Anil Kumar Sharma, Special Correspondent-धामपुर (बिजनौर): समाज के सर्वांगीण विकास और एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण के लिए महिलाओं और पुरुषों के बीच हर स्तर पर समानता होना अत्यंत आवश्यक है। इसी महत्वपूर्ण उद्देश्य और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए बिजनौर जिले के धामपुर स्थित मुनि विद्यानन्द जैन कन्या विद्यालय में एक विशेष 'विधिक साक्षरता शिविर' (Legal Literacy Camp) का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम उत्तर प्रदेश विधिक सेवा प्राधिकरण (U.P. State Legal Services Authority), लखनऊ द्वारा जारी किए गए माह अप्रैल के एक्शन प्लान के कड़े निर्देशों के अनुपालन में आयोजित किया गया। इस शिविर का मुख्य विषय "जेंडर इक्विटी" (Gender Equity - लैंगिक समानता) रखा गया था, जो वर्तमान परिदृश्य में एक बेहद प्रासंगिक और संवेदनशील मुद्दा है।READ ALSO:-बिजनौर में रफ्तार का कहर: अर्टिगा कार ने ऑटो को मारी जोरदार टक्कर, घायल युवक की हालत नाजुक; कार से शराब की पेटी बरामद होने से मची सनसनी
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस विशेष साक्षरता शिविर का मुख्य उद्देश्य स्कूल की छात्राओं, शिक्षिकाओं और समाज के अन्य वर्गों को उनके कानूनी अधिकारों, लैंगिक समानता के वास्तविक अर्थ और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए विभिन्न कानूनों के बारे में विस्तार से जागरूक करना था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
जेंडर इक्विटी: एक मौलिक अधिकार और सामाजिक आवश्यकता कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित पैरा लीगल वालंटियर (P.L.V.) जयवीर सिंह ने छात्राओं को संबोधित करते हुए जेंडर इक्विटी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बेहद सरल और स्पष्ट शब्दों में समझाया कि "जेंडर समानता का वास्तविक अर्थ यह है कि समाज में लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव किए बिना सभी को समान अधिकार, समान अवसर, समान जिम्मेदारियां और समान संसाधन उपलब्ध हों।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि संविधान ने हर नागरिक को समानता का अधिकार दिया है और लैंगिक समानता कोई रियायत नहीं बल्कि एक 'मौलिक अधिकार' (Fundamental Right) है। समाज में जब तक महिलाओं और पुरुषों को हर क्षेत्र में बराबरी का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक एक सशक्त समाज की कल्पना करना बेमानी है। पीएलवी जयवीर सिंह ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह सबसे बड़ा हथियार है, जिसके माध्यम से समाज में व्याप्त असमानता की खाई को पाटा जा सकता है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
रूढ़िवादिता का अंत और हर क्षेत्र में समान भागीदारी अपने विस्तृत संबोधन में पीएलवी जयवीर सिंह ने समाज में गहरी जड़ें जमा चुकी लिंग आधारित रूढ़िवादिता (Gender Stereotypes) को समाप्त करने का कड़ा आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अक्सर समाज में लड़के और लड़कियों के बीच कार्यों का बंटवारा कर दिया जाता है, जो पूरी तरह से अनुचित है। आज की महिला हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उन्होंने कहा कि शिक्षा, आर्थिक भागीदारी, स्वास्थ्य सुविधाएं और परिवार तथा समाज में 'निर्णय लेने की प्रकिया' (Decision Making Process) में पुरुषों के समान ही महिलाओं और अन्य लिंगों के साथ भी समान व्यवहार होना चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि महत्वपूर्ण पारिवारिक या सामाजिक फैसलों में महिलाओं की राय को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जो कि जेंडर इक्विटी के सिद्धांतों के सख्त खिलाफ है। जब तक घर और बाहर के फैसलों में महिलाओं की बराबर की भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक लैंगिक समानता का लक्ष्य अधूरा रहेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार: बाल विवाह और लैंगिक हिंसा पर रोक विधिक साक्षरता शिविर में महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। पीएलवी जयवीर सिंह ने कहा कि लैंगिक हिंसा (Gender-based Violence) और बाल विवाह जैसी कुरीतियां आज भी समाज के लिए एक बड़ा कलंक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह बच्चियों के शारीरिक और मानसिक विकास को पूरी तरह से अवरुद्ध कर देता है। बाल विवाह के कारण बच्चियां शिक्षा से वंचित रह जाती हैं और कम उम्र में ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार हो जाती हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से अपील की कि वे अपने आस-पास होने वाले किसी भी बाल विवाह का खुलकर विरोध करें और इसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दें। उन्होंने कहा कि शिक्षा तक सभी की निर्बाध और सुरक्षित पहुंच निश्चित होनी चाहिए। लैंगिक समानता केवल चर्चा का कोई 'मुद्दा' नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाला 'सामाजिक प्रयास व उपाय' है, जिसमें समाज के हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सरकारी योजनाओं और महिला हेल्पलाइन नंबरों की महत्वपूर्ण जानकारी कानूनी अधिकारों के साथ-साथ छात्राओं को उनके व्यावहारिक उपयोग की भी जानकारी दी गई। शिविर में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं (जैसे- कन्या सुमंगला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, मिशन शक्ति आदि) के बारे में विस्तार से बताया गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पीएलवी जयवीर सिंह ने आपात स्थिति में मदद मांगने के लिए छात्राओं को महत्वपूर्ण टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों को याद रखने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, घरेलू हिंसा या खतरे की स्थिति में छात्राएं 'वीमेन पावर लाइन 1090', 'आपातकालीन सेवा 112', 'महिला हेल्पलाइन 181', और 'चाइल्डलाइन 1098' पर बेझिझक कॉल कर सकती हैं। इन नंबरों पर कॉल करने वाली महिलाओं की पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाती है और उन्हें त्वरित पुलिस सहायता प्रदान की जाती है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
विद्यालय परिवार की सक्रिय भागीदारी और समापन मुनि विद्यानन्द जैन कन्या विद्यालय प्रशासन ने इस साक्षरता शिविर को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने पूरे उत्साह और ध्यान के साथ कानूनी जानकारियों को सुना और अपने मन में उठने वाले सवालों को भी वक्ताओं के सामने रखा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या प्रियंका वत्स ने विधिक सेवा प्राधिकरण की इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि छात्राओं के मानसिक विकास और उनके अंदर आत्मविश्वास जगाने के लिए ऐसे विधिक साक्षरता शिविर समय-समय पर आयोजित होते रहने चाहिए। जब हमारी बच्चियां अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगी, तभी वे समाज में निडर होकर आगे बढ़ सकेंगी। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय की सहायक अध्यापिका पिंकी, सोनी वर्मा, संतोष, और शाहीन आदि का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक समतामूलक समाज के निर्माण का संकल्प लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें