भारत की आत्मा गांवों में बसती है, लेकिन अक्सर ग्रामीण अंचलों में कानूनी जानकारी के अभाव के कारण लोग अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। इसी अज्ञानता को दूर करने और न्याय को हर चौखट तक पहुंचाने के महान उद्देश्य के साथ, उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। सोमवार, 7 सितंबर को बिजनौर के ग्राम पंचायत घर इटावा, मोहम्मदपुर देवमल में एक विशाल 'विधिक जागरूकता शिविर' (Legal Awareness Camp) का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न केवल कानूनी जानकारी देने का माध्यम बना, बल्कि सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एक मजबूत आवाज बनकर भी उभरा।READ ALSO:-बिजनौर में न्याय का महापर्व: 12 सितंबर को लगेगी 'राष्ट्रीय लोक अदालत', सालों पुराने विवादों का होगा चंद मिनटों में मुफ्त निपटारा!
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इस भव्य और जनहितकारी कार्यक्रम का आयोजन माननीय उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UP State Legal Services Authority), लखनऊ के सख्त आदेशानुसार और माननीय जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिजनौर श्री संजय कुमार सप्तम जी के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी उसके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता के विकल्पों से अवगत कराना था।
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कुशल नेतृत्व और जनभागीदारी का संगम
\r\n\r\nकार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), बिजनौर की सचिव श्रीमती स्वाति चंद्रा द्वारा की गई। उनके ओजस्वी विचारों और सरल भाषा में कानूनी व्याख्या ने वहां उपस्थित ग्रामीणों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, इस पूरे कार्यक्रम का बेहतरीन संचालन तहसीलदार श्री आशीष सक्सेना द्वारा किया गया, जिन्होंने ग्रामीण जनता और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच एक मजबूत सेतु का काम किया। इस शिविर में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने भारी संख्या में भाग लिया, जो यह दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब लोग अपने अधिकारों को लेकर सजग हो रहे हैं।
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'आशा 2025': बाल विवाह मुक्त भारत का संकल्प
\r\n\r\nइस विधिक जागरूकता शिविर का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय 'बाल विवाह' रहा। सचिव महोदया श्रीमती स्वाति चंद्रा ने माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी योजना 'आशा 2025' (ASHA 2025) के बारे में ग्रामीणों को विस्तार से जानकारी दी। इस योजना का मुख्य लक्ष्य भारत को पूरी तरह से बाल विवाह मुक्त बनाना है।
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उन्होंने ग्रामीणों को सख्त लहजे में, लेकिन प्यार से समझाते हुए कहा कि बाल विवाह कोई परंपरा नहीं, बल्कि एक जघन्य सामाजिक और कानूनी अपराध है। भारत के कानून के अनुसार लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम कानूनी उम्र 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित की गई है। इस आयु सीमा से पहले शादी करना या करवाना दोनों ही कानूनन जुर्म है।
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बाल विवाह अधिनियम के तहत सजा का प्रावधान: श्रीमती चंद्रा ने ग्रामीणों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि यदि कोई भी व्यक्ति बाल विवाह करवाता है, उसमें सहयोग करता है या उसमें शामिल होता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत दोषियों को 2 साल तक के कठोर कारावास (जेल) और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने सभी से अपील की कि यदि उनके आस-पास, पड़ोस या किसी भी गांव में कोई बाल विवाह हो रहा हो, तो उसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या प्रशासन को दें। अपनी इस छोटी सी सहभागिता से आप न केवल एक मासूम की जिंदगी बचा सकते हैं, बल्कि इस कुप्रथा को जड़ से खत्म करने में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकते हैं।
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नालसा की अन्य कल्याणकारी योजनाएं और 15100 टोल-फ्री नंबर
\r\n\r\nबाल विवाह के अलावा, शिविर में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े अन्य कई ज्वलंत मुद्दों पर भी गंभीरता से चर्चा की गई। सचिव महोदया ने मा० नालसा द्वारा प्रतिपादित कई अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं के बारे में ग्रामीणों को जागरूक किया:
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- \r\n एसिड अटैक पीड़ितों के लिए योजना: एसिड अटैक (तेजाब हमला) जैसी अमानवीय घटनाओं की शिकार महिलाओं को त्वरित कानूनी सहायता, न्याय और उचित मुआवजा दिलाने के लिए विशेष प्रावधान।\r\n \r\n
- \r\n बाल-हितैषी कानूनी सेवाएं योजना 2024: बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके लिए अनुकूल कानूनी वातावरण तैयार करने की रूपरेखा।\r\n \r\n
- \r\n मानव तस्करी और व्यावसायिक शोषण: मानव तस्करी (Human Trafficking) का शिकार हुए लोगों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के पुनर्वास और उन्हें कानूनी संरक्षण प्रदान करने की योजना।\r\n \r\n
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इन सभी आपातकालीन स्थितियों और मुफ्त कानूनी सलाह के लिए ग्रामीणों को नालसा का टोल फ्री नंबर 15100 भी नोट करवाया गया। इस नंबर पर कॉल करके देश का कोई भी नागरिक मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है।
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12 सितंबर को होने वाली 'राष्ट्रीय लोक अदालत' के प्रति किया जागरूक
\r\n\r\nकार्यक्रम के अंतिम चरण में, सचिव महोदया ने आगामी 12 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाली विशाल 'राष्ट्रीय लोक अदालत' (National Lok Adalat) के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लोक अदालत न्याय पाने का सबसे सुलभ, सस्ता और त्वरित माध्यम है। यहां कोई पक्ष हारता या जीतता नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों की जीत होती है क्योंकि मामले आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निपटाए जाते हैं।
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लोक अदालत में निस्तारित होने वाले प्रमुख वाद:
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- \r\n चैक बाउन्स (Cheque Bounce) से सम्बन्धित धारा 138 एन०आई०एक्ट के मामले।\r\n \r\n
- \r\n बैंक रिकवरी (Bank Recovery) से जुड़े कर्ज के विवाद।\r\n \r\n
- \r\n मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद (MACT - Motor Accident Claims)।\r\n \r\n
- \r\n बिजली और जल के बिल से सम्बन्धित शमनीय दण्ड वाद।\r\n \r\n
- \r\n जमीन और राजस्व (Revenue) से जुड़े लंबित वाद।\r\n \r\n
- \r\n सिविल वाद और आरबिट्रेशन से सम्बन्धित मामले।\r\n \r\n
- \r\n प्री-लिटिगेशन (कोर्ट में जाने से पहले के) वैवाहिक और पारिवारिक विवाद।\r\n \r\n
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सचिव महोदया ने सभी वादकारियों (Litigants) से भावपूर्ण अपील की कि वे अदालत के चक्कर काटने, समय बर्बाद करने और भारी-भरकम वकीलों की फीस देने से बचें। वे 12 सितंबर को अधिक से अधिक संख्या में निर्धारित समय व स्थान पर उपस्थित होकर अपने-अपने वादों का सरलता से निस्तारण कराएं और इस जनहितकारी लोक अदालत का भरपूर लाभ उठाएं।
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कार्यक्रम में इन गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
\r\n\r\nविधिक जागरूकता शिविर को सफल बनाने में स्थानीय प्रशासन और पंचायत के नुमाइंदों ने अपनी अहम भूमिका निभाई। इस अवसर पर मुख्य रूप से ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) श्री राजीव सिंह, पंचायत सचिव विशाल अग्रवाल, ग्राम प्रधान सपन, पंचायत सहायक दिव्या, पराविधिक स्वयं सेवक (PLV) संजीव कुमार सहित बड़ी संख्या में देवमल के ग्रामवासी, महिलाएं और युवा मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे गांव में किसी भी प्रकार का बाल विवाह नहीं होने देंगे और कानूनी साक्षरता को घर-घर तक पहुंचाएंगे। यह शिविर ग्रामीण भारत में कानूनी सशक्तिकरण की दिशा में एक बेहद सराहनीय और मील का पत्थर साबित होने वाला कदम है।
Sabse pehle comment karne wale banein.