Anil Kumar Sharma, Special Correspondent-धामपुर (बिजनौर): आज के व्यावसायिक दौर में जहां चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं दिन-प्रतिदिन महंगी होती जा रही हैं, वहीं समाज में कुछ ऐसी संस्थाएं भी मौजूद हैं जो निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा में जुटी हुई हैं। इसी सेवा भाव की एक जीती-जागती मिसाल उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर शहर में देखने को मिली है। यहां 'सुसंस्कारित स्वास्थ्य सेवा' (संस्कारों से युक्त स्वास्थ्य सेवा) के अपने मूल मंत्र को धरातल पर उतारते हुए 'दमयंती देवी प्रेरणा संस्थान' की ओर से शहर में एक विशाल 221वां निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर में न केवल मरीजों के स्वास्थ्य की जांच की गई, बल्कि उन्हें दवाइयां देकर पर्यावरण संरक्षण का भी एक बड़ा संदेश दिया गया।READ ALSO:-मेरठ में फिल्मी अंदाज में वारदात: बाजार जा रही महिला का पूर्व पति ने किया अपहरण, 8 दिन तक कमरे में बंधक बनाकर दी प्रताड़ना
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221वें कैंप का शानदार शुभारंभ और मरीजों की उमड़ी भीड़
\r\n\r\nयह चिकित्सा शिविर संस्थान के प्रधान कार्यालय 'दमयंती देवी नर्सिंग होम' के प्रांगण में आयोजित किया गया था। शनिवार की शाम को इस जनकल्याणकारी शिविर का भव्य शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री अनूप अग्रवाल जी ने अपने कर-कमलों से फीता काटकर किया। शिविर की शुरुआत होते ही शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों का आना शुरू हो गया।
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संस्थान का यह 221वां शिविर इस बात का प्रमाण है कि यह संस्था लंबे समय से आम जनमानस की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इतनी बड़ी संख्या में लगातार शिविर आयोजित करना किसी भी गैर-सरकारी संस्था (NGO) के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। शनिवार को लगे इस कैंप में गरीब, असहाय और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और इस मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा का लाभ उठाया।
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डॉ. आदित्य अग्रवाल (सर्जन) ने दी विशेषज्ञ सेवाएं
\r\n\r\nइस शिविर के मुख्य आकर्षण और मरीजों के लिए देवदूत बनकर उभरे शहर के जाने-माने सर्जन डॉ. आदित्य अग्रवाल। डॉ. अग्रवाल ने अपना बहुमूल्य समय निकालकर इस शिविर में सेवाएं दीं। उन्होंने कैंप में आए कुल 60 मरीजों के स्वास्थ्य की बेहद बारीकी से जांच की और उन्हें उचित चिकित्सकीय परामर्श (Medical Consultation) दिया।
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डॉ. आदित्य अग्रवाल ने मरीजों की केस हिस्ट्री सुनी, उनकी बीमारियों के लक्षण जाने और उन्हें स्वस्थ रहने के लिए उचित खान-पान तथा जीवनशैली में बदलाव के सुझाव दिए। आमतौर पर ऐसे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लेने के लिए मरीजों को लंबी लाइनें लगानी पड़ती हैं और भारी-भरकम फीस चुकानी पड़ती है, लेकिन दमयंती देवी प्रेरणा संस्थान के इस मंच पर यह सेवा पूरी तरह से निःशुल्क उपलब्ध थी, जिससे मरीजों के चेहरों पर एक अलग ही संतुष्टि और राहत के भाव देखे गए।
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3-3 दिन की मुफ्त दवाइयां और नाममात्र शुल्क पर जांचें
\r\n\r\nशिविर में केवल डॉक्टर का परामर्श ही मुफ्त नहीं था, बल्कि मरीजों के इलाज का पूरा ध्यान रखा गया। डॉ. आदित्य अग्रवाल द्वारा मरीजों को जो भी दवाइयां लिखी गईं, वे संस्था की ओर से बिल्कुल मुफ्त (Free of Cost) उपलब्ध कराई गईं। प्रत्येक मरीज को उनकी बीमारी के अनुसार तीन-तीन दिन की दवाइयां निःशुल्क वितरित की गईं, ताकि वे अपनी बीमारी की शुरुआत में ही राहत पा सकें और उन्हें मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां न खरीदनी पड़ें।
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इसके अलावा, जिन मरीजों को रक्त जांच (Blood Test) या अन्य पैथोलॉजी जांचों की आवश्यकता थी, उनके लिए कैंप में विशेष व्यवस्था की गई थी। बाजार में जहां इन जांचों के लिए सैकड़ों-हजारों रुपए खर्च करने पड़ते हैं, वहीं इस कैंप में मरीजों के लिए सभी आवश्यक जांचें केवल नाममात्र के शुल्क (रियायती दरों) पर की गईं। इस सुविधा से उन गरीब परिवारों को बहुत मदद मिली, जो आर्थिक तंगी के कारण अपनी बीमारियों की जांच नहीं करा पाते हैं।
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स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण की चिंता: "पॉलिथीन मुक्त अपना देश-प्रदेश और शहर"
\r\n\r\nदमयंती देवी प्रेरणा संस्थान की सोच केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज के संपूर्ण स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर भी पूरी तरह से जागरूक हैं। एक स्वस्थ शरीर के लिए एक स्वच्छ पर्यावरण का होना बेहद जरूरी है। इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए शिविर में आए मरीजों और उनके तीमारदारों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।
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संस्थान द्वारा शिविर में "पॉलिथीन मुक्त अपना देश-प्रदेश और शहर" नामक एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। आयोजकों ने मंच से लोगों को समझाया कि सिंगल-यूज प्लास्टिक और पॉलिथीन किस तरह से हमारे पर्यावरण, पशु-पक्षियों और अंततः इंसानी स्वास्थ्य के लिए एक साइलेंट किलर (Silent Killer) साबित हो रही है। पॉलिथीन से होने वाले प्रदूषण के कारण कई तरह की गंभीर बीमारियां जन्म ले रही हैं।
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10 रुपए की सहयोग राशि में बांटे गए कपड़े के थैले
\r\n\r\nपॉलिथीन के उपयोग को हतोत्साहित करने और लोगों को एक व्यावहारिक विकल्प (Practical Alternative) प्रदान करने के लिए संस्था ने एक अनूठी पहल की। शिविर में मरीजों और आम जनता को कपड़े से बने मजबूत और इको-फ्रेंडली (Eco-friendly) थैले वितरित किए गए। इन थैलों के लिए लोगों से केवल 10 रुपए की नाममात्र सहयोग राशि (Contribution) ली गई। यह सहयोग राशि इसलिए रखी गई ताकि लोगों को उस थैले की अहमियत समझ में आए और वे उसका जिम्मेदारी से उपयोग करें। संस्था की इस पहल की वहां मौजूद सभी लोगों ने जमकर सराहना की और कई लोगों ने संकल्प लिया कि वे भविष्य में बाजार जाते समय प्लास्टिक की थैलियों के बजाय घर से कपड़े का थैला लेकर ही निकलेंगे।
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युवा वॉलिंटियर्स की टीम ने निभाई अहम भूमिका, किया गया सम्मानित
\r\n\r\nकिसी भी बड़े आयोजन या चिकित्सा शिविर को सफल बनाने के पीछे एक मजबूत और समर्पित टीम का हाथ होता है। दमयंती देवी प्रेरणा संस्थान के इस 221वें शिविर की सफलता का पूरा श्रेय संस्था के उन युवा और कर्मठ कार्यकर्ताओं (Volunteers) को जाता है, जिन्होंने दिन-रात एक करके इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की और इसे सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
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मरीजों का पंजीकरण (Registration) करने से लेकर, उन्हें लाइन में लगाने, डॉक्टर के केबिन तक ले जाने, दवाइयों का वितरण करने और उन्हें पॉलिथीन के खिलाफ जागरूक करने तक का सारा जिम्मा इन युवाओं ने अपने कंधों पर उठाया था। शिविर को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने में गौरव सिंह, साहिल, अखिलेश, पंकज, गौरव, हिमांशु, कपिल, नन्हे, आनंद, मोहित, संकेत, सौरभ और आनंद आदि कार्यकर्ताओं का योगदान बेहद सराहनीय रहा। इन सभी कार्यकर्ताओं ने पूरी विनम्रता और 'सुसंस्कारित' भाव से मरीजों की सेवा की। कार्यक्रम के अंत में संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इन सभी युवाओं के निस्वार्थ सेवा भाव की प्रशंसा की और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
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दमयंती देवी प्रेरणा संस्थान का यह आयोजन समाज के लिए एक प्रेरणा है कि यदि संकल्प सच्चा हो, तो संसाधनों की कमी के बावजूद समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं और जागरूकता पहुंचाई जा सकती है। शहरवासियों को उम्मीद है कि भविष्य में भी संस्था ऐसे ही जनकल्याणकारी कार्य करती रहेगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.