Anil Kumar Sharma, Special Correspondent-धामपुर (बिजनौर): उत्तर प्रदेश सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों और 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से शनिवार को बिजनौर जिले की धामपुर तहसील में 'संपूर्ण समाधान दिवस' (Sampoorna Samadhan Diwas) का भव्य आयोजन किया गया। तहसील सभागार में आयोजित इस समाधान दिवस में दूर-दराज के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से आए सैकड़ों फरियादियों ने अपनी समस्याएं प्रशासन के आला अधिकारियों के समक्ष रखीं। इस दौरान अधिकारियों ने जनता की शिकायतों को पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना।READ ALSO:-कांवड़ यात्रा 2026: शिवभक्तों के लिए बड़ा अपडेट, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ियों की 'नो-एंट्री', उत्तराखंड सरकार के सख्त निर्देश
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संपूर्ण समाधान दिवस की अध्यक्षता उप जिलाधिकारी (SDM) धामपुर, श्री नितिन कुमार, तहसीलदार धामपुर श्री धनराज सिंह और परियोजना निदेशक डीआरडीए (PD DRDA) बिजनौर, श्री आलोक वर्मा ने संयुक्त रूप से की। इस अवसर पर एसडीएम नितिन कुमार ने स्पष्ट संदेश दिया कि जन-समस्याओं के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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फरियादियों की उमड़ी भीड़: कुल 168 शिकायतें हुईं दर्ज

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सरकार की मंशा है कि आम जनता को न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें, इसी को ध्यान में रखते हुए माह के निर्धारित दिनों में संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया जाता है। धामपुर तहसील सभागार में शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम में जनता का भारी हुजूम देखने को मिला।
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पंजीकरण डेस्क से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस संपूर्ण समाधान दिवस में कुल 168 शिकायतें दर्ज की गईं। ये शिकायतें समाज के विभिन्न वर्गों और अलग-अलग सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली से जुड़ी हुई थीं। लोगों ने भूमि विवाद, अवैध कब्जे, बिजली कटौती, राशन कार्ड, पेंशन और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी अपनी अनगिनत पीड़ाएं अधिकारियों के सामने रखीं।
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विभागों के अनुसार शिकायतों का विस्तृत विवरण (Department-wise Data)

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समाधान दिवस में सबसे अधिक मामले हमेशा की तरह राजस्व और पुलिस विभाग से जुड़े हुए सामने आए। प्राप्त कुल 168 शिकायतों का विभागीय वर्गीकरण इस प्रकार रहा:
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    राजस्व विभाग (Revenue Department): 96 शिकायतें - (सबसे अधिक शिकायतें भूमि की पैमाइश, चकरोड पर अवैध कब्जे, वरासत दर्ज कराने और खतौनी से संबंधित रहीं।)
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    पुलिस विभाग (Police Department): 22 शिकायतें - (आपसी विवाद, मारपीट, और थानों में सुनवाई न होने से संबंधित प्रार्थना पत्र।)
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    विकास खंड (Development Block): 8 शिकायतें - (ग्राम पंचायत स्तर के कार्य, आवास योजना और मनरेगा से संबंधित।)
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    विद्युत विभाग (Electricity Department): 6 शिकायतें - (गलत बिजली बिल, जर्जर तार और ट्रांसफार्मर फुंकने की समस्याएं।)
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    कृषि विभाग (Agriculture Department): 3 शिकायतें - (किसानों की खाद-बीज और सरकारी योजनाओं की जानकारी से जुड़ी शिकायतें।)
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    सिंचाई विभाग (Irrigation Department): 2 शिकायतें - (नहरों में पानी न आने और माइनर की सफाई से संबंधित।)
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    श्रम विभाग (Labor Department): 2 शिकायतें - (मजदूरों के पंजीकरण और योजनाओं के लाभ से संबंधित।)
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    लोक निर्माण विभाग (PWD): 2 शिकायतें - (सड़कों की खस्ताहालत और गड्ढा मुक्ति को लेकर।)
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    डूडा (DUDA): 1 शिकायत - (शहरी विकास योजना से जुड़ी।)
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    अन्य विभाग (Other Departments): 26 शिकायतें - (स्वास्थ्य, शिक्षा, जल निगम आदि विभिन्न विभागों से संबंधित फुटकर शिकायतें।)
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7 शिकायतों का मौके पर ही हुआ निस्तारण (On-the-Spot Resolution)

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संपूर्ण समाधान दिवस की सार्थकता इसी बात में है कि पीड़ित को त्वरित न्याय मिल सके। एसडीएम नितिन कुमार और तहसीलदार धनराज सिंह ने प्राप्त शिकायतों का गहनता से परीक्षण किया। जिन शिकायतों की प्रकृति ऐसी थी जिन्हें बिना लंबी जांच-पड़ताल के सुलझाया जा सकता था, उन पर तत्काल कार्रवाई की गई।
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अधिकारियों के त्वरित दखल और संबंधित विभाग के कर्मचारियों को मौके पर ही तलब करने के परिणामस्वरूप 7 शिकायतों का स्थल पर ही (On-the-spot) सफलतापूर्वक निस्तारण कर दिया गया। अपनी समस्या का तुरंत समाधान पाकर इन 7 फरियादियों के चेहरों पर संतोष और खुशी की लहर दौड़ गई और उन्होंने प्रशासन की इस त्वरित कार्यप्रणाली की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
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शेष 161 शिकायतों के लिए समय-सीमा निर्धारित

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जिन 161 शिकायतों का मौके पर निस्तारण नहीं हो सका, उनके लिए एसडीएम नितिन कुमार ने एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रक्रिया अपनाई। उन्होंने इन सभी शिकायतों को संबंधित विभागों के अधिकारियों (विभागाध्यक्षों) को तुरंत सौंप दिया।
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एसडीएम ने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि इन सभी 161 शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों पर या खानापूर्ति के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने आदेशित किया कि संबंधित अधिकारी और कर्मचारी स्वयं मौके (घटनास्थल) पर जाएं, दोनों पक्षों की बातों को निष्पक्षता से सुनें, भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करें और उसके बाद ही पूरी गुणवत्ता के साथ शिकायत का समाधान करें। उन्होंने सभी विभागों को जल्द से जल्द (शीघ्र ही) कार्रवाई कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट तहसील मुख्यालय में जमा करने के स्पष्ट आदेश दिए हैं।
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SDM नितिन कुमार की सख्त चेतावनी: "शिथिलता बरतने पर होगी कानूनी कार्रवाई"

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इस समाधान दिवस का सबसे प्रमुख आकर्षण एसडीएम नितिन कुमार का वह सख्त और दो-टूक रवैया रहा, जो उन्होंने कामचोर और लापरवाह कर्मचारियों के प्रति अपनाया। उन्होंने सभागार में उपस्थित सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी।
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एसडीएम ने कहा, "उत्तर प्रदेश सरकार जन-समस्याओं के समाधान को लेकर अत्यंत गंभीर है। यदि किसी भी फरियादी की शिकायत के निस्तारण में किसी भी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा शिथिलता (Laxity) बरती गई, या जांच में फर्जी रिपोर्ट लगाई गई, तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई (Legal Action) अमल में लाई जाएगी।"
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उन्होंने आगे कहा कि जनता का प्रशासन पर विश्वास बनाए रखना हम सभी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। कोई भी पीड़ित तहसील से निराश होकर नहीं लौटना चाहिए। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल और संपूर्ण समाधान दिवस की शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा जाए।
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अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की रही सक्रिय उपस्थिति

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इस वृहद आयोजन को सफल बनाने और जनता की समस्याओं को सुव्यवस्थित ढंग से सुनने के लिए तहसील प्रशासन की पूरी टीम मुस्तैद रही। एसडीएम, तहसीलदार और पीडी डीआरडीए के अलावा इस संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर:
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    नायब तहसीलदार (धामपुर) श्री राजकमल
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    नायब तहसीलदार श्री कपिल आजाद
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    नायब तहसीलदार (नहटौर) श्री विजय कुमार
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ये सभी अधिकारी अपने-अपने संबंधित राजस्व निरीक्षकों (Revenue Inspectors), लेखपालों और अन्य विभागीय कर्मचारियों की पूरी टीम के साथ सुबह से लेकर कार्यक्रम के समापन तक सभागार में उपस्थित रहे।
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धामपुर तहसील में आयोजित यह संपूर्ण समाधान दिवस इस बात का प्रमाण है कि यदि प्रशासनिक अधिकारी इच्छाशक्ति दिखाएं, तो जनता की कई समस्याओं का समाधान उनके घर के समीप ही किया जा सकता है। अब क्षेत्र की जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिन 161 शिकायतों को अधिकारियों को सौंपा गया है, उन पर कितनी जल्द और कितनी निष्पक्षता के साथ धरातल पर कार्रवाई होती है। प्रशासन के इस कड़े रुख से उम्मीद बंधी है कि सरकारी दफ्तरों में लेटलतीफी के दिन अब लदने वाले हैं।
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