ANIL KUMAR SHARMA Special Correspondent-उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर क्षेत्र में मोहर्रम की दसवीं तारीख (यौम-ए-आशूरा) को बेहद अकीदत और गम के माहौल में मनाया गया। ग्राम माकुआ और रसूलपुर सादात में धामपुर मोहर्रम जुलूस बहुत ही शांतिपूर्ण ढंग से निकाला गया। इस पारंपरिक ताजिया जुलूस में लोगों ने इमाम हुसैन और कर्बला के 72 शहीदों की शहादत को नम आंखों से याद किया।READ ALSO:-  बिजनौर में रील का 'ज़हरीला' क्रेज: व्यूज के लिए मरे हुए सांप को मुंह में डाला, 42 वर्षीय युवक जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा
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हिंदू-मुस्लिम सौहार्द और भाईचारे की अनोखी मिसाल

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ग्राम माकुआ और रसूलपुर सादात में निकाला गया यह मातमी जुलूस क्षेत्र में एकता का प्रतीक बन गया। इस पवित्र जुलूस में शिया मुस्लिम समुदाय के अलावा अन्य धर्मों के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर और सम्मान के साथ हिस्सा लिया।
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सभी समुदायों की इस साझा भागीदारी ने समाज में आपसी प्रेम और सौहार्द का एक मजबूत संदेश दिया है। लोगों ने साबित कर दिया कि दुख और गम के इस मौके पर पूरा गांव बिना किसी भेदभाव के एक साथ खड़ा है। जगह-जगह जुलूस का सम्मान किया गया।
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कर्बला के शहीदों की याद में नम हुईं लोगों की आंखें

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मोहर्रम के इस पवित्र और गमगीन मौके पर पूरे इलाके में शोक की लहर छाई हुई थी। धामपुर मोहर्रम जुलूस के दौरान इमाम हुसैन और उनके 72 वफादार साथियों के सर्वोच्च बलिदान को बहुत ही गहराई और एहतराम के साथ याद किया गया।
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शिया समुदाय के लोगों ने काले कपड़े पहनकर इस मातमी जुलूस में हिस्सा लिया। जुलूस के दौरान नौहाख्वानी (शोक गीत) और सीनाजनी करते हुए अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। हर कोई कर्बला के उस दर्दनाक ऐतिहासिक वाकये को याद कर रहा था।
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अखाड़ों में मातमी युवाओं ने दिखाए हैरतअंगेज करतब

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इस विशाल धामपुर मोहर्रम जुलूस के दौरान कई अखाड़े भी शामिल हुए। इन अखाड़ों में शामिल मातमी लोगों और युवाओं ने अपने पारंपरिक और हैरतअंगेज करतब दिखाकर वहां मौजूद सभी लोगों को हैरान कर दिया।
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इस दौरान मोहम्मद शहजाद, शेर जंग और मास्टर जावेद जैसे लोगों ने अपने कौशल का बेहतरीन प्रदर्शन किया। उनके साथ अकबर, सरफराज और सैकड़ों अन्य युवाओं ने भी इस मातमी करतब में हिस्सा लिया और इमाम हुसैन के प्रति अपनी अकीदत पेश की।
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इमामबाड़े में मजलिस का शांतिपूर्ण आयोजन

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जुलूस के अपने निर्धारित मार्गों से होते हुए समापन की ओर बढ़ने के साथ ही, क्षेत्र के इमामबाड़े में एक विशेष मजलिस का आयोजन किया गया। इस मजलिस में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने बड़ी शांति के साथ शिरकत की।
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इस मजलिस को मुख्य रूप से मोहम्मद गुलजार ने संबोधित किया। उन्होंने इमाम हुसैन के जीवन, उनके आदर्शों और उनके द्वारा किए गए महान संघर्ष पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बुराई के खिलाफ हमेशा डटकर खड़े रहने का संदेश दिया।
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मोहम्मद गुलजार ने दिया सत्य और इंसानियत का संदेश

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अपने संबोधन में मोहम्मद गुलजार ने कर्बला के 72 शहीद साथियों के अतुलनीय बलिदान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत हमें जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने और हमेशा इंसानियत के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती है।
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उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि वे इमाम हुसैन के बताए हुए शांति, त्याग और मानवता के रास्ते का अनुसरण करें। मजलिस के दौरान इमामबाड़े में शांति और अनुशासन की व्यवस्था पूरी तरह से कायम रही।
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प्रशासन की निगरानी और सफल आयोजन

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इस पूरे धामपुर मोहर्रम जुलूस को सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए स्थानीय लोग और आयोजक लगातार सक्रिय रहे। स्थानीय पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, जिससे यह पारंपरिक आयोजन बिना किसी बाधा के संपन्न हो सका।
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निष्कर्ष के तौर पर, ग्राम माकुआ और रसूलपुर सादात का यह धामपुर मोहर्रम जुलूस अकीदत, गम और सर्वधर्म समभाव का एक अद्भुत संगम रहा। कर्बला के शहीदों की याद में निकाले गए इस जुलूस ने पूरे इलाके में शांति, इंसानियत और आपसी भाईचारे की एक नई मिसाल पेश की है, जो आज के समाज के लिए बेहद जरूरी है।
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