Anil Kumar Sharma, Special Correspondent-धामपुर (स्पेशल पॉलिटिकल डेस्क): उत्तर प्रदेश की राजनीति में आजम खान (Azam Khan) और उनकी 'मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी' (Mohammad Ali Jauhar University) का मुद्दा हमेशा से एक सुलगता हुआ अंगारा रहा है। प्रशासन द्वारा यूनिवर्सिटी के कुछ भवनों के प्रस्तावित ध्वस्तीकरण (Demolition) को लेकर अब समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने आर-पार की लड़ाई का शंखनाद कर दिया है।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर में बदमाशों का खौफनाक खेल: WhatsApp पर मांगी 50 लाख की रंगदारी, बंधक बनाए ड्राइवर-क्लीनर... छपार पुलिस ने 24 घंटे में ऐसे बिगाड़ा गेम!
\r\n\r\n\r\n\r\n
लेकिन इस विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) और प्रशासन ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी सियासी रस्साकशी का सबसे बड़ा हाई-वोल्टेज ड्रामा बिजनौर जिले के धामपुर (Dhampur) में देखने को मिला, जहां सूबे के पूर्व राज्य मंत्री और कद्दावर सपा नेता ठाकुर मूलचंद चौहान (Thakur Moolchand Chauhan) को उनके ही कार्यालय में पुलिस ने जबरन रोककर एक तरह से 'हाउस अरेस्ट' कर लिया है।
\r\n\r\n 
आइए आपको सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं कि लखनऊ से लेकर शाहजहांपुर और फिर धामपुर तक पुलिस और सपा नेताओं के बीच यह 'चूहे-बिल्ली' का खेल कैसे चला।
\r\n\r\n\r\n\r\n
लखनऊ से शुरू हुआ 'ऑपरेशन रोक-टोक': शाहजहांपुर में पहली नाकाबंदी
\r\n\r\nसमाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल (Delegation) रामपुर जाने के लिए तैयार हुआ था। इस प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य रामपुर पहुंचकर जिलाधिकारी (DM) से मुलाकात करना, उन्हें एक कड़ा ज्ञापन सौंपना और जौहर यूनिवर्सिटी पर हो रही ध्वस्तीकरण की एकतरफा कार्यवाही के खिलाफ अपना लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराना था।
\r\n\r\n 
पूर्व राज्य मंत्री ठाकुर मूलचंद चौहान इसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे। जब वह लखनऊ से अपने काफिले के साथ रामपुर के लिए रवाना हुए, तो एलआईयू (LIU) और पुलिस प्रशासन की रडार पर आ गए। रामपुर पहुंचने से बहुत पहले ही शाहजहांपुर (Shahjahanpur) की सीमा में यूपी पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग लगाकर उनके काफिले को रोक लिया। वहां पुलिस ने उन्हें अपनी हिरासत में लिया और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें वापस उनके गृह क्षेत्र धामपुर स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय पर लाकर छोड़ दिया। पुलिस की मंशा साफ थी कि किसी भी सपा नेता को रामपुर की सीमा में प्रवेश न करने दिया जाए।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सुबह का संग्राम: सैकड़ों कार्यकर्ताओं का हुजूम और पुलिस का पहरा
\r\n\r\nशाहजहांपुर में रोके जाने के बावजूद पूर्व मंत्री ठाकुर मूलचंद चौहान के तेवर ठंडे नहीं पड़े। उन्होंने हार नहीं मानी और आज (गुरुवार) प्रातःकाल एक बार फिर रामपुर कूच करने का ऐलान कर दिया।
\r\n\r\n 
जैसे ही धामपुर और आसपास के क्षेत्रों में यह खबर फैली, समाजवादी पार्टी के सैकड़ों उग्र कार्यकर्ता और समर्थक धामपुर कार्यालय के बाहर जमा हो गए। पूरा इलाका "समाजवादी पार्टी जिंदाबाद" और "पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद" के नारों से गूंज उठा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कार्यालय के गेट पर ही भिड़े पुलिस और सपाई: जैसे ही ठाकुर मूलचंद चौहान अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ रामपुर जाने के लिए कार्यालय से बाहर निकलने लगे, धामपुर पुलिस और पीएसी (PAC) के जवानों ने मुख्य द्वार को ही छावनी में तब्दील कर दिया। पुलिस ने पूर्व मंत्री को गेट से बाहर कदम भी नहीं रखने दिया। कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग तोड़ने और पुलिस लाइन को पार करने की कोशिश की, जिसके चलते पुलिस और सपाईयों के बीच भारी धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक हुई। अंततः पुलिस के बलप्रयोग के सामने पूर्व मंत्री को कार्यालय के भीतर ही रुकना पड़ा।
\r\n\r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
"सरकार बौखला गई है, हमारी आवाज को बुलडोजर से नहीं दबाया जा सकता"
\r\n\r\nपुलिस द्वारा जबरन रोके जाने और नजरबंद किए जाने से आक्रोशित पूर्व राज्य मंत्री ठाकुर मूलचंद चौहान ने मीडिया और अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार पर जमकर जुबानी हमला बोला।
\r\n\r\n\r\n\r\n
उन्होंने तल्ख लहजे में कहा:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"यह सरकार लोकतंत्र की हत्यारी बन चुकी है। क्या इस देश में शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन देना भी अब अपराध हो गया है? हम कोई हथियार लेकर नहीं जा रहे थे, हम सिर्फ रामपुर जिलाधिकारी के सामने अपना विरोध प्रकट करने जा रहे थे। कार्यालय से निकलते ही जिस तानाशाही के तहत पुलिस ने हमें जबरन रोका है, वह इस बात का प्रमाण है कि सत्ताधारी दल विपक्ष की एकजुटता से डर गया है। यह कार्रवाई करके हमारी और समाजवादियों की आवाज को कतई दबाया नहीं जा सकता। शिक्षा के मंदिरों (यूनिवर्सिटी) पर बुलडोजर चलाना इस सरकार की कायरता है।"\r\n
\r\n\r\n
बिना किसी लिखित आदेश के हुई कार्रवाई? पुलिस की 'चुप्पी' पर उठे सवाल
\r\n\r\nइस पूरे राजनीतिक बवाल में सबसे ज्यादा किरकिरी पुलिस और स्थानीय प्रशासन की हो रही है। एक पूर्व राज्य मंत्री को उनके ही कार्यालय में रोक देना कोई छोटी बात नहीं है, लेकिन सबसे हैरानी की बात यह है कि पुलिस की ओर से इस सख्त कार्रवाई पर कोई भी विस्तृत या आधिकारिक वक्तव्य (Official Statement) जारी नहीं किया गया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n आखिर किस कानूनी प्रावधान के तहत एक जनप्रतिनिधि को यात्रा करने से रोका गया?\r\n \r\n
- \r\n क्या रामपुर में कोई विशेष निषेधाज्ञा (धारा 144) लागू है?\r\n \r\n
- \r\n शाहजहांपुर से धामपुर तक पुलिस एस्कॉर्ट के जरिए लाने का लिखित आदेश किसका था?\r\n \r\n
\r\n\r\n
स्थानीय पुलिस अधिकारी मीडिया के सवालों से बचते नजर आए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सब 'ऊपर के मौखिक आदेशों' पर हो रहा है ताकि रामपुर में आजम खान के समर्थकों के साथ कोई बड़ी राजनीतिक रैली या जनसभा न हो सके।
\r\n\r\n\r\n\r\n
जौहर यूनिवर्सिटी: एक ऐसा मुद्दा जो यूपी की सियासत को रखता है गर्म
\r\n\r\nमौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी आजम खान का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, लेकिन 2017 में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही यह यूनिवर्सिटी लगातार कानूनी और प्रशासनिक विवादों में घिरी है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n प्रशासन का दावा है कि यूनिवर्सिटी की कई इमारतें शत्रु संपत्ति, वक्फ बोर्ड, किसानों की जमीन और सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाई गई हैं।\r\n \r\n
- \r\n इसी अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन ने भवनों के ध्वस्तीकरण (Demolition) की तैयारी की है।\r\n \r\n
- \r\n दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी इसे 'बदले की राजनीति' (Vendetta Politics) मानती है और इसे अल्पसंख्यक संस्थानों को खत्म करने की साजिश करार देती है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
धामपुर में ठाकुर मूलचंद चौहान को 'हाउस अरेस्ट' किए जाने की इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि जौहर यूनिवर्सिटी का मामला अब सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि एक भयंकर राजनीतिक अखाड़ा बन चुका है। अखिलेश यादव के निर्देश पर सपा नेता अब सड़कों पर उतरने को तैयार हैं, जबकि पुलिस प्रशासन उन्हें उनके घरों से बाहर नहीं निकलने दे रहा। आगामी दिनों में रामपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह राजनीतिक घमासान और भी तेज होने की पूरी संभावना है।
\r\n\r\n
Sabse pehle comment karne wale banein.