Anil Kumar Sharma, Special Correspondent-धामपुर (बिजनौर): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद के धामपुर शहर में आज उस वक्त भारी दहशत और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया, जब शहर के बीचों-बीच स्थित एक प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल और आवासीय इमारत से आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं। धामपुर के अत्यंत व्यस्त और घनी आबादी वाले क्षेत्र खारी कुआं, मोहल्ला साहूवान स्थित श्रीराम मंदिर आश्रम की चौथी मंजिल पर अचानक भयंकर आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि पूरे इलाके में आसमान काले धुएं के गुबार से ढक गया।READ ALSO:-एलपीजी गैस सिलेंडर e-KYC की डेडलाइन 23 अगस्त तक बढ़ी, लेकिन सर्वर डाउन से ठप हुई प्रक्रिया; जानें न कराने पर क्या होगा नुकसान और कैसे करें आसान वेरिफिकेशन
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प्रसिद्ध कथावाचक पंडित राधेश्याम व्यास जी का है यह निवास

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यह अग्निकांड इसलिए भी पूरे इलाके और प्रदेश के लिए एक बड़ी खबर बन गया है क्योंकि जिस इमारत (श्रीराम मंदिर आश्रम) में यह आग लगी है, वह कोई सामान्य भवन नहीं है। यह पूरे भारतवर्ष में विख्यात और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र, प्रसिद्ध शिव पुराण कथावाचक पंडित आचार्य श्री राधेश्याम व्यास जी महाराज का निजी निवास स्थान है।
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जैसे ही शहर के लोगों और व्यास जी के अनुयायियों को इस बात की भनक लगी कि महाराज जी के आश्रम में आग लग गई है, वैसे ही घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई। हर कोई महाराज जी और उनके परिवार की कुशलता जानने के लिए बेताब नजर आ रहा था। स्थानीय प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गए और तुरंत राहत बचाव कार्य शुरू किए गए।
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फाइबर और सोलर पैनल ने बढ़ाया आग का विकराल रूप

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प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जांच के अनुसार, आग इमारत की सबसे ऊपरी यानी चौथी मंजिल (4th Floor) पर लगी थी। आज के समय में इमारतों को आधुनिक लुक देने और ऊर्जा बचाने के लिए जो तकनीक इस्तेमाल की जाती है, वही इस हादसे में आग को भड़काने का सबसे बड़ा कारण बन गई।
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दरअसल, आश्रम की चौथी मंजिल पर बड़े पैमाने पर फाइबर के पैनल (Fiber Panels) लगाए गए थे और छत के ऊपर भारी संख्या में सोलर पैनल (Solar Panels) का सेटअप इंस्टॉल किया गया था। जब आग भड़की, तो फाइबर सामग्री ने एक ज्वलनशील पदार्थ (Fuel) का काम किया। फाइबर के पिघलने और सोलर पैनल की वायरिंग के संपर्क में आने से आग कुछ ही पलों में बेकाबू हो गई और पूरी चौथी मंजिल एक धधकते भट्टी में तब्दील हो गई।
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बाल-बाल बचा परिवार: समय रहते किया गया सुरक्षित रेस्क्यू

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इस खौफनाक अग्निकांड के बीच सबसे बड़ी और राहत देने वाली खबर यह रही कि इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि (Loss of Life) नहीं हुई है।
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बताया जा रहा है कि जब चौथी मंजिल पर धुआं उठना शुरू हुआ और आग की लपटें फैलने लगीं, तब घर के सदस्य निचली मंजिलों पर मौजूद थे। स्थानीय लोगों की सतर्कता और परिवार की सूझबूझ से बिना एक भी सेकंड बर्बाद किए, पूरे परिवार और आश्रम के सेवादारों को सुरक्षित रूप से इमारत से बाहर निकाल लिया गया। यदि इमारत को खाली कराने में कुछ मिनटों की भी देरी होती, तो आग के धुएं और तेजी से फैलती लपटों के कारण स्थिति बेहद जानलेवा और गंभीर हो सकती थी।
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दमकल विभाग की भारी मशक्कत: तीसरी मंजिल की तरफ बढ़ रही थी आग

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घनी आबादी और संकरी गलियों वाला इलाका (खारी कुआं) होने के कारण दमकल विभाग (Fire Brigade) को घटनास्थल तक पहुंचने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, सूचना मिलते ही धामपुर फायर स्टेशन की कई गाड़ियां सायरन बजाते हुए मौके पर पहुंच गईं।
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जब दमकल कर्मियों ने मोर्चा संभाला, तब तक चौथी मंजिल पूरी तरह से जलकर राख हो चुकी थी और आग की लपटें अब तीसरी मंजिल (3rd Floor) की तरफ तेजी से बढ़ रही थीं। फायर ब्रिगेड के जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालते हुए चारों तरफ से पानी की बौछारें शुरू कीं और एक मजबूत 'फायर लाइन' बनाई ताकि आग को निचली मंजिलों और आसपास के सटे हुए घने मकानों तक फैलने से रोका जा सके। समाचार लिखे जाने तक आग को बुझाने और कूलिंग (Cooling Operation) का काम युद्धस्तर पर जारी है।
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50 लाख रुपये से अधिक के नुकसान का अनुमान

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इस अग्निकांड में पंडित आचार्य श्री राधेश्याम व्यास जी महाराज के आश्रम का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के शुरुआती आकलन के अनुसार, इस आग में लगभग 50 लाख रुपये से ज्यादा की संपत्ति जलकर स्वाहा हो गई है।
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चौथी मंजिल पर रखा कीमती सामान, महंगा फर्नीचर, फाइबर का पूरा स्ट्रक्चर, लाखों रुपये कीमत का सोलर पैनल सिस्टम और अन्य जरूरी दस्तावेज पूरी तरह से खाक हो चुके हैं। हालांकि, नुकसान का यह सिर्फ एक अनुमानित आंकड़ा है। प्रशासन और राजस्व विभाग की टीम आग के पूरी तरह से शांत होने और मलबे की जांच करने के बाद ही नुकसान की वास्तविक और सटीक रिपोर्ट तैयार कर सकेगी।
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आग लगने के कारणों की जांच में जुटी पुलिस

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श्रीराम मंदिर आश्रम की चौथी मंजिल पर आग कैसे और क्यों लगी? यह सवाल अभी भी एक पहेली बना हुआ है। अब तक आग लगने के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल पाया है।
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पुलिस और अग्निशमन विभाग के अधिकारी शुरुआती तौर पर इसे शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) का मामला मानकर चल रहे हैं। चूंकि छत पर सोलर पैनल की भारी-भरकम वायरिंग मौजूद थी, इसलिए इस बात की प्रबल आशंका है कि वहीं से कोई स्पार्किंग हुई हो जिसने फाइबर पैनल को अपनी चपेट में ले लिया। फिलहाल, धामपुर पुलिस ने घटनास्थल की घेराबंदी कर ली है और फॉरेंसिक तथा तकनीकी जांच के बाद ही आग लगने के असली कारणों का आधिकारिक खुलासा किया जाएगा।
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धामपुर के खारी कुआं इलाके में हुआ यह अग्निकांड रिहायशी इलाकों में फायर सेफ्टी (Fire Safety) और ज्वलनशील निर्माण सामग्री (जैसे फाइबर) के इस्तेमाल पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। फिलहाल शहर के लोगों ने राहत की सांस ली है कि उनके प्रिय कथावाचक आचार्य राधेश्याम व्यास जी और उनका परिवार पूरी तरह से सुरक्षित है। प्रशासन अब आग से हुए नुकसान की भरपाई और घटना की विस्तृत जांच में जुट गया है।
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