग
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धामपुर महिला चौकी में आयोजित इस जागरूकता शिविर के प्रति स्थानीय महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। शिविर में उपस्थित महिलाओं ने अपनी शंकाओं और अधिकारों को लेकर पुलिस व कानूनी अधिकारियों से सीधे सवाल भी पूछे। इस अवसर पर मुख्य रूप से आशा देवी, सविता, ललिता, शम्मा खातून, नूरजहां, मकसूदा, शाहनवाज आदि सहित भारी संख्या में ग्रामीण व कस्बाई महिलाएं मौजूद रहीं और विधिक साक्षरता का लाभ उठाया।
Sabse pehle comment karne wale banein.