Anil Kumar Sharma, Special Correspondent-धामपुर: भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। इसी महान परंपरा का निर्वहन करते हुए, धर्म की नगरी के नाम से विख्यात धामपुर में आज गुरु पूर्णिमा का महापर्व बेहद ही श्रद्धा, भक्ति और अपार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पूरे नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से ही एक अलग तरह की आध्यात्मिक ऊर्जा और उल्लास देखने को मिला। हर कोई अपने गुरु के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आतुर नजर आया। मंदिरों में गूंजते मंत्रों, शंखनाद और भजनों ने धामपुर के वातावरण को पूरी तरह से धर्ममय कर दिया।READ ALSO:-बिजनौर में दिव्यांग छात्राओं की राह होगी आसान: 1 अगस्त से शुरू होंगे मुफ्त ई-ट्राईसाइकिल चिन्हांकन शिविर, जिलाधिकारी ने दिए सख्त निर्देश
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महर्षि वेदव्यास को समर्पित है यह पावन पर्व
\r\n\r\nहिंदू पंचांग के अनुसार, प्रतिवर्ष आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन चारों वेदों के रचयिता और महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को 'व्यास पूर्णिमा' के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय संस्कृति में गुरु की महिमा को अपरंपार बताया गया है। "गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा" के श्लोक को चरितार्थ करते हुए, धामपुर के निवासियों ने यह साबित कर दिया कि आज के आधुनिक युग में भी गुरु-शिष्य की महान परंपरा और आस्था पूरी तरह से जीवित और अक्षुण्ण है।
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धामपुर के मंदिरों और आश्रमों में लगा भक्तों का तांता
\r\n\r\nगुरु पूर्णिमा के अवसर पर धामपुर नगर और इससे सटे आसपास के क्षेत्रों में स्थित विभिन्न प्रमुख धार्मिक स्थलों, मंदिरों और सत्संग भवनों में सुबह तड़के से ही विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने स्नान-ध्यान के बाद अपने-अपने गुरुओं के आश्रमों और मंदिरों का रुख किया।
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शिष्यों ने पूरे विधि-विधान के साथ अपने गुरुओं की पूजा की। उनके चरणों को पखार कर पुष्प, ताजे फल, वस्त्र और श्रद्धानुसार दक्षिणा अर्पित की। हर किसी की आंखों में अपने गुरु के प्रति असीम सम्मान और कृतज्ञता का भाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था। गुरु पूजन के पश्चात सभी स्थानों पर विशाल भंडारों का आयोजन किया गया, जहां सभी भक्तों ने एक साथ बैठकर महाभोग और प्रसाद ग्रहण किया। यह दृश्य सामाजिक समरसता और एकजुटता का भी एक अद्भुत उदाहरण पेश कर रहा था।
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श्री राधा कृष्ण मंदिर में हुआ भव्य सम्मान समारोह
\r\n\r\nनगर के अति प्राचीन और प्रसिद्ध श्री राधा कृष्ण मंदिर में गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में एक विशेष और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहां सुबह से ही महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। मंदिर प्रांगण को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से बेहद खूबसूरती के साथ सजाया गया था।
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इस अवसर पर मंदिर में विराजमान पंडित पारितोष शास्त्री और आदरणीय दंडी स्वामी भगवत आनंद जी महाराज का शिष्यों द्वारा भव्य स्वागत और सत्कार किया गया। भक्तों ने कतारों में लगकर दंडी स्वामी जी और पंडित जी के चरणों में फूल, मालाएं और फल अर्पित किए तथा जीवन में सही मार्ग पर चलने का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान मंदिर में लगातार संकीर्तन चलता रहा, जिससे उपस्थित सभी श्रद्धालु भक्ति भाव में झूमते नजर आए।
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सनातन धर्म की रक्षा और गौ सेवा: आचार्य डॉ. दिनेश भारद्वाज का विशेष सत्कार
\r\n\r\nधामपुर में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक और प्रमुख कार्यक्रम 'अनंत नियति वर्ल्ड पीस चैरिटेबल ट्रस्ट (रजिस्टर्ड)' के तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस ट्रस्ट के माध्यम से समाज सेवा और धर्म प्रचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया जा रहा है।
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इस विशेष दिन पर आचार्य डॉ. दिनेश भारद्वाज जी के हजारों भक्तों और अनुयायियों ने मंदिर पहुंचकर उनका पूरे विधि-विधान के साथ स्वागत और सत्कार किया। शिष्यों ने उन्हें तिलक लगाकर और पुष्प गुच्छ भेंट कर उनके प्रति अपनी अपार श्रद्धा व्यक्त की।
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गौरतलब है कि आचार्य डॉ. दिनेश भारद्वाज जी द्वारा धामपुर क्षेत्र में एकमात्र विशाल गौशाला का संचालन किया जा रहा है। बेसहारा और बीमार गायों की निस्वार्थ सेवा का यह कार्य पूरे क्षेत्र के लिए एक मिसाल है। यह न केवल भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के लिए एक अत्यंत गौरव की बात है, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी जीव दया और परोपकार की प्रेरणा देता है। उनके अनुयायियों का मानना है कि आचार्य जी के मार्गदर्शन में क्षेत्र के युवा धर्म और सेवा के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
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संकट मोचन श्री सिद्धेश्वर बालाजी धाम में उमड़ा जनसैलाब
\r\n\r\nनगर के प्रमुख आस्था केंद्रों में से एक, 'संकट मोचन श्री सिद्धेश्वर बालाजी धाम' पर भी गुरु पूर्णिमा की छटा देखते ही बन रही थी। यहां सुबह से ही सैंकड़ों की संख्या में स्त्री, पुरुष और बच्चे एकत्रित होने लगे थे। मंदिर परिसर में पैर रखने तक की जगह नहीं थी।
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बालाजी धाम में पीठाधीश्वर महंत राहुल जी महाराज का भक्तों द्वारा भव्य रूप से तिलक किया गया। शिष्यों ने उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया और उनके चरणों में शीश झुकाकर सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। इस अवसर पर मंदिर में सुंदरकांड का पाठ और विशेष भजनों का आयोजन किया गया। महंत राहुल जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में उपस्थित जनसमूह को धर्म के मार्ग पर चलने, माता-पिता की सेवा करने और समाज में भाईचारा बनाए रखने का अमूल्य संदेश दिया।
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दिन भर चलता रहा भजनों और शंखनाद का दौर
\r\n\r\nगुरु पूर्णिमा के इस ऐतिहासिक अवसर पर धामपुर में दिनभर एक अद्भुत धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। बाजारों, गली-मोहल्लों और चौराहों पर स्थित छोटे-बड़े सभी मंदिरों से मधुर भजनों की स्वर लहरियां गूंजती रहीं। बीच-बीच में होने वाले शंखनाद और घंटों की ध्वनि ने पूरे वातावरण को पवित्र कर दिया।
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शाम होते-होते विभिन्न आश्रमों और सत्संग भवनों में दीपदान और महाआरती का आयोजन किया गया। इस पर्व ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भौतिकता की इस अंधी दौड़ में भी धामपुर वासियों के दिलों में अपनी संस्कृति, अपने धर्म और अपने गुरुओं के प्रति अटूट आस्था और असीम प्रेम निवास करता है। गुरु पूर्णिमा का यह दिन सभी के जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मकता और आध्यात्मिक चेतना का संचार कर संपन्न हुआ।
Sabse pehle comment karne wale banein.