Nishant Kumar Gaur Special Correspondent-धामपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश में एक बार फिर 'बुलडोजर एक्शन' सुर्खियों में है। बिजनौर जिले के धामपुर कस्बे में एक धार्मिक स्थल (मजार) की बाहरी दीवार को राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा रातों-रात ढहाए जाने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। यह विवाद धामपुर की पॉश मानी जाने वाली 'टीचर कॉलोनी' के पास स्थित एक रास्ते से जुड़ा है। प्रशासन का तर्क है कि यह कार्रवाई राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) के आधार पर अतिक्रमण हटाने के लिए की गई है, जबकि मजार पक्ष इसे अपनी पुश्तैनी जगह बता रहा है।READ ALSO:-PhonePe यूजर्स के लिए बुरी खबर: 1 साल से बंद पड़े वॉलेट पर हर तिमाही कटेंगे ₹100, सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा!
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इस हाई-प्रोफाइल मामले में नगीना लोकसभा सीट से नवनिर्वाचित सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) की एंट्री ने मामले को और भी गरमा दिया है। आइए, इस पूरी घटना के हर पहलू, पृष्ठभूमि और दोनों पक्षों के दावों को विस्तार से समझते हैं।
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क्या है पूरा विवाद? (विवाद की जड़)

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धामपुर कस्बे की 'टीचर कॉलोनी' में एक प्रमुख बैंक की शाखा के ठीक बगल में 'नासिर बाबा की मजार' स्थित है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मजार काफी पुरानी है और इसके प्रति कई लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। विवाद मजार के मुख्य ढांचे को लेकर नहीं, बल्कि उससे सटी हुई बाहरी दीवार और एक रास्ते को लेकर है।
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    कॉलोनी वासियों की शिकायत: टीचर कॉलोनी में रहने वाले लोगों का लंबे समय से दावा रहा है कि मजार के पास से गुजरने वाला रास्ता एक "आम रास्ता" (Public Path) है। यह रास्ता कॉलोनी के निवासियों के रोजमर्रा के आवागमन का मुख्य साधन है। कॉलोनी के लोगों का आरोप है कि मजार प्रबंधन ने धीरे-धीरे इस सार्वजनिक रास्ते पर अतिक्रमण कर लिया और वहां पक्की दीवार खड़ी कर दी, जिससे रास्ता संकरा हो गया और लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था।
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    मजार पक्ष का दावा: दूसरी ओर, मजार की देखभाल करने वालों और स्थानीय मुस्लिम समुदाय का स्पष्ट कहना है कि जिस जमीन पर दीवार बनी थी, वह पूरी तरह से पीर बाबा (मजार) की मिल्कियत है। उनका तर्क है कि यह मजार यहां पीढ़ियों से मौजूद है और उन्होंने किसी भी सार्वजनिक रास्ते पर कोई अवैध कब्जा नहीं किया है। दीवार गिराने की कार्रवाई को वे अपनी धार्मिक भावनाओं और संपत्ति पर सीधा हमला मान रहे हैं।
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यह विवाद एक या दो दिन का नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों की मानें तो यह उतना ही पुराना है जितनी खुद यह मजार और इसके आसपास बसी यह कॉलोनी। कई बार स्थानीय स्तर पर पंचायतें और सुलह-समझौते के प्रयास हुए, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
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देर रात का 'ऑपरेशन बुलडोजर' और पुलिस से नोकझोंक

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विवाद ने परसों (बुधवार/गुरुवार की दरमियानी) रात तब एक उग्र रूप ले लिया, जब धामपुर प्रशासन, भारी पुलिस बल और राजस्व विभाग की टीम के साथ बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंच गया। प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना के (स्थानीय लोगों के दावे के अनुसार) मजार की बाहरी विवादित दीवार को ढहाना शुरू कर दिया।
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रात के अंधेरे में अचानक गरजी जेसीबी मशीनों की आवाज सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। मुस्लिम समुदाय के लोगों में इस अचानक हुई कार्रवाई को लेकर भारी रोष फैल गया। मौके पर मौजूद भीड़ ने इस ध्वस्तीकरण का विरोध शुरू कर दिया।
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इसी बीच, आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) के स्थानीय नेता विवेक सैन भी अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए। विवेक सैन ने इस कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए पुलिस प्रशासन का कड़ा विरोध किया। इस दौरान उनकी वहां मौजूद सर्किल ऑफिसर (CO) और अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ तीखी नोकझोंक भी हुई। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि प्रशासन को आनन-फानन में अतिरिक्त पुलिस बल (PAC) बुलाना पड़ा। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रशासन ने अपना अतिक्रमण हटाओ अभियान पूरा किया।
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डॉ. एमपी सिंह का बयान: "अतिक्रमण हटाना कानूनी रूप से सही"

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इस पूरे घटनाक्रम पर धामपुर के प्रमुख हिंदुत्ववादी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. एमपी सिंह ने प्रशासन की पीठ थपथपाई है। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए इस बुलडोजर एक्शन को पूरी तरह से वैधानिक और आवश्यक करार दिया।
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डॉ. एमपी सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

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"ये कोई नया विवाद नहीं है, बल्कि वर्षों से चला आ रहा मामला है। टीचर कॉलोनी की जनता लंबे समय से इस अतिक्रमण की शिकायत प्रशासन से कर रही थी। प्रशासन ने किसी भावना में बहकर नहीं, बल्कि राजस्व लेखाओं (Revenue Records) और नक्शे के आधार पर यह कार्यवाही की है। जो अतिक्रमण वहां था, उसे हटाया गया है, जो कि कानूनी रूप से शत-प्रतिशत सही है। ये रास्ता वर्षों से आम लोगों के आने-जाने का मार्ग रहा है और आज भी इस पर आवागमन हो रहा है। कॉलोनी के हजारों लोग इसे इस्तेमाल करते हैं, लेकिन दरगाह वालों ने अवैध रूप से इस पर अतिक्रमण कर रखा था, जिसे हटाया जाना जनहित में था।"
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डॉ. सिंह के इस बयान से साफ है कि स्थानीय बहुसंख्यक समुदाय और कुछ सामाजिक संगठन प्रशासन की इस कार्रवाई के पूरी तरह से समर्थन में खड़े हैं।
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सांसद चंद्रशेखर आजाद मैदान में: "किसी के साथ अन्याय नहीं होने देंगे"

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घटना की संवेदनशीलता और इलाके में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव को देखते हुए, नगीना लोकसभा क्षेत्र से नवनिर्वाचित सांसद चंद्रशेखर आजाद तुरंत एक्टिव हो गए। आजाद ने आज (20 जून 2026) अपना तय कार्यक्रम रद्द करते हुए सीधे धामपुर का रुख किया।
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उनका धामपुर पहुंचना इस बात का संकेत है कि वह अपने संसदीय क्षेत्र में किसी भी समुदाय के साथ होने वाले कथित अन्याय के खिलाफ मुखर रहेंगे। धामपुर पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले अपने आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इस बैठक में जिले के आला प्रशासनिक अधिकारी और राजस्व विभाग (Revenue Department) की टीम मौजूद थी।
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चंद्रशेखर आजाद का कड़ा संदेश: सांसद आजाद ने अधिकारियों से मजार की जमीन और रास्ते के पुराने नक्शे, खतौनी और सभी राजस्व रिकॉर्ड तलब किए हैं। उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत देते हुए कहा:
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"मेरे क्षेत्र में किसी भी वर्ग या समुदाय के साथ कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। चाहे वह कोई भी हो, प्रशासन को एकतरफा कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं है। हम राजस्व रिकॉर्ड की गहराई से जांच करा रहे हैं। पूरी सच्चाई सामने आने के बाद ही दूध का दूध और पानी का पानी होगा। अगर मजार के साथ गलत हुआ है, तो प्रशासन को जवाबदेह ठहराया जाएगा।"
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चंद्रशेखर की इस त्वरित प्रतिक्रिया ने स्थानीय मुस्लिम समुदाय और मजार पक्ष को एक बड़ी ढांढस बंधाई है। वे अब राजस्व विभाग की अंतिम निष्पक्ष रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
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आमने-सामने के दावे (एक नजर में)

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इस पूरे विवाद को अगर निष्पक्ष नजरिए से देखें, तो दोनों पक्षों के अपने-अपने मजबूत दावे हैं:
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    प्रथम पक्ष (कॉलोनी वासी एवं डॉ. एमपी सिंह): "यह जमीन मूल रूप से एक सार्वजनिक 'आम रास्ता' है। मजार प्रबंधन ने अपनी सीमा का विस्तार करते हुए अवैध रूप से अतिक्रमण कर दीवार खड़ी कर दी थी, जिससे रास्ता बाधित हो रहा था। प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह से वैध है।"
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    द्वितीय पक्ष (मजार प्रबंधन एवं स्थानीय मुस्लिम समुदाय): "यह भूमि पीर बाबा की है और सदियों से हमारे पास है। हमने किसी आम रास्ते पर कब्जा नहीं किया। बिना किसी उचित कानूनी नोटिस के आधी रात को धार्मिक स्थल की दीवार गिराना सरासर गलत और दुर्भावनापूर्ण है।"
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वर्तमान स्थिति और आगे का रास्ता

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फिलहाल, धामपुर कस्बे की स्थिति तनावपूर्ण लेकिन पूरी तरह से नियंत्रण में है। एहतियात के तौर पर टीचर कॉलोनी और मजार के आसपास के इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। आरएएफ (RAF) और पीएसी (PAC) के जवान लगातार फ्लैग मार्च कर रहे हैं ताकि कोई असामाजिक तत्व इस विवाद का फायदा उठाकर शांति भंग न कर सके।
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प्रशासनिक अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि आगे की कोई भी कार्रवाई या निर्णय अब पूरी तरह से राजस्व विभाग (Revenue Department) की संयुक्त जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। जमीन की पैमाइश (नाप-जोख) फिर से कराई जा रही है। पुराने नक्शों का मिलान किया जा रहा है।
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अब सभी की निगाहें राजस्व विभाग की उस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ होगा कि जमीन का वास्तविक मालिकाना हक किसके पास है और क्या गिराई गई दीवार वाकई अतिक्रमण के दायरे में आती थी। तब तक स्थानीय प्रशासन ने सभी नागरिकों से शांति व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की सख्त अपील की है। धामपुर का यह मजार विवाद अब महज एक स्थानीय मुद्दा न रहकर, यूपी के बुलडोजर मॉडल और कानून व्यवस्था की कार्यप्रणाली का एक बड़ा राजनीतिक परीक्षण बन चुका है।
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