Anil Kumar Sharma, Special Correspondent-धामपुर, 23 जून 2026: उत्तर प्रदेश की प्रमुख गन्ना बेल्ट (Sugarcane Belt) माने जाने वाले बिजनौर जिले के धामपुर क्षेत्र में गन्ने की खेती किसानों के लिए केवल एक फसल नहीं, बल्कि उनकी आजीविका की 'लाइफलाइन' है। किसानों की इसी आर्थिक रीढ़ को बीमारियों से सुरक्षित रखने और गन्ने की बंपर पैदावार सुनिश्चित करने के लिए धामपुर शुगर मिल (Dhampur Sugar Mill) प्रबंधन ने अब वातानुकूलित दफ्तरों से बाहर निकलकर सीधे खेतों की पगडंडियों का रुख कर लिया है।READ ALSO:-मेरठ: 'मौत के कुएं' में तब्दील हुए कोचिंग सेंटर, पुलिस चेकिंग में खुली सुरक्षा दावों की पोल; न NOC, न एग्जिट प्वाइंट
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शुगर मिल धामपुर के नवनियुक्त उपाध्यक्ष (Vice President) श्री आशीष शर्मा ने जब से अपना कार्यभार ग्रहण किया है, पूरे मिल क्षेत्र में एक नई और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है। उनके कुशल नेतृत्व में मिल के शीर्ष अधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम द्वारा लगातार गांवों का भ्रमण किया जा रहा है। इसी जागरूकता अभियान के तहत मंगलवार, 23 जून 2026 को टीम ने क्षेत्र के कई प्रमुख गांवों का सघन दौरा कर गन्ने की फसल पर मंडरा रहे सबसे बड़े खतरे— 'रेड रॉट' (Red Rot) बीमारी का जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया।
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खेतों के बीच संवाद: नयागांव से लेकर कोपा तक सघन निरीक्षण
\r\n\r\nधामपुर शुगर मिल प्रशासन का यह अभियान केवल कागजी नहीं है, बल्कि किसानों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने की एक बेहतरीन पहल है। मंगलवार को उपाध्यक्ष आशीष शर्मा के साथ मिल के क्वालिटी कंट्रोल (Quality Control) विभाग के हेड श्री सतवीर सिंह, गन्ना प्रबंधक और कृषि विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय टीम फील्ड में उतरी।
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इस विशेष टीम ने ग्राम नयागांव, नंदगांव, मंडोर और कोपा आदि गांवों का विस्तृत भ्रमण किया। इस दौरान अधिकारियों ने किसानों के साथ चौपाल लगाई और उनकी समस्याओं को बारीकी से सुना।
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ग्राम कोपा में प्रगतिशील किसानों— संदीप कुमार, बृजपाल सिंह, विपिन कुमार और सौरभ कुमार आदि के खेतों पर जाकर अधिकारियों ने फसल की सघन जांच की। वैज्ञानिकों की टीम ने विशेष रूप से क्षेत्र में सबसे अधिक बोई जाने वाली गन्ने की प्रजाति '0238' (Co 0238) और '0118' के खेतों का मुआयना किया। इन खेतों में गन्ने की फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर देने वाली भयंकर 'रेड रॉट' (लाल सड़न रोग) बीमारी के शुरुआती लक्षण और प्रभाव का निरीक्षण किया गया।
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'रेड रॉट' (लाल सड़न रोग): गन्ने का सबसे खतरनाक 'कैंसर'
\r\n\r\nगन्ना किसानों के बीच 'रेड रॉट' को गन्ने का कैंसर कहा जाता है, और यह कोई अतिशयोक्ति नहीं है। यह एक फफूंद जनित (Fungal) रोग है जो गन्ने के अंदरूनी हिस्से को पूरी तरह से लाल कर देता है और उसमें से सिरके जैसी खट्टी बदबू आने लगती है। जब यह बीमारी खेत में लगती है, तो पूरी की पूरी फसल कुछ ही दिनों में सूख कर नष्ट हो जाती है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि गन्ने की सबसे लोकप्रिय और अधिक पैदावार देने वाली किस्म '0238' हाल के वर्षों में इस बीमारी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील (Susceptible) हो गई है।
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यदि समय रहते इस बीमारी की पहचान कर इसका रोकथाम न किया जाए, तो किसानों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है और मिलों को भी गन्ने की आपूर्ति में भारी कमी का सामना करना पड़ता है।
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उपाध्यक्ष आशीष शर्मा का किसानों को संजीवनी मंत्र
\r\n\r\nखेतों के निरीक्षण के उपरांत, उपाध्यक्ष आशीष शर्मा ने ग्राम कोपा और आसपास के किसानों को संबोधित करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा किया।
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उन्होंने किसानों को स्पष्ट शब्दों में चेताते हुए कहा, "रेड रॉट (लाल सड़न) कोई सामान्य बीमारी नहीं है, यह गन्ने की फसल के लिए एक जानलेवा कैंसर के समान है। इसका इलाज किसी चमत्कार से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और त्वरित कार्रवाई से ही संभव है।"
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उन्होंने बीमारी से बचाव और रोकथाम के लिए किसानों को निम्नलिखित अचूक उपाय (Scientific Remedies) बताए:
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1. उखाड़ना और जलाना (Uproot and Burn): जिस खेत में या गन्ने के जिस पौधे (मेढ़े) में रेड रॉट के लक्षण (पत्तियों का पीला पड़ना और गन्ने का सूखना) दिखाई दें, उसे जड़ सहित तुरंत खेत से उखाड़ लेना चाहिए। उखाड़े गए रोगग्रस्त गन्ने को खेत के बाहर ले जाकर पूरी तरह जला देना चाहिए ताकि इसके फंगस (बीजाणु) हवा या पानी के जरिए दूसरे स्वस्थ गानों तक न पहुंच सकें।
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2. ब्लीचिंग पाउडर से भूमि शोधन: बीमार पौधे को निकालने के बाद उस जगह की मिट्टी में फंगस मौजूद रहता है। इस फंगस को मारने के लिए उस गड्ढे में और आसपास की मिट्टी में ब्लीचिंग पाउडर (Bleaching Powder) का भारी मात्रा में छिड़काव करना अत्यंत आवश्यक है। यह मिट्टी को सैनिटाइज (Sterilize) कर देता है।
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3. ट्राइकोडर्मा (Trichoderma) का अनिवार्य उपयोग: यह एक 'मित्र फफूंद' (Bio-Fungicide) है जो मिट्टी में पनपने वाले हानिकारक फंगस (रेड रॉट) को खाकर नष्ट कर देती है। उपाध्यक्ष महोदय ने जोर देकर कहा कि गोबर की खाद में मिलाकर ट्राइकोडर्मा का खेत में प्रयोग करना रेड रॉट से बचने का सबसे प्रभावी, जैविक और सुरक्षित तरीका है।
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4. सीटीपीआर (CTPR) विधि का प्रयोग: रेड रॉट के अलावा गन्ने में लगने वाले अन्य कीटों (जैसे टॉप बोरर, अर्ली शूट बोरर आदि) से बचाव के लिए उन्होंने 'सीटीपीआर' (Chlorantraniliprole - जिसे आमतौर पर कोराजन आदि के रूप में जाना जाता है) के उचित और वैज्ञानिक उपयोग की सलाह दी। इसके छिड़काव से फसल कीटमुक्त रहती है और गन्ने की मोटाई व लंबाई में शानदार वृद्धि होती है।
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मिल और किसानों के बीच बढ़ता विश्वास: एक नई सुबह
\r\n\r\nधामपुर शुगर मिल प्रबंधन के इस फील्ड विजिट (Field Visit) में मिल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी अनिल कुमार और अरविंद कुमार भी मुस्तैदी से उपस्थित रहे। उन्होंने भी किसानों को गन्ने की उचित देखभाल और खाद-पानी के सही समय के बारे में तकनीकी जानकारी दी।
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किसानों के लिए यह एक बेहद सुखद अनुभव रहा कि मिल के आला अधिकारी खुद उनके खेतों की मेड़ पर आकर उनकी फसल का हाल जान रहे हैं। ग्राम कोपा के किसान संदीप कुमार और बृजपाल सिंह ने मिल प्रबंधन की इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उनका कहना था कि जब मिल प्रबंधन इस तरह का मार्गदर्शन और वैज्ञानिक सहयोग प्रदान करता है, तो किसानों का हौसला दोगुना हो जाता है।
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उत्तम खेती, उन्नत किसान
\r\n\r\nउपाध्यक्ष आशीष शर्मा के नेतृत्व में शुरू हुआ यह जागरूकता अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि उद्योग (Sugar Mills) और किसान (Farmers) एक साथ मिलकर, वैज्ञानिक तरीकों से काम करें, तो कोई भी बीमारी फसल को बर्बाद नहीं कर सकती। गन्ने के 'कैंसर' से निपटने के लिए उठाए गए ये त्वरित कदम न केवल धामपुर क्षेत्र के किसानों को आर्थिक बर्बादी से बचाएंगे, बल्कि आगामी पेराई सत्र (Crushing Season) में मिल को उत्तम गुणवत्ता वाले गन्ने की निर्बाध आपूर्ति भी सुनिश्चित करेंगे। यह पहल पूरे उत्तर प्रदेश के गन्ना क्षेत्र के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।
Sabse pehle comment karne wale banein.