धामपुर (बिजनौर) / रिपोर्ट-अनिल कुमार शर्मा- खबरीलाल न्यूज डेस्क:
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इस्लामी कैलेंडर के रबी-उल-अव्वल महीने का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी महीने की 12 तारीख को पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफा ﷺ इस दुनिया में तशरीफ़ लाए थे। उनका जीवन और उनके द्वारा दिए गए संदेश पूरी इंसानियत के लिए प्रेम, भाईचारे, दया और शांति का प्रतीक हैं। पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत में भी इस दिन को 'ईद मिलादुन्नबी' के रूप में एक बड़े पर्व की तरह मनाया जाता है।READ ALSO:-धामपुर में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी ﷺ की रूहानी महफ़िल: दरूद-ओ-सलाम से गूंजा हज़रत नमक शाह बाबा का आस्ताना, मुल्क की तरक्की की मांगी गई दुआ
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इसी कड़ी में बिजनौर ज़िले का धामपुर शहर भी जश्न-ए-आमद-ए-रसूल ﷺ के रंग में पूरी तरह रंगा हुआ नज़र आया। मस्जिदों, दरगाहों, घरों और शहर के मुख्य मार्गों को रंग-बिरंगी लाइटों, झंडियों और इस्लामी झंडों से बेहद खूबसूरती के साथ सजाया गया था। इस खास मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपने नबी की मुहब्बत में एक विशाल और भव्य 'जुलूस-ए-मोहम्मदी' का आयोजन किया, जिसने पूरे शहर के माहौल को रूहानी और नूरानी बना दिया।
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धामपुर में जुलूस-ए-मोहम्मदी का भव्य आगाज़ और उत्साह

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तय कार्यक्रम के अनुसार, धामपुर में जुलूस-ए-मोहम्मदी अपने निर्धारित स्थान से पूरी शान-ओ-शौकत के साथ शुरू हुआ। इस जुलूस में शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मुस्लिम भाइयों, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सेदारी की।
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 लूस में शामिल अकीदतमंदों के हाथों में हरे रंग के इस्लामी झंडे लहरा रहे थे। युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था, जो अपने नबी की शान में नात-ए-पाक और कसीदे पढ़ते हुए आगे बढ़ रहे थे। जुलूस जिन-जिन रास्तों और मोहल्लों से होकर गुजरा, वहां की फिज़ा पूरी तरह से बदल गई। जुलूस की अगुवाई शहर के प्रमुख उलेमा-ए-किराम, हाफ़िज़ और मस्जिदों के इमाम कर रहे थे, जो लगातार लोगों को शांति और आपसी सौहार्द का पैग़ाम दे रहे थे।

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'मरहबा' के नारों से गूंजा शहर, हुई फातिहा ख्वानी

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जुलूस-ए-मोहम्मदी के पूरे रास्ते में एक अलग ही रूहानी कैफियत छाई रही। हजारों की भीड़ एक सुर में 'मरहबा या मुस्तफा', 'सरकार की आमद... मरहबा', और 'नारे-ए-तकबीर, अल्लाह हू अकबर' की सदाएं बुलंद कर रही थी। इन नारों की गूंज से धामपुर का कोना-कोना महक उठा।
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रास्ते में कई मुकद्दस मुकामों (स्थानों) पर जुलूस को रोककर कुरआन-ए-मजीद की तिलावत की गई और फातिहा पढ़ी गई। फातिहा ख्वानी के बाद वहां मौजूद लोगों और राहगीरों के बीच बड़ी मात्रा में तबर्रुक (प्रसाद/मिठाई और फल) का वितरण किया गया। लोगों ने पूरी अकीदत और एहतराम के साथ इस तबर्रुक को ग्रहण किया।
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मुल्क की तरक्की और अमन-ओ-चैन के लिए उठीं दुआएं

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जुलूस-ए-मोहम्मदी का सबसे भावुक और महत्वपूर्ण पहलू वह था, जब उलेमाओं की सरपरस्ती में सामूहिक दुआ का आयोजन किया गया। इस दौरान हाथ उठाकर अल्लाह की बारगाह में विशेष प्रार्थनाएं की गईं।
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दुआ में खासतौर पर हिंदुस्तान (देश) में अमन, चैन, शांति, आपसी भाईचारे और तरक्की की गुज़ारिश की गई। उलेमाओं ने पैग़ाम दिया कि इस्लाम का असली मतलब ही शांति है और एक सच्चा मुसलमान वही है जो अपने वतन से मुहब्बत करता है और समाज में किसी को तकलीफ नहीं पहुंचाता। सभी लोगों ने नम आंखों से आमीन कहकर इस दुआ में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
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गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल: सामाजिक संस्थाओं ने किया स्वागत

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धामपुर हमेशा से ही अपनी साझी संस्कृति और हिंदू-मुस्लिम एकता (गंगा-जमुनी तहजीब) के लिए जाना जाता है। जुलूस-ए-मोहम्मदी के दौरान यह एकता एक बार फिर निखर कर सामने आई।
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जुलूस का शहर के अनेकों स्थानों पर विभिन्न सामाजिक और व्यापारिक संस्थाओं द्वारा बेहद गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। गैर-मुस्लिम भाइयों ने जगह-जगह स्टॉल लगाकर जुलूस में शामिल अकीदतमंदों के लिए ठंडे पानी, शरबत और मिठाइयों की व्यवस्था की। कई जगहों पर छतों और बालकनियों से जुलूस पर फूलों की बारिश की गई, जिसने यह साबित कर दिया कि धामपुर में नफरत के लिए कोई जगह नहीं है और यहां के लोग हर त्योहार को मिल-जुलकर मनाते हैं।
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राजनेताओं और गणमान्य हस्तियों की जुलूस में शिरकत

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जुलूस-ए-मोहम्मदी की अहमियत और धामपुर की एकता को और अधिक मज़बूत करने के लिए क्षेत्र के कई बड़े राजनेताओं, जन प्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने जुलूस में शिरकत की। इन गणमान्य हस्तियों ने अकीदतमंदों का स्वागत किया और उन्हें ईद मिलादुन्नबी की मुबारकबाद पेश की।
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जुलूस में शामिल होने वाले प्रमुख वीवीआईपी (VVIPs) और गणमान्य चेहरे:

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    ठाकुर मूलचंद चौहान: (पूर्व राज्य मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार)
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    ठाकुर अमित सिंह: (प्रमुख राजनेता)
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    चौधरी रवि कुमार सिंह: (वर्तमान अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद धामपुर)
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    मोहम्मद कसार: (वरिष्ठ नेता)
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    नईमुल हसन: (पूर्व अध्यक्ष, नगर पालिका धामपुर)
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    रस्तोगी बंधु: (शहर के प्रमुख समाजसेवी)
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इन सभी हस्तियों ने जुलूस के रास्ते में खड़े होकर लोगों का इस्तकबाल किया और गले मिलकर मुहब्बत का पैग़ाम दिया। उनकी उपस्थिति ने जुलूस की भव्यता को और बढ़ा दिया और समाज में भाईचारे का एक बेहद मजबूत और सकारात्मक संदेश गया।
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शांतिपूर्ण तरीके से हुआ जुलूस का समापन
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कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी के बीच, धामपुर का यह ऐतिहासिक जुलूस-ए-मोहम्मदी अपने निर्धारित मार्गों से होता हुआ तय मुकाम पर पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। जुलूस के आयोजकों और मुस्लिम समाज के ज़िम्मेदारों ने बेहतरीन कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यातायात सुचारू रखने के लिए स्थानीय पुलिस-प्रशासन का भी तहे दिल से शुक्रिया अदा किया। इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि त्योहार कोई भी हो, आपसी भाईचारा, प्रेम और इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।
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