Nishant Kumar Gaur, Special Correspondent-धामपुर (बिजनौर): उत्तर प्रदेश में जहां एक ओर सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने और 'मिशन शक्ति' के तहत बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठा रही है, वहीं बिजनौर जिले के धामपुर क्षेत्र से एक बेहद ही हैरान करने वाला और निंदनीय मामला सामने आया है। धामपुर हुसैनपुर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में कुछ असामाजिक तत्वों ने न केवल सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया है, बल्कि स्कूल आने-जाने वाली छात्राओं के साथ सरेराह छेड़छाड़ और मारपीट जैसी गंभीर वारदातों को भी अंजाम दिया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे अभिभावक अपनी बच्चियों को स्कूल भेजने में भी कतराने लगे हैं। विद्यालय की मुख्य अध्यापिका कविता शर्मा ने इस पूरे प्रकरण में धामपुर थाना प्रभारी को एक विस्तृत और नामजद शिकायती पत्र (तहरीर) सौंपकर आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।Read also:-बिजनौर की पवित्र धरा पर सीएम योगी की प्रचंड हुंकार: 'हमें जिन्ना नहीं, गन्ना पसंद है', किसानों और विकास के लिए खोला सौगातों का पिटारा
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सरकारी संपत्ति का भारी नुकसान: शौचालयों के दरवाजे और पानी की व्यवस्था ध्वस्त

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिक्षा क्षेत्र अल्हपुर के अंतर्गत आने वाले उच्च प्राथमिक विद्यालय धामपुर हुसैनपुर (यू-डायस कोड: 09030209204) को कुछ शरारती तत्वों ने अपना निशाना बनाया है। मुख्य अध्यापिका द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि विद्यालय परिसर में स्थित सभी शौचालयों के दरवाजे बुरी तरह से तोड़ दिए गए हैं।
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स्वच्छता अभियान के तहत बच्चों के लिए बनाई गई पानी की टंकियों, पाइपलाइन, टोंटियां और शॉवर को भी असामाजिक तत्वों ने पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया है। उपद्रवियों का आतंक यहीं नहीं रुका; उन्होंने स्कूल परिसर में रखे ड्रम के ढक्कन गायब कर दिए और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हुए विद्यालय में लगे हरे-भरे पेड़ों को भी बेरहमी से तोड़ दिया।
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कौन हैं तोड़फोड़ के आरोपी? स्थानीय स्तर पर की गई प्रारंभिक पूछताछ और कुछ चश्मदीदों (जिन्होंने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर जानकारी दी) के अनुसार, इस भारी तोड़फोड़ के पीछे तीन युवकों का हाथ बताया जा रहा है। इन युवकों के नाम हनुमान, तोरी और आडल बताए गए हैं, जो पुराने धामपुर में किसी मंदिर के पास के निवासी बताए जा रहे हैं। इन युवकों ने रात के अंधेरे या स्कूल की छुट्टी के समय इस पूरी घटना को अंजाम दिया है, जिससे विद्यालय के बुनियादी ढांचे को गहरा धक्का लगा है।
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छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर संकट: सरेराह थप्पड़ मारकर भाग जाते हैं मनचले

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संपत्ति के नुकसान से भी ज्यादा चिंताजनक और गंभीर विषय विद्यालय की छात्राओं की सुरक्षा का है। स्कूल प्रशासन और छात्राओं के अनुसार, क्षेत्र के कुछ मनचले युवक लगातार लड़कियों को परेशान कर रहे हैं।
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शिकायती पत्र में मुख्य अध्यापिका ने स्पष्ट रूप से दो युवकों को नामजद किया है:
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    यश (पुत्र श्री मनोज)
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    हर्ष (पुत्र श्री शिवकुमार)
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आरोप है कि ये दोनों युवक तेज रफ्तार बाइक पर सवार होकर स्कूल के रास्ते में आते हैं और वहां से गुजरने वाली मासूम छात्राओं के साथ अभद्रता करते हैं। हद तो तब पार हो जाती है जब ये मनचले सरेराह लड़कियों को थप्पड़ मारते हैं और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाए, वे अपनी बाइक से फर्राटा भरते हुए मौके से फरार हो जाते हैं।
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छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा पर पड़ रहा है सीधा असर

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इस तरह की घटनाओं का सबसे नकारात्मक प्रभाव छात्राओं की मानसिकता पर पड़ रहा है। जो बच्चियां अपने सुनहरे भविष्य के सपने संजोकर शिक्षा ग्रहण करने के लिए घर से निकलती हैं, उन्हें रास्ते में असामाजिक तत्वों के खौफ का सामना करना पड़ रहा है।
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    भय का माहौल: लगातार हो रही मारपीट और छेड़छाड़ की घटनाओं के कारण छात्राओं के मन में इतना डर बैठ गया है कि वे स्कूल जाने से घबराने लगी हैं।
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    अभिभावकों में चिंता: जब यह बात छात्राओं के घरों तक पहुंची, तो अभिभावकों की रातों की नींद उड़ गई। कई माता-पिता अब अपनी बेटियों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं, जिसका सीधा असर लड़कियों की उपस्थिति (Attendance) और 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे महत्वपूर्ण अभियानों पर पड़ रहा है।
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    ड्रॉपआउट का खतरा: ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वैसे ही लड़कियों की शिक्षा को लेकर कई चुनौतियां होती हैं। ऐसे में यदि सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता नहीं होगी, तो बालिकाओं के स्कूल छोड़ने (Dropout) की दर में भारी वृद्धि हो सकती है।
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मुख्य अध्यापिका ने उठाया साहसिक कदम, पुलिस प्रशासन से की न्याय की गुहार

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ऐसी विषम परिस्थितियों में विद्यालय की मुख्य अध्यापिका कविता शर्मा ने मूकदर्शक बने रहने के बजाय एक बेहद साहसिक कदम उठाया है। उन्होंने अपनी छात्राओं के सम्मान और विद्यालय की सुरक्षा के लिए सीधे पुलिस प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है।
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थाना प्रभारी धामपुर को दिए गए पत्र में उन्होंने पूरी घटना का विस्तार से वर्णन करते हुए पुलिस से निम्नलिखित मांगे की हैं:
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    नामजद आरोपियों (यश और हर्ष) के खिलाफ छेड़छाड़ और मारपीट की धाराओं में तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए।
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    विद्यालय की संपत्ति (शौचालय, पाइप, पेड़ आदि) को नुकसान पहुंचाने वाले संदिग्ध युवकों (हनुमान, तोरी और आडल) की पहचान कर उन पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मुकदमा दर्ज किया जाए।
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    विद्यालय के खुलने और बंद होने के समय (सुबह और दोपहर) स्कूल के आस-पास पुलिस पिकेट या पीआरवी (PRV 112) की गश्त बढ़ाई जाए, ताकि मनचलों में खाकी का खौफ पैदा हो।
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पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती और समाज की जिम्मेदारी

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धामपुर की यह घटना केवल एक स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ा सवालिया निशान है। आखिर कैसे कुछ असामाजिक तत्व दिन के उजाले में छात्राओं पर हाथ उठा सकते हैं और सरकारी संपत्ति को अपनी जागीर समझकर तहस-नहस कर सकते हैं?
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अब सभी की निगाहें धामपुर पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों को उम्मीद है कि पुलिस इस मामले में 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपनाते हुए त्वरित और कठोर कार्रवाई करेगी। यदि इन मनचलों और उपद्रवियों को समय रहते सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो उनके हौसले और बुलंद होंगे, जो भविष्य में किसी बड़ी अप्रिय घटना का कारण बन सकते हैं।
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शिक्षा के मंदिर को सुरक्षित रखना केवल पुलिस या शिक्षकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि स्थानीय समाज को भी ऐसे तत्वों का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए। फिलहाल, धामपुर थाना पुलिस से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह तुरंत इस तहरीर का संज्ञान लेगी और छात्राओं के मन से भय को निकालकर उन्हें एक सुरक्षित और भयमुक्त शैक्षिक वातावरण प्रदान करेगी।
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